Aug 8, 2017

बीकानेर में खरतरगच्छ दिवस मनाया गया


पालीताना में संपन्न हुए खरतरगच्छ श्रमण श्रमणी सम्मेलन के निर्णय अनुसार श्रावण शुक्ल षष्ठी शनिवार को बीकानेर नगर में पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में खरतरगच्छ दिवस मनाया गया।
इस अवसर पर पूज्य आचार्यश्री ने खरतरगच्छ की विशिष्टताओं का वर्णन किया।
सभा का संचालन करते हुए पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म. ने जिन शासन के विकास में गच्छ के विविध क्षेत्रों में किये गये कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा- समस्त गच्छों में प्राचीन गच्छ खरतरगच्छ के आचार्य भगवंतों ने शासन विकास व विस्तार में अभूतपूर्व योगदान अर्पण किया है।
इस अवसर पर पूज्य पं. श्री पुण्डरीकरत्नविजयजी म. ने जिनशासन की महिमा का वर्णन करते हुए गच्छ के योगदान की सराहना की। पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म. ने खरतरगच्छ के अनुयायी विशिष्ट श्रावकों का वर्णन सुनाते हुए प्रेरणा दी कि हमें अपने वर्तमान को उनकी भांति संवारना है। पू. साध्वी श्री प्रियस्वर्णांजनाश्रीजी म. ने पूर्वाचार्य भगवंतों के जीवन के उदाहरण सुनाते हुए गच्छ विकास में योगदान अर्पण करने की प्रेरणा दी। बाद में पॉवर प्रेजेण्टेशन के माध्यम से पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म. ने गच्छ के इतिहास का सांगोपांग वर्णन किया। दो घंटे तक लगातार चले इस कार्यक्रम से सारी जनता प्रभावित हुई।

बीकानेर में स्वाध्याय शिविर संपन्न

बीकानेर में स्वाध्याय शिविर संपन्न
बीकानेर नगर में अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद् की केन्द्रीय समिति के तत्वावधान में पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में चार दिवसीय स्वाध्याय शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग 25 शिविरार्थियों ने भाग लिया।
पूज्यश्री ने शिविर का उद्देश्य समझाते हुए कहा- हमें अपने गच्छ के स्वाध्यायी तैयार करने हैं। ताकि वे उन स्थानों पर जाकर जहॉं साधु साध्वीजी भगवंतो का चातुर्मास नहीं है। वहॉं पर्युषण महापर्व की आराधना विधि विधान शास्त्र-शुद्धता के साथ करवा सके।
अलग अलग सेशन में पूज्यश्री ने कल्पसूत्र वांचन, अष्टाह्निका प्रवचन वांचन, विधि-विधान आदि के संबंध विस्तार से समझाया। स्वाध्यायी प्रकोष्ठ के संयोजक रमेश लूंकड ने इस शिविर का संचालन किया।

शिविर समापन अवसर पर केयुप चेयरमेन संघवी अशोकजी भंसाली, अध्यक्ष रतनजी बोथरा, महामंत्री प्रदीप श्रीश्रीश्रीमाल ने शिविरार्थियों का बहुमान कर उन्हें किट भेंट किया। केयुप बीकानेर के अध्यक्ष राजीव खजांची ने सभी को धन्यवाद दिया।

