Feb 15, 2017

Rajgir Veeraytan राजगीर वीरायतन में जन्म कल्याणक महोत्सव


Rajgir Veeraytan 
परमात्मा श्री मुनिसुव्रत स्वामी जी भगवान के चार कल्याणक और परमात्मा महावीर स्वामीजी के 14 चातुर्मास से परम पवित्र बनी धरती स्वर्ग से भी सुन्दर राजगृही महातीर्थ खरतरगच्छ अधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी महाराजा एवं संघरत्ना माताजी म सा एवं बहिन मसा साध्वी डॉ श्री विद्युत प्रभा श्रीजी मसा आदि साधू साध्वीजी की क्षेमंकरी पावन निश्रा में राजगृही नगरी में आचार्य चंदनाजी द्वारा स्थापित वीरायतन में नव निर्मित श्री पारसनाथजी जिन मंदिरजी की भव्यातिभव्य अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव प्रारम्भ हो चुकी है। अंजनशलाका प्रतिष्ठा 17 फरवरी 2017 को होगी । 56 दिक् कुमारिकाओ सह आज परमात्मा पार्श्वनाथ जी का जन्म कल्याणक भव्यता के साथ मनाया । 
Rajgir Veeraytan 

Feb 8, 2017

Shri Maniprabhsagarji ms. पूज्य गुरुदेव आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरिजी म. सा. आदि ठाणा का विहार कार्यक्रम

पूज्यश्री का कार्यक्रम

पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य देव श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री मलयप्रभसागरजी म. ठाणा 3 एवं पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पूजनीया बहिन म. डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. आदि ठाणा 11 ता. 12 जनवरी 2017 को सम्मेतशिखरजी से विहार कर परमात्मा महावीर की केवलज्ञान भूमि ऋजुबालिका पधारे। वहाँ से काकन्दी होते हुए ता. 25 जनवरी को गुणायाजी तीर्थ पधारे। पुन: वहाँ से विहार कर ता. 30 जनवरी को पावापुरी तीर्थ पधारे। जहाँ पूज्यश्री का ट्रस्ट मंडल की ओर से स्वागत किया गया।
ता. 31 जनवरी को वीरायतन, पावापुरी के निवेदन पर पूज्यश्री का वहाँ प्रवचन आयोजित हुआ। ता. 1 फरवरी को पावापुरी में पूज्यश्री की निश्रा में एक नूतन धर्मशाला का भूमिपूजन किया गया।
तीन दिनों की स्थिरता के पश्चात् विहार कर कुंडलपुर होते हुए ता. 3 फरवरी को राजगृही वीरायतन पधारे।
पूज्यश्री यहाँ 15 दिन बिराजेंगे, पूज्यश्री की निश्रा में ता. 17 फरवरी को अंजनशलाका प्रतिष्ठा होगी।

प्रतिष्ठा के पश्चात् पूज्यश्री विहार कर गुणायाजी होते हुए छत्तीसगढ की ओर विहार करेंगे।
संपर्क सूत्र-

द्वारा- श्री मोतीलालजी झाबक
मेसर्स झाबक ट्रेक्टर्स, कमासीपारा, सत्ती बाजार
पो. रायपुर- 491001 छ.ग.

संपर्क-  मुकेश- 097843 26130  
                @ 098251 05823, 
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पूज्य उपाध्याय प्रवर  श्री मनोज्ञसागरजी म. सा. एवं मुनि नयज्ञसागरजी म. की निश्रा में बामणोर में प्रतिष्ठा उल्लासपूर्वक संपन्न हुई. अभी भाडखा गाव की और विहार किया है . फिर जैसलमेर के लिए विहार करेंगे . 
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पूज्य मुनि प्रवर  श्री मुक्तिप्रभसागरजी म. सा. एवं मुनि मनीषप्रभसागरजी   म. जहाज मंदिर में बिराजमान है. 
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पूज्य मुनि श्री मयंकप्रभसागरजी म. मेहुलप्रभसागरजी म. आदि ठाणा पालिताना के श्री जिन हरि विहार धर्मशाला में  बिराजमान है।

