Jul 31, 2012

कत्लखाने भारत देश का कलंक है

कत्लखाने भारत देश का कलंक है
पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी महाराज ने ता. 21 जुलाई 2012 श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ मुंबई द्वारा आयोजित प्रेस कान्फरेन्स में कहा- यह अत्यन्त पीडा और दु: की बात है कि भारत जैसे धर्म प्राण एवं सांस्कृतिक देश में और अधिक  आधुनिक बूचडखाने खोलने का आदेश सरकार द्वारा दिया जा रहा है।
भारत देश ऋषि मुनियों का देश है। कोई भी धर्म हमें हिंसा नहीं सिखाता। क्या पशुओं को जीने का अधिकार नहीं है!
भारत देश जहाँ दूध घी की नदियाँ बहती थी। देश का पशुधन समाप्त हो रहा है। अन्य देश अपने देश के कत्लखाने बंद कर रहे हैं। और भारत देश केवल कुछ विदेशी मुद्रा में प्रलोभन में अपने यहाँ कत्लखानों को अनुमति दे रहा है। इससे भारत का पर्यावरण खतरनाक रूप से दूषित हो रहा है।
पशुओं को भी जीने का उतना ही अिध्ाकार है, जितना मनुष्यों को!
जिस देश में भगवान महावीर ने अहिंसा का पाठ पढाया! जिस देश में भगवान् बुद्ध ने करूणा की शिक्षा दी! जिस देश में भगवान् श्री कृष्ण ने गो रक्षा के लिये आदर्श उपस्थित किये, आज वही देश हिंसा में डूब कर राक्षसों का अनुयायी होता जा रहा है!
उन्होंने कहा- जैन साहित्य के अनुसार मेघरथ राजा और सनातन धर्म के साहित्य के अनुसार शिवि राजा ने एक कबूतर की रक्षा करने के लिये बाज पक्षी को अपनी जंघा का मांस देना स्वीकार कर लिया था। उन्हें अपने प्राणों की आहुति देना स्वीकार्य था, पर जीवहिंसा स्वीकार्य नहीं थी।
उन्होंने आंकडे बताते हुए कहा- आजादी के समय भारत में केवल 300 कत्लखाने थे, जबकि आज भारत में कत्लखानों की संख्या लाख से उपर हो चुकी है। महात्मा गांधी ने जिस अहिंसा के बल पर भारत को आजाद कराया था, आज उसी देश में हिंसा के पाठ पढाये जा रहे हैं। पशुओं का खून बहाया जा रहा है।
उन्होंने कहा- भारत का पूरा पर्यावरण नष्ट हो रहा है। प्रकृति रूठी हुई है। समय पर बरसात नहीं है। पानी की कमी है। इन सभी का एक ही कारण है और वह है- पशु वध!
उन्होंने कहा- पूरे मुंबई को जितना पानी सप्लाई होता है, उसका चालीस प्रतिशत पानी केवल देवनार के कत्लखाने में पूरा हो जाता है।
उन्होंने कहा- भूकंप क्यों आते हैं! कत्लखाने में दर्द के कारण जब पशुओं की चीत्कार उठती है... उस हाय के वायबरेशन के कारण धरती कांपती है... भूकंप आते हैं! पर्यावरण की सुरक्षा के लिये विदेशों से कत्लखाने समाप्त हो रहे हैं। और भारत देश विदेशी लोगों के लिये अपने देश को कत्लखानों से पाट रहा है और इस प्रकार अपने ही देश को हर दृष्टि से नष्ट करने पर तुला है।
उन्होंने कहा- हम इस मुद्दे पर सर्व धर्म सम्मेलन का आयोजन करेंगे। हमारा उद्देश्य है- आम जनता को जागरूक करना। ये कत्लखाने भारत की भूमि के लिये अभिशाप है।
पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए पूज्यश्री ने कहा- यह कार्य केवल जैन समाज का नहीं है, यह कार्य समस्त जीव दया प्रेमी समाज का है। भले वह किसी भी जाति या धर्म से संबंधित हो।
प्रेस कान्फरेन्स में पूज्य उपाध्यायश्री के शिष्य पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी . एवं जीवदया प्रेमी पूज्य मुनि श्री मैत्रीप्रभसागरजी . भी उपस्थित थे। यह ज्ञातव्य है कि पूज्य मैत्रीप्रभसागरजी . पिछले तीन वर्षों से जीवदया के लिये समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं। इन्होंने मेरठ में अनशन कर आमजनता को जागृत किया। परिणाम यह हुआ कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित आठ नये कत्लखानों के आदेश को रद्द करना पडा।
इसी प्रकार पालीताणा और सूरत में कत्लखानों और खुलेआम मांस बिक्री आदि के विरोध में अनशन कर सफलता प्राप्त की।
उन्होंने भी प्रेस को संबोधित कर जीवदया के लिये कार्य करने की अपील की।
पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी . ने पूज्य उपाध्यायश्री का परिचय दिया। इस प्रेस वार्ता में चातुर्मास संयोजक संघवी पुखराज छाजेड, श्री प्रशान्त भाई झवेरी, श्री प्रदीप श्रीश्रीश्रीमाल उपस्थित थे। उन्होंने पत्रकारों का स्वागत किया।
प्रेषक
प्रदीप श्रीश्रीश्रीमाल