उज्जैन अवंती पार्श्वनाथ तीर्थ प्रतिष्ठा हेतु समिति की स्थापना

उज्जैन अवंती पार्श्वनाथ तीर्थ प्रतिष्ठा हेतु समिति की स्थापना
अतिप्राचीन श्री अवंती पार्श्वनाथ तीर्थ का शास्त्र शुद्ध जीर्णोद्धार पिछले 8 वर्षों से चल रहा है। यह जीर्णोद्धार पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरूष आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की पावन प्रेरणा व उनकी निश्रा में चल रहा है।
जीर्णोद्धार का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। प्रतिष्ठा के लक्ष्य से ही पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पूजनीया बहिन म. डॉ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. आदि ठाणा का चातुर्मास इस वर्ष उज्जैन नगर में हो रहा है।
पूजनीया बहिन म. डॉ श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. की पावन निश्रा में श्री अवंती पार्श्वनाथ जैन श्वे. तीर्थ मूर्तिपूजक मारवाडी समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में उज्जैन के समस्त ट्रस्टों के पदाधिकारियों की विशाल बैठक हुई। जिसमें बडी संख्या में ट्रस्टी गण पधारे।
इस अवसर पर पूजनीया बहिन म. ने फरमाया- अवंती तीर्थ सकल श्री संघ का है। यह प्रतिष्ठा सकल श्री संघ की है। प्रतिष्ठा से सभी को जुडना है।
इस अवसर पर सकल श्रीसंघ की सहमति से पूजनीया बहिन म. ने मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री श्री पारसजी जैन को अवंती पार्श्वनाथ तीर्थ प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के चेयरमेन एवं संघवी कुशल गुलेच्छा को संयोजक के रूप में घोषणा की।
इस घोषणा से सकल श्री संघ में हर्ष-हर्ष छा गया। निर्णय किया गया कि पर्युषण महापर्व के पश्चात् सकल श्रीसंघ के साथ बीकानेर पूज्य गच्छाधिपति आचार्यश्री की सेवा में जाकर मुहूर्त्त प्राप्त करेंगे।


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Bikaner बीकानेर में साध्वी श्री प्रियमुद्रांजनाश्रीजी म.सा. के मासक्षमण संपन्न