संपर्क  02848 252653,  094270 63069 

Feb 7, 2017

Gunaya Tirth श्री गुणायाजी तीर्थ का जीर्णोद्धार होगा

श्री जैन श्वेताम्बर भंडार तीर्थ पावापुरी ट्रस्ट मंडल द्वारा लिये गये निर्णयानुसार भगवान महावीर स्वामी के प्रथम गणधर अनंत लब्धि निधान गुरु गौतमस्वामी की केवलज्ञान प्राप्ति भूमि श्री गुणायाजी तीर्थ का आमूलचूल जीर्णोद्धार कराया जायेगा।

इसी पावन भूमि पर परमात्मा महावीर के समवशरण लगे थे। यह भूमि गुणशील चैत्य कहलाती थी। यह जीर्णोद्धार पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में उनकी प्रेरणा से संपन्न होगा। जीर्णोद्धार का प्रारंभ 23 फरवरी 2017 को पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री की निश्रा में होगा।

Gunaya Tirth श्री गुणायाजी तीर्थ में नवनिर्मित धर्मशाला का उद्घाटन संपन्न

पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य मुनिराज श्री मनितप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री मलयप्रभसागरजी म. ठाणा 3 एवं पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पू. बहिन म. डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. पू. साध्वी डाँ. श्री शासनप्रभाश्रीजी म. पू. साध्वी डाँ. श्री नीलांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रज्ञांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री दीप्तिप्रज्ञाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री नीतिप्रज्ञाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री विभांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री विज्ञांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री निष्ठांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री आज्ञांजनाश्रीजी म. ठाणा 11 की पावन निश्रा में गौतमस्वामी गणधर भगवंत की केवलज्ञान प्राप्ति भूमि श्री गुणायाजी तीर्थ पर नवनिर्मित विशाल धर्मशाला- प्रवर्तिनी प्रमोदश्री धर्मशाला का उद्घाटन समारोह श्री जैन श्वेताम्बर भंडार तीर्थ पावापुरी के तत्वावधान में सानन्द संपन्न हुआ।
इस पावन अवसर पर पावापुरी की ओर विहार करते हुए पधारे पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय कीर्तियशसूरीश्वरजी म.सा. का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ।
धर्मशाला का उद्घाटन मुख्य लाभार्थी परिवार श्री नेमीचंदजी जसराजजी बाबूलालजी छाजेड परिवार इचलकरंजी निवासी हरसाणी वालों की ओर से किया गया।

Jan 14, 2017

Khartargacch Yuva Parishad अखिल भारतीय खरतर गच्छ युवा परिषद् द्वारा वांचना शिविर का आयोजन