मंत्रीजी ने आशीर्वाद लिया

मंत्रीजी ने आशीर्वाद लिया

मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री श्री पारस जैन, उज्जैन पूज्य गुरूदेव उपाध्याय  श्री मणिप्रभसागरजी .सा. के दर्शनार्थ मुंबई पधारे। श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ मुंबई द्वारा उनका हार्दिक अभिनंदन किया गया।

शिखरजी में चातुर्मास

शिखरजी में चातुर्मास
पूजनीया पार्श्वमणि तीर्थ प्रेरिका साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी .सा. वर्धमान तपाराधिका श्री सुलक्षणाश्रीजी .सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में श्री सम्मेतशिखरजी महातीर्थ पर चातुर्मास की आराधना त्याग तप जप कई कार्यक्रमों के साथ भव्यता के साथ चल रही है। देश के कोने कोने से पधारे 200 से अधिक आराधक वहाँ आराधना कर रहे हैं।

श्री मनोहरजी कानूगो सम्मानित

श्री मनोहरजी कानूगो सम्मानित
कई अग्रणी संस्थाओं से जुडे सांचोर निवासी श्री मनोहरजी कानूगो को भारत के राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल द्वारा सम्मानित करते हुए उन्हें समाज रत्न पद प्रदान किया।
यह सम्मान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में दिये गये उनके द्वारा सहयोग के लिये अर्पित किया गया। श्री कानूगो जीतो, श्री जिनदत्त कुशल खरतरगच्छ पेढी आदि कई संस्थाओं के सक्रिय ट्रस्टी रह कर अपनी सेवाऐं संघ शासन को अर्पित कर रहे हैं। श्री कानूगो श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ सांचोर के अध्यक्ष, श्री कुशल वाटिका बाडमेर के उपाध्यक्ष, श्री गज मंदिर केशरियाजी के उपाध्यक्ष पद का उत्तरदायित्व निभा रहे हैं।
सम्मानित करने पर देश की विभिन्न संस्थाओं अग्रणी श्रावकों ने उन्हें भावभीनी बधाई दी है। मूल सांचोर वर्तमान में मुंबई में व्यवसाय रत श्री कानूगो सौम्य और सहयोगी स्वभाव के धनी है। उन्होंने अपनी लक्ष्मी का उपयोग जन हित शासन हित में उदारता के साथ किया कर रहे हैं।