 बीकानेर नगर में पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरूष आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ठाणा 8 एवं पूजनीया साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजनाश्रीजी म. ठाणा 6 की पावन निश्रा में पूजनीया पार्श्वमणि तीर्थ प्रेरिका गणिनी प्रवरा श्री सुलोचनाश्रीजी म.सा. एवं पूजनीया वर्धमान तपाराधिका श्री सुलक्षणाश्रीजी म.सा. की शिष्या पूजनीया साध्वी श्री प्रियमुद्रांजनाश्रीजी म.सा. के मासक्षमण की तपस्या शातापूर्वक संपन्न हुई।
बीकानेर चातुर्मास प्रवेश के साथ ही उन्होंने तपस्या का प्रारंभ किया था। मासक्षमण तपस्या के उपलक्ष्य में ता. 29 जुलाई 2017 शनिवार से श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ श्री संघ, बीकानेर के तत्वावधान में पंचाह्निका महोत्सव का आयोजन किया गया। प्रथम दिन पार्श्वनाथ पंचकल्याणक पूजा श्री राजेन्द्रकुमारजी रिषभकुमारजी लूणिया परिवार की ओर से पढाई गई। दूसरे दिन पंच परमेष्ठी पूजा का लाभ श्री पन्नालालजी अजयकुमारजी अर्पित हर्षित खजांची परिवार ने लिया। तीसरे दिन श्री गौतमस्वामी पूजा का लाभ श्री चांदरतनजी अशोककुमारजी अरूण अनिल पारख परिवार ने लिया। चौथे दिन 1 अगस्त को भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा के पश्चात् तपस्वी अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। पू. तपस्वीजी के मासक्षमण के दिन तप पूरने के लक्ष्य से बहुत श्रावक श्राविकाओं ने उपवास तप किया।
वरघोडे व अभिनंदन समारोह में तपागच्छ के पूज्य पंन्यास प्रवर श्री पुंडरीकरत्नविजयजी म. आदि ठाणा, पार्श्वचन्द्र गच्छ के पूज्य मुनि श्री पुण्यरत्नचंद्रजी म., साधु साध्वी मंडल के साथ पधारे।
अभिनंदन समारोह का कुशल संचालन पूज्य मुनिराज श्री मनितप्रभसागरजी म. ने किया। इस अवसर पर पूज्य आचार्यश्री, पंन्यास प्रवर, पूज्य मुनिश्री पुण्यरत्नचंद्रजी म., पू. साध्वी श्री जिनेन्द्रप्रभाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजनाश्रीजी म. आदि के प्रवचन हुए। पूज्य प्रवरों ने तपस्वी महाराज की भूरि भूरि अनुमोदना की। समारोह एक बजे तक चला। हजारों श्रद्धालु पूरे समारोह में उपस्थित रहे। शोभायात्रा में इतनी भीड पहली बार देखी गई।
बाल मुनि श्री मलयप्रभसागरजी म. ने अपनी माताजी महाराज के मासक्षमण की अनुमोदना करते हुए उनके उपकारों का वर्णन किया। उन्होंने भी लघु वय होने पर भी तेला तप करके मासक्षमण की अनुमोदना की।
पू. गणिनी प्रवरा श्री सुलोचनाश्रीजी म. के संदेश का वांचन किया गया।
पू. साध्वी श्री प्रियश्रेष्ठांजनाश्रीजी म. प्रियसूत्रांजनाश्रीजी म. ने भजन द्वारा अनुमोदना की।
इस अवसर पर श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ बीकानेर के महामंत्री श्री शांतिलालजी सुराणा, गौहाटी के संदीप खजांची, चेन्नई के महिपालजी कानूंगा आदि ने अपने वक्तव्यों द्वारा तपस्या की अनुमोदना की।
श्री मगनजी कोचर, श्री सुनीलजी पारख, श्री नमन, जिनेश, प्रियल, सौ. आशाजी एवं आरतीजी एवं विचक्षण महिला मंडल आदि द्वारा गीतिकाऐं प्रस्तुत की गई।
पू. तपस्वीजी महाराज के गुरु पूजन का लाभ श्री मोतीचंदजी नरेन्द्रकुमारजी राजेशजी खजांची परिवार ने तथा रत्न प्रतिमा अर्पण करने का लाभ श्री मूलचंदजी महावीरचंदजी खजांची परिवार द्वारा लिया गया। पूज्य आचार्य प्रवर ने भी रत्नमयी प्रतिमा तपस्वीजी म. को प्रदान की।
स्वामिवात्सल्य का लाभ श्री पानमलजी धनराजजी सरलादेवी सुरेन्द्र महेन्द्र नाहटा परिवार ने लिया।
दोपहर में पूज्य मुनि श्री मेहुलप्रभसागरजी म. के मार्गदर्शन में श्री शांतिस्नात्र महापूजन आयोजित हुआ। जिसका लाभ तपस्वी महाराज के सांसारिक परिवार श्री बस्तीचंदजी महिपालजी नमन जिनेश कानूंगा परिवार फलोदी निवासी वर्तमान चेन्नई वालों ने लिया। रात्रि को संगीत सम्राट् श्री मगनजी कोचर एण्ड मंडली द्वारा भक्ति भावना का भव्य आयोजन किया गया।
ता. 2 अगस्त को तपस्वीजी महाराज का पारणा संपन्न हुआ। दादा गुरुदेव की पूजा पढाई गई जिसका लाभ श्री सुन्दरलालजी राजेन्द्रकुमारजी दस्साणी परिवार ने लिया। पूजा, वरघोडा आदि की व्यवस्थाओं में अ.भा. खरतरगच्छ युवा परिषद् बीकानेर की अनुमोदनीय सहभागिता रही।

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Apr 9, 2017

Navpad Oli परमात्मा ने जो कहा है, गणधर भगवन्तो ने रचना की है वही सच्चा और निःशंक ज्ञान है।

आज नवपदजी ओली का 7वां दिन
ज्ञान पद की आराधना का दिन
संसार में जो भी दुःख है, वो सब हमारे अज्ञान के कारण है ।
ज्ञान के अभाव में हम देव गुरु और धर्म की पहचान नही कर पा रहे है।
उसी कारण हमारा चार गति में भटकना जारी है ।
ज्ञान के अभाव में जो ग्रहण करना चाहिए उसे हम छोड़ देते है, तुच्छ चीजों को पकड़ के रखते है, सही और गलत का निर्णय भी हम अज्ञान के कारण नही कर पा रहे है ।
संसार छोड़ने के लिए है ।
संयम पालन के लिये है ।

Apr 8, 2017

Navpad oli श्री नवपद शाश्वत ओली आराधना... छठा दिवस : सम्यग् दर्शन गुण की आराधना..