Khartargachchh Yuva Parishad
अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद् के तत्वाधान में श्री सम्मेतशिखरजी तीर्थ के प्रांगण में ऐतिहासिक त्रिदिवसीय वांचना शिविर 7 जनवरी से 9 जनवरी 2017 को खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीजी म.सा. की क्षेमंकरी निश्रा में अत्यंत ही हर्षोउल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन का लाभ गढ़ सिवाना (हाल अहमदाबाद) निवासी श्रीमान अशोककुमारजी मानमलजी भंसाली परिवार ने लिया। इस शिविर में 250 से अधिक स्वाध्याय प्रेमी श्रावक श्राविकाओं ने भाग लिया।
वांचना शिविर के पहले दिन सम्मेतशिखरजी तीर्थ के राजेंद्र भवन से गुरुदेव ने सभी शिविरार्थी व लाभार्थी परिवार के साथ गाजते बाजते मधुबन श्वेताम्बर जैन सोसाइटी के रांका भवन के व्याख्यान हाल में प्रवेश किया। दीप प्रवज्जलन के पश्चात Kयुप का राष्ट्रीय गान हुआ। तत्पश्चात स्वागत भाषण में शिविर के लाभार्थी व Kयुप के चैयरमैन श्री अशोक जी भंसाली ने सभी को शिविर में पधारने की बधाई दी वरघोड़े की भव्यता देख अशोकजी ने कहा कि मुझे ऐसा लग रहा है जैसे हम चतुर्विध संघ का छरीपालित संघ लेकर आये है। K युप के राष्ट्रीय अध्यक्ष रतनजी बोथरा ने शिविर में पधारे महानुभावों व लाभार्थी परिवार को धन्यवाद दिया। तत्पश्चात गुरुदेव ने मंगलाचरण के बाद स्वाध्याय का महत्त्व समझाया और जैन धर्म की महिमा बताई।
Khartargachchh Yuva Parishad
तीनो दिन शिविर का कार्यक्रम में प्रात: योग प्राणायाम, साढ़े पांच बजे नवकार महामंत्र महिमा के बाद प्रभु दर्शन सेवा पूजा अल्पाहार। साढे आठ बजे से जैन धर्म मीमांसा, मंदिर अनुष्ठान, गच्छ का इतिहास, स्वाध्याय का महत्व, अनुशासन आदि विषयों पर वाचना। दोपहर में तत्वज्ञान एवं प्रश्नोत्तरी, शाम को प्रभु भक्ति के बाद प्रतिक्रमण और रात्रि प्रभु भक्ति की गयी
      प्रश्नोत्तरी में श्रावक श्राविकाओं द्वारा पूछे गए सवालों को आचार्य श्री ने बहुत ही सरलता से समझाया। शिविर में पधारे लोग गुरुदेव की सरलता देख मंत्रमुग्ध हो गए. सभी के चेहरे एक असीम आनंद की अनुभूति से छलक रहे थे।
       शिविर में स्वाध्याय प्रेमिओं का अनुशासन देखते ही बनता था। सभी लोग ठीक समय पर सामायिक के वस्त्र में आते थे एवं गुरुदेव द्वारा स्वाध्याय बहुत ही आनंद के साथ कर रहे थे शिविर को आचार्य भगवंत के साथ मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म. व बहिन म. विधुतप्रभाश्रीजी एवं निलांजानाश्रीजी ने भी स्वाध्याय करवाया।
शिविर में जैन श्वेताम्बर सोसायटी मधूबन के अध्यक्ष श्री कमलसिंहजी रामपुरिया, अखिल भारतीय खरतरगच्छ प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष मोतीलालजी झाबक, कुशल वाटिका के अध्यक्ष भवरलालजी छाजेड़, कोलकता से ज्ञानचंदजी लुनावत, विजयराजजी लोढ़ा, सुनीलजी चोरडिया, श्यामसुंदरजी वैद, रायपुर से संतोषजी गोलेच्छा, सुरेशजी कांकरिया, कुशलजी गोलेच्छा आदि कई गणमान्य लोगों ने शिबिर का लाभ लिया।
शिविर के समापन समारोह के दिन इन सभी महानुभावों का लाभार्थी परिवार द्वारा बहुमान किया गया। शिविर का सुन्दर भव्यता एवं K-युप के सदस्यों का उत्साह देख अगले शिविर हेतु कई गणमान्य महानुभावों ने अगले शिविर का लाभ देने का निवेदन किया जिसमें रायपुर निवासी श्री मोतीलाल जी झाबक को गुरुदेव ने स्वीकृति दी।
शिविर में बहुप्रतीक्षित अखिल भारतीय खरतरगच्छ महिला परिषद् के गठन की घोषणा की गयी। शिविर में K युप द्वारा प्रति वर्ष वार्षिक कैलेंडर छापने का भी निर्णय लिया गया।
अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद ने लाभार्थी परिवार का माला, श्रीफल, साफा, अभिनन्दन पत्र मोमेंटो द्वारा बहुमान किया व Kयुप के महामंत्री प्रदीप श्रीश्रीश्रीमाल ने लाभार्थी परिवार एवं शिविर में पधारे हुए सभी लोगो को धन्यवाद दिया। त्रिदिवसीय कार्यक्रम का पूरा मंच संचालन K युप के सहमंत्री मधुरभाषी श्री रमेशजी लुंकड़ ने किया।

प्रेषक: गौतम संकलेचा चेन्नई
अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद् केंद्रीय प्रचार प्रसार समिति