दुर्ग में ठाट लगा

दुर्ग में ठाट लगा
पूज्य ब्रह्मसर तीर्थोद्धारक मुनिश्री मनोज्ञसागरजी .सा. पू. मुनि श्री कल्पज्ञसागरजी . पू. मुनि श्री नयज्ञसागरजी . की पावन निश्रा में छत्तीसगढ प्रान्त के दुर्ग नगर में चातुर्मास की आराधना अत्यन्त आनन्द उल्लास के साथ चल रही है। प्रवचन में भारी भीड उपस्थित रहती है। प्रतिदिन दोपहर में स्वाध्याय की कक्षा में अध्यात्म-रसिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
सिद्धि तप आदि बडी तपश्चर्याऐं बडी संख्या में दुर्ग नगर के इतिहास में पहली बार हो रही है।

सिवाना- अहमदाबाद से चलेगी ललवानी एक्सप्रेस


मूल सिवाना निवासी श्रीमती बक्सु देवी विरधीचंदजी ललवानी परिवार के श्री माणकचंदजी शांतिलालजी दिलीपकुमारजी ललवानी परिवार की ओर से श्री सम्मेतशिखरजी आदि पूर्व भारत के तीर्थों की यात्रा हेतु स्पेश्यल ट्रेन हेतु संघ का आयोजन किया जा रहा है। जिसका शुभ मुहूर्त्त प्राप्त करने के लिये ललवानी परिवार अपने रिश्तेदारों, मित्रों के साथ गाजते बाजते पूज्यश्री की सेवा में ता. 22 जुलाई 2012 को पहुँचा।
पूज्यश्री ने 21 दिसम्बर 2012 का सिवाना से तथा 23 दिसम्बर 12 का अहमदाबाद से प्रयाण का शुभ मुहूर्त्त प्रदान किया। जिसे श्रवण कर ललवानी परिवार हर्ष से नृत्य करने लगा।
इस अवसर पर पूज्यश्री ने फरमाया- शास्त्रों में तो छहरी पालित संघ का विधान है। आपको यह शुभ मुहूर्त्त इस संकल्प के साथ प्रदान किया जा रहा है कि पाँच वर्षों के भीतर आपको छहरी पालित संघ का लाभ लेना है। आप तीर्थों की यात्रा करने जा रहे हैं। वह यात्रा निर्दोष हो, रात्रि भोजन का सर्वथा त्याग हो, सामायिक, प्रतिक्रमण, पूजा आदि आराधना का वातावरण निर्मित हो। इन बातों का विशेष ध्यान रखे।
इस अवसर पर ललवानी परिवार की बहुओं ने गीतिकाऐं प्रस्तुत की। अरूण ललवानी ने आभार प्रकट किया।

सिवाना में चातुर्मास का ठाट


सिवाना में चातुर्मास का ठाट
सिवाना उम्मेदपुरा में पूज्य धवलयशस्वी साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी .सा. की शिष्या पूजनीया साध्वी श्री हेमरत्नाश्रीजी . जयरत्नाश्रीजी . नूतनप्रियाश्रीजी . ठाणा 3 का चातुर्मास आराध्ाना आदि के साथ चल रहा है। प्रवचनों में श्रावक श्राविकाओं की अनुमोदनीय उपस्थिति रहती है।
पिछले दिनों श्री नेमिनाथ प्रभु के जन्म दीक्षा कल्याणक के अवसर पर नाटिका का आयोजन किया गया। जिसे खूब सराहा गया।