श्री  नवपद  शाश्वत  ओली  आराधना...
छठा दिवस : सम्यग् दर्शन गुण की आराधना..
सम्यग् दर्शन पद की आराधना के लिए उसके बारे में जानना आवश्यक है।
महान् दर्शन पद की आराधना का दिन
पिछले 5 दिन तक हमने देव और गुरु तत्त्व की आराधना की, समझी ।
आज से धर्म तत्त्व की आराधना।
धर्म को प्राप्त करके ही धर्मी बना जा सकता है।
धर्म तत्त्व में पहला है सम्यग् दर्शन।
सम्यग् दर्शन के बिना सभी प्रकार का ज्ञान मिथ्या ज्ञान कहलाता है।
किसी भी प्रकार की क्रिया मिथ्या कहलाती है।
इसलिए सबसे जरुरी और मुख्य तत्त्व है सम्यग् दर्शन।

Apr 7, 2017

Navpad Oli 5th day साधू जीवन, जगत के लिए आश्चर्य रूप है।

sadhu pad, jain sadhu, jain muni,
साधू पद की आराधना का दिन आज नवपद ओलीजी का पांचवा दिन
साधको की साधना में सदा सहायता करने वाले, अप्रमत्त गुण के धारक, लोक में रहे हुए सभी साधू भगवंतों को हमारी भाव पूर्वक वन्दना ।
साधू पद का वर्णन
साधना करे वो साधू,
मौन रखे वो मुनि
स्वयं के मन पर नियंत्रण रखे वह साधू
कोई भी वचन व्यर्थ का उच्चरित न हो, ऐसा ध्यान रखने वाले।
कोई प्रवृत्ति विरुद्ध न हो जाये इसकी जागरूकता रखने वाले।
साधू जीवन, जगत के लिए आश्चर्य रूप है।
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Apr 6, 2017

Navpad Oli नवपद ओलीजी का आज चौथा उपाध्याय पद की आराधना का दिन

नवपद ओलीजी का आज चौथा दिन।
उपाध्याय पद की आराधना का दिन।
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तपस्वियों के शाता हो ऐसी दादा गुरुदेव से प्रार्थना।।
उपाध्याय यानि शिष्यों के पठन पाठन की जिम्मेदारी, विनय की प्रतिमूर्ति, निश्रावर्ति सभी साधुओ को संयम मार्ग में स्थिर करने का महान कार्य।।
आचार्य शासन को चलाता है तो उपाध्याय संघ को।।
जिस वाणी को तीर्थंकरो ने कहा है उस वाणी को उपाध्याय पदधारी हमे सुनाते है।।
योग्य आत्मा को वात्सल्य, समझ, स्नेह देकर उसे धर्म में रत करना - यह उनकी जिम्मेदारी है।

Apr 5, 2017

Navpad Oliji 3rd day Achary pad आज नवपद ओलीजी का तीसरा दिन

आज नवपद ओलीजी का तीसरा दिन।
आचार्य पद की आराधना का दिन।
9 पदों में किसी भी व्यक्ति विशेष को वंदना नही की गयी है।
जो जो आत्मा उन उन महान गुणों तक पहुँचे है उन सभी गुणीजनों को एक साथ वंदना की गयी है।
@ आचार्य पद को नमन 
शासन की स्थापना अरिहंत परमात्मा करते हे
सिद्ध परमात्मा को नमन कर के..
अरिहंत परमात्मा की अनुपस्थिति मेँ आचार्य भगवंत जिन शासन का प्रतिनिधित्व करते हे।।
साधु साध्वी श्रावक श्राविका आदि चतुर्विध संघ का निर्वहन करते हे।
सिद्ध प्रभु ने हमको निगोद से बाहर निकाला।
अरिहंत प्रभु ने हमको धर्म का उपदेश दिया।
वीर प्रभु के निर्वाण से आज तक 2500 साल हुए हैं। और परमात्मा का शासन 18500 वर्ष तक चलेगा । इतने लंबे समय तक शासन को आचार्य भगवंत चलाएंगे।