Jan 4, 2017

shri Kshamakalyan mahopadhyay क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह का अनेक स्थानों पर विमोचन संपन्न

shri Kshamakalyan mahopadhyay
पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी महाराज के आज्ञानुसार अखिल भारत में पूज्य विद्वद् शिरोमणि महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज की 200 वीं पुण्यतिथि पौष वदि चतुर्दशी, दिनांक 28 दिसंबर 2016 आराधना, गुणानुवाद, स्नात्र पूजा, दादा गुरुदेव की पूजा के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज द्वारा रचित 119 कृतियों की संकलित पुस्तकें ‘क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह भाग प्रथम और ‘क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह भाग द्वितीय’ का विमोचन भी किया गया। कृति संग्रह का संपादन-संकलन पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी महाराज के आशीर्वाद से उनके शिष्य आर्य मेहुलप्रभसागरजी महाराज द्वारा किया गया। 

जोधपुर

श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ जोधपुर के तत्वावधान में पूज्य आचार्यदेव श्री जिनकांतिसागरसूरिजी महाराज के शिष्य-प्रशिष्य पूज्य मुनिराज श्री मुक्तिप्रभसागरजी म. व पूज्य मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी म. की पावन निश्रा में सरदारपुरा स्थित दादावाडी में श्री क्षमाकल्याणजी महाराज की गुणानुवाद सभा एवं क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह के दोनों भागों का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर अनेक लोग उपस्थित रहे। पूज्य मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी ने महोपाध्यायजी के जीवन चरित्र का वर्णन कर उनके उपकारों की स्मृति करवाई।

दिल्ली 

खरतरगच्छ युवा परिषद दिल्ली शाखा के तत्वावधान में गणिनी पद विभूषिता श्री सुलोचनाश्रीजी म.सा. की सुशिष्या समतामूर्ति पूज्या साध्वी श्री प्रियस्मिताश्रीजी म.सा., पूज्या साध्वी श्री प्रियलताश्रीजी म.सा., पूज्या साध्वी श्री प्रियवंदनाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा 6 की पावन निश्रा में श्री क्षमाकल्याणजी महाराज की गुणानुवाद सभा एवं क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह के दोनों भागों का विमोचन किया गया।
समस्त कार्यक्रम केयूप-दिल्ली शाखा के कर्मठ कार्यकर्ता श्री सुबोधजी कोठारी के निवास स्थान पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम के पश्चात श्री सुबोधजी कोठारी द्वारा अल्पाहार का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर व्यवस्था सहयोगी श्री धनपतजी बोहरा का आभार व्यक्त किया गया।
प्रेषक-मनीष नाहटा (अध्यक्ष)
केयूप- दिल्ली शाखा

चेन्नई 

खरतरगच्छ युवा परिषद चेन्नई शाखा के तत्वावधान में महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी म.सा. की 200वीं पुण्य तिथि पर छत्तीसगढ़ रत्न शिरोमणि साध्वी श्री मनोहरश्रीजी म.सा. की सुशिष्या पूज्या साध्वी श्री सुमित्राश्रीजी म.सा. आदि ठाणा 4 की पावन निश्रा में श्री क्षमाकल्याणजी की गुणानुवाद सभा एवं श्री क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह पुस्तक के दोनों भागों का विमोचन महेन्द्रजी कोठारी एवं रणजीत गुलेच्छा द्वारा किया गया।
समस्त कार्यक्रम केयूप-चेन्नई शाखा द्वारा श्री जिनदत्तसूरि जैन धर्मशाला धर्मनाथ मंदिर में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में साध्वीश्रीजी ने क्षमाकल्याणजी के संयम जीवन और तप त्याग को अच्छी तरह से समझाया उसके पश्चात उनके जीवन पर प्रश्नोत्तरी हुई। 
महेंद्रजी कोठारी ने महोपाध्यायजी की जीवनी पर प्रकाश डाला। विचक्षण महिला मंडल ने गीत के द्वारा भाव व्यक्त कियेे।
सभा में श्री जिनदत्तसूरी जैन मंडल के ट्रस्टी सहित केयुप चेन्नई शाखा के सदस्य उपस्थित थे।
प्रेषक-गौतम संकलेचा, कोषाध्यक्ष
केयूप- चेन्नई शाखा

बेंगलोर

बैंगलोर बसवनगुड़ी स्थित श्री जिनकुशलसूरि दादावाडी आराधना भवन के प्रांगण में महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज की 200 वीं पुण्यतिथि निमित्ते सह पूज्या साध्वी श्री प्रियवंदाश्रीजी म. आदि ठाणा 6 के आराधनामय प्रभावक चातुर्मासिक आराधना —तज्ञता समारोह के उपलक्ष्य में खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी महाराज की आज्ञानुसार पूज्या साध्वी श्री प्रियवंदाश्रीजी, शुद्धांजनाश्रीजी आदि ठाणा 6 की पावन निश्रा में बसवनगुड़ी में ता. 28.12.16 को प्रात: 9.30 बजे पूज्य महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज, जिनके नाम की वासक्षेप गुरू भगवंत हमें आशीर्वाद स्वरूप प्रदान करते हैं, की 200वीं पुण्यतिथि मनाई गई, एवं उनके द्वारा रचित पुस्तक क्षमाकल्याणजी —ति संग्रह भाग-१ एवं भाग-२ का विमोचन महेंद्रजी रांका, चुन्नीलालजी गुलेच्छा, लाभचंदजी मेहता, कुशलजी गुलेच्छा द्वारा किया गया।
सभा में महेंद्रजी रांका, तेजराजजी गुलेच्छा, कुशलजी गुलेच्छा अरविन्दजी कोठारी, ललितजी डाकलिया, विजयलक्ष्मीजी कोठारी ने अपना वक्तव्य दिया। साथ ही पूज्या गुरूवर्याओं का चातुर्मास —तज्ञता ज्ञापन समारोह, जिन्होंने हमें चार महीनों तक अनवरत ज्ञान की गंगा में भिगोया उनका आभार ज्ञापन किया गया। शांतिलालजी गोठी द्वारा गीतिका प्रस्तुत की गई।
तत्पश्चात सकल संघ का स्वामीवात्सल्य रखा गया। महोत्सव में श्री जिनदत्त कुशल सूरि जैन सेवा मंडल व खरतरगच्छ युवा परिषद्, बैंगलोर शाखा का विशेष सहयोग रहा।
प्रेषक- ललित डाकलिया, अध्यक्ष
केयुप बेंगलोर

मुम्बई

श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ सांचोर के तत्वावधान में गणिनी पद विभूषिता श्री सुलोचनाश्रीजी म.सा. की सुशिष्या पूज्या साध्वी श्री प्रियरंजनाश्रीजी म.सा, पूज्या साध्वी श्री दिव्यांजनाश्रीजी म.सा., पूज्या साध्वी श्री प्रियशुभांजनाश्रीजी म.सा. की पावन निश्रा में मुम्बई िस्थ्त विल्सन गली के कुशल भवन में श्री क्षमाकल्याणजी महाराज की गुणानुवाद सभा एवं क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह के दोनों भागों का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर गणमान्य लोग उपस्थित रहे। साध्वीश्रीजी ने महोपाध्यायजी के वासक्षेप के महत्व को समझाते हुए महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की सीख दी।

हैदराबाद

महावीर भवन, फीलखाना, हैदराबाद. के पवित्र प्रांगण में महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज की 200 वीं पुण्यतिथी निमित्ते खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी महाराज की आज्ञानुसार पूज्या साध्वी श्री विरागज्योतिश्रीजी म., साध्वी विश्वज्योतिश्रीजी म. की पावन निश्रा में ता. 28.12.16 को सुबह 9.30 बजे दिव्य वासक्षेप मंत्रितकर्ता पूज्य महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज की 200वीं पुण्यतिथि मनाई गयी। गुणानुवाद सभा में क्षमाकल्याणजी —ति संग्रह भाग-१ एवं भाग-२ का विमोचन फीलखाना जैन मंदिर के अध्यक्ष चुन्नीलालजी संकलेचा, खरतरगच्छ संंघ हैदराबाद के अध्यक्ष बाबुलालजी संकलेचा द्वारा किया गया। 
महोपाध्यायजी की पुण्यतिथि के उपलक्ष में खरतरगच्छ युवा परिषद्, हैदराबाद शाखा द्वारा फिलखाना स्थित जिनमन्दिर शुद्धिकरण व सभी मुर्तिओं का विलेपन दि. 25 दिसंबर को दोपहर बारह बजे किया गया। 
इस पूनीत कार्य मेें ज्ञानवाटिका के विद्यार्थियोें ने सराहनीय सहयोग दिया। परिषद् द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।
प्रेषक-अशोक संकलेचा, कोषाध्यक्ष
केयूप- हैदराबाद शाखा

नंदुरबार

श्री अजितनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ नंदुरबार के तत्वावधान में पूज्या गणिनी पद विभूषिता साध्वीवर्या श्री सूर्यप्रभाश्रीजी म. व साध्वीश्री पूर्णप्रभाश्रीजी म. आदि ठाणा की पावन निश्रा में श्री क्षमाकल्याणजी महाराज की गुणानुवाद सभा एवं क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह के दोनों भागों का विमोचन किया गया।
विमोचन पुखराजजी श्रीश्रीमाल एवं भीमराजजी कवाड ने किया।
इस अवसर पर अनेक लोग उपस्थित रहे। पूज्या गणिनी पद विभूषिता साध्वीवर्या श्री सूर्यप्रभाश्रीजी म. व साध्वी श्री हर्षपूर्णाश्रीजी म. ने महोपाध्यायजी के जीवन चरित्र का वर्णन कर वासक्षेप का महत्व बतलाया।

सुरत

प.पू. खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञा और प्रेरणा से महोपाध्याय प.पू. क्षमाकल्याणजी महाराज की 200 वीं पुण्यतिथि निमित्ते श्री मुनिसुव्रतस्वामी जैन मंदिर और श्री जिनदत्तसूरि जैन दादावाड़ी, हरिपुरा, सूरत का शुद्धिकरण दिनांक 1 जनवरी 2017, रविवार को श्री संघ के सदस्य एवं खरतरगच्छ युवा परिषद् सुरत के सदस्यों द्वारा किया गया। जिसमें दादावाडी ट्रस्ट व उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।
इस आयोजन लाभ श्री चंदनमलजी मिश्रीमलजी छाजेड़, केयुप-सुरत सचिव अल्पेश चंदनमलजी छाजेड़, गढ़सिवाना वालों ने लिया।
शुद्धिकरण के कार्यक्रम के बाद अल्पाहार रखा गया।

प्रेस विज्ञप्ति

Bikaner बीकानेर में द्विशताब्दी महोत्सव 6 जनवरी से

shri Kshamakalyan mahopadhyay
पूज्य महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी म.सा. के द्विशताब्दी स्वर्गारोहण पर्व के पावन उपलक्ष्य में उनकी समाधि भूमि बीकानेर नगर में ता. 6 से 8 जनवरी 2017 तक त्रिदिवसीय भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 
पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञा व आशीर्वाद से उनकी आज्ञानुवर्तिनी पूजनीया गुरुवर्या श्री हेमप्रभाश्रीजी म.सा. की शिष्या पूजनीया साध्वी श्री कल्पलताश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में यह आयोजन संपन्न होगा।
इस आयोजन के अन्तर्गत ता. 6 जनवरी को सुगनजी के उपाश्रय में गुणानुवाद सभा का आयोजन होगा। यह ज्ञातव्य है कि इस उपाश्रय का निर्माण पूज्य क्षमाकल्याणजी म.सा. की प्रेरणा से ही संपन्न हुआ था। इस सभा के मुख्य अतिथि नगर विकास न्यास के अध्यक्ष श्री महावीरजी रांका होंगे। अध्यक्षता बीकानेर के महापौर श्री चौपडाजी करेंगे।
श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री पन्नालालजी खजांची व मंत्री श्री शांतिलालजी सुराणा ने बताया कि इसी दिन पूज्य क्षमाकल्याणजी म. द्वारा रचित एवं आर्य श्री मेहुलप्रभसागरजी म. द्वारा संपादित श्री क्षमाकल्याण कृति संग्रह भाग एक व दो का विमोचन किया जायेगा।
ता. 7 जनवरी को दादा गुरुदेव के चमत्कारों पर आधारित विशेष नाटिका की प्रस्तुति होगी, जिसका निर्देशन मुंबई निवासी डाँ. प्रेमलताजी ललवानी करेंगे।
ता. 8 जनवरी को रेल दादावाडी में दादा गुरुदेव का महापूजन पढाया जायेगा। यह ज्ञातव्य है कि इस रेल दादावाडी की स्थापना के 400 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस दादावाडी की स्थापना चतुर्थ दादा गुरुदेव श्री जिनचन्द्रसूरि के स्वर्गवास के तीन वर्ष बाद उनकी पावन स्मृति में की गई थी। 

Dec 27, 2016

Mahopadhyay Shree Kshamakalyan ji Maharaj पद्मश्री विभूषित पुरातत्त्वाचार्य मुनि जिनविजयजी का मंतव्य-

Mahopadhyay Shree Kshamakalyan ji Maharaj
महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज के गुणानुवाद स्वरुप पद्मश्री विभूषित पुरातत्त्वाचार्य मुनि जिनविजयजी का मंतव्य-
         ‘‘महोपाध्याय क्षमाकल्याण गणी राजस्थान के जैन विद्वानों में एक उत्तम कोटि के विद्वान् थे और अन्य प्रकार से अन्तिम प्रौढ पंडित थे। इनके बाद राजस्थान में ही नहीं अन्यत्र भी इस श्रेणि का कोई जैन विद्वान् नहीं हुआ। इनने जैन यतिधर्म में दीक्षित होने बाद, आजन्म अखण्डरूप से साहित्योपासना साहित्यिक रचनाएँ निर्मित हुई। साहित्यनिर्माण के अतिरिक्त तत्कालीन जैन समाज की धार्मिक प्रवृत्ति में भी इनने यथेष्ट योगदान दिया जिसके फलस्वरूप, केवल राजस्थान में ही नहीं परन्तु मध्यभारत, गुजरात, सौराष्ट्र, विदर्भ उत्तरप्रदेश, बिहार और बंगाल जैसे सुदूर प्रदेशो में भी जैन तीर्थों की संघयात्राएँ देवप्रतिष्ठाएँ और उद्यापनादि विविध धर्मक्रियाएँ संपन्न हुई। इनके पांडित्य और चारित्र्य के गुणों से आकृष्ट होकर, जेसलमेर, जोधपुर और बीकानेर के तत्कालीन नरेश भी इन पर श्रद्धा एवं भक्ति रखते थे ऐसा इनके जीवनचरित्र संबन्धी उपलब्ध सामग्री से ज्ञात होता है।’’
         राजस्थानी शैली के इस चित्र में महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी को अपने किसी विशिष्ट भक्तजन के सम्मुख धर्मोपदेश देते हुए चित्रित किये गये हैं। चित्र में अंकित स्थान और व्यक्तियों के प्रभावशाली दृश्य से ज्ञात होता है किसी राजनिवास में बैठ कर किसी राजा को धर्मोपदेश देने के अवसर का भाव इसमें व्यक्त किया गया है।    
         ‘‘ ........ इनका स्वर्गवास बीकानेर में हुआ और वहाँ पर इनका उपाश्रय और उसमें सुरक्षित इनका ज्ञानभंडार भी अभी तक विद्यमान है। इनके स्वयं के हाथ के लिखे कई ग्रन्थ और पट्ट, पत्रादि भी अन्यान्य स्थानों में प्राप्त होते हैं।’’
         ‘‘........ जैन समाज का कर्तव्य है कि वह अपने समाज के ऐसे आदर्श और उत्तम विद्वान् की समग्र साहित्यिक सामग्री को प्रकाश में लाने का प्रयत्न करे।’’

Mahopadhyay Shree Kshamakalyan ji Maharaj महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज का परिचय

Mahopadhyay Shree Kshamakalyan ji Maharaj
महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज का जन्म ओशवंश के मालुगोत्र में केसरदेसर नाम के गाँव में संवत् १८०१ में हुआ था। सं. १८१२ में अपनी ११ वर्ष की उम्र में ही उन्होंने वाचक श्रीअमृतधर्मजी महाराज से दीक्षा ग्रहण की। 
अपने जीवनकाल में उनके विहार का अधिक समय बिहार प्रान्त के पटना आदि स्थलो में काफी बीता है। वि. सं. १८७२ पौष वदी १४ को बीकानेर में कालधर्म को प्राप्त हुवे। इनका विस्तृत जीवन चरित्र श्री क्षमाकल्याणचरित नाम के ग्रन्थ में है। इसकी रचना जोधपुर महाराजा के निजी पुस्तकभण्डार के उपाध्यक्ष पं. श्रीनित्यानन्दजी शास्त्री ने की है। सुन्दर संस्कृत श्लोकों में श्री क्षमाकल्याणजी का पूर्ण जीवनवृतान्त दिया गया है। 
इनकी प्राप्त रचनाओं में मुख्य रचनायें निम्न हैं-
तर्कसंग्रह फक्किका (1827), भूधातु वृत्ति (1829), समरादित्य केवली चरित्र पूर्वाद्ध, अंबड चरित्र, गौतमीय महाकाव्य टीका, सूक्त रत्नावली स्वोपज्ञ टीका सह, यशोधर चरित्र, चैत्यवन्दन चतुर्विंशति, विज्ञान चन्द्रिका, खरतरगच्छ पट्टावली, जीवविचार टीका, परसमयसार विचार संग्रह, प्रश्नोत्तर सार्धशतक, साधु-श्रावक विधि प्रकाश, अष्टाह्निकादि द्वादश पर्व व्याख्यान, प्रतिक्रमण हेतु, विविध स्तोत्र आदि अनेकों ग्रन्थ एवं शताधिक स्तवनादि, अनेक सज्झाय आदि गेय रचनाएं प्राप्त है।
महोपाध्यायजी ने जीवन काल में निम्नोक्त स्थानों पर प्रतिष्ठा करवाई। अजीमगंज, महिमापुर, महाजन टोली, देवीकोट, देशणोक, अजमेर, बीकानेर, जोधपुर, मंडोवर आदि। साथ ही संवत् 1848 में पटना में सुदर्शन श्रेष्ठि के देहरे के समीप गणिका रूपकोशा के आवास स्थान पर जमींदार से खरीद की हुई जगह में स्थूलिभद्रजी की देहरी भी आपके उपदेश से बनी थी। आपने ही उसकी प्रतिष्ठा की थी। जिसका उल्लेख आपके द्वारा रचित स्थूलिभद्र गीत में उपलब्ध है।
श्री क्षमाकल्याणजी महाराज के छ: शिष्यो के नाम प्राप्त होते हैं- 1. कल्याणविजय, 2. विवेकविजय, 3. विद्यानन्दन, 4. धर्मानंद, 5. गुणानंद और 6. ज्ञानानंद। 
श्री क्षमाकल्याणजी महाराज जीवन के उत्तरकाल में वि.सं. 1873 के भाद्रपद कृष्ण पंचमी को जैसलमेर स्थित ज्ञानानंदादि मुनियों को पत्र दिया था उसमें लिखते हैं-
व्याख्यान उत्तराध्ययन 14वां अध्ययन बांचे है, समरादित्य चरित्र पाना 85 भया, चौथे भव के 1 पानो बाकी हैइत्यादि। इससे अंतिम समय में भी उनकी जिनशासन एवं श्रुतज्ञान की सेवा स्पष्ट परिलक्षित होती है। 
स्वर्गारोहण द्विशताब्दी के पुण्य अवसर पर पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसागरजी म. के शिष्य आर्य मेहुलप्रभसागरजी म. पूज्य क्षमाकल्याणजी महाराज के साहित्य की शोध करने का भगीरथ पुरुषार्थ किया है। उसी के फलस्वरूप 121 रचनाओं को दो भागों में प्रकाशित किया गया है। श्री क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह भाग प्रथम और श्री क्षमाकल्याणजी कृति संग्रह भाग द्वितीय के नाम से प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन भारत के विभिन्न नगरों में किया जा रहा है। साथ ही गुणानुवाद सभा, सामुहिक पूजा, जाप अनुष्ठान आदि किये जा रहे है।
स्वर्गारोहण द्विशताब्दी दिवस पर श्रद्धासिक्त नमन... शासन के सजग श्रुतप्रहरी का पावन स्मरण...