श्री गौडी पार्श्वनाथ मूर्तिपूजक संघ सांचोर के ट्रस्टियों का स्वागत



श्री गौडी पार्श्वनाथ मूर्तिपूजक संघ सांचोर के ट्रस्टियों का स्वागत
कांति मणि नगर, मुंबई!
पूज्य गुरूदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी .सा. की पावन निश्रा में श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ मुंबई द्वारा श्री जैन श्वेताम्बर गौडी पार्श्वनाथ मूर्तिपूजक संघ पेढी के ट्रस्टियों का भावभीना अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर प्रवचन फरमाते हुए पूज्य उपाध्यायश्री ने फरमाया- आप सभी पुण्यशाली है कि वीतराग परमात्मा के शासन की सेवा का आपको अनूठा अवसर उपलब्ध हुआ है। यह ध्यान में लें कि अध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष, ट्रस्टी बहुमानवाची पद नहीं है, अपितु जिम्मेदारी भरा पद है। ये पद नहीं बल्कि जिम्मेदारी हैं। ट्रस्टी को चाहिये कि वह अपने व्यक्तिगत स्वार्थों से उपर उठकर शासन और संघ के हित में कार्य करे। संघ सर्वोपरि है।
हमें संघ की सेवा करने के लिये अपने समस्त स्वार्थों का त्याग करना है। मेरा निवेदन है कि आप सकल संघ को साथ लेकर चले। सभी के प्रेम को संपादित करते हुए शासन संघ के प्रति अपना समर्पण भाव व्यक्त करें। निश्चित ही आपके नेतृत्व में शासन संघ का नाम और आगे विकास के पथ पर बढेगा।
इस अवसर पर श्री गौडी पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री सी.बी. जैन ट्रस्टियों का हार्दिक अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर श्री गौडी पार्श्वनाथ ट्रस्ट के नवनिर्वाचित महामंत्री एवं श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ, मुंबई के संस्थापक अध्यक्ष श्री प्रकाश कानूगो ने धन्यवाद दिया।

इचलकरंजी समाचार

इचलकरंजी समाचार
पूजनीया धवल यशस्वी गुरूवर्या श्री विमलप्रभाश्रीजी .सा. आदि ठाणा का चातुर्मास अत्यन्त हर्ष उल्लास, आराधना शासन प्रभावना के साथ गतिमान है। मणिधारी भवन में चल रहे इस चातुर्मास में सकल श्री संघ लाभ प्राप्त कर रहा है।
प्रवचन के अलावा सोमवार से शुक्रवार तक जीवविचार तत्वज्ञान की कक्षा चल रही है। शनिवार को महिलाओं का तथा रविवार को बच्चों का शिविर आयोजित किया जाता है। सिद्धि तप आदि तपश्चर्या चल रही है।
श्री नेमिनाथ परमात्मा के जन्म कल्याणक के अवसर पर नाटिका का भव्य आयोजन किया गया।

उदघाटन संपन्न

उदघाटन संपन्न
पूज्य गुरूदेव उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभसागरजी .सा. के चातुर्मास स्थल कपोलवाडी को कान्ति मणि नगर नाम दिया गया है जिसके उदघाटन का लाभ मूल गढ सिवाना वर्तमान में अहमदाबाद निवासी संघवी श्री अशोककुमारजी मानमलजी भंसाली परिवार द्वारा लिया गया। अतिथि गणों की साधर्मिक भक्ति हेतु गुरू गौतम नगर का नामकरण किया गया। जिसका लाभ गढ सिवाना- अहमदाबाद निवासी संघवी शा. वंसराजजी कुशलकुमारजी भंसाली द्वारा लिया गया। प्रवचन मंडप का नामकरण श्री जिनदत्त सुखसागर प्रवचन मंडप रखा गया, जिसके उदघाटन का लाभ गढ सिवाना- अहमदाबाद- मुंबई निवासी संघवी शा. चौथमलजी सुरेशकुमारजी जयन्तिलालजी भंसाली परिवार द्वारा लिया गया।
इन तीनों नगरों का भव्य उदघाटन ता. 8 जुलाई 2012 रविवार को अत्यन्त आनन्द उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

धूलिया में शासन प्रभावना


महाराष्ट्र प्रान्त के धूलिया शहर में पूजनीया गुरूवर्या खान्देश शिरोमणि श्री दिव्यप्रभाश्रीजी .सा. पू. मयणरेहाश्रीजी . पू. विरागज्योतिश्रीजी . पू. विश्वज्योतिश्रीजी . पू. जिनज्योतिश्रीजी . ठाणा 5 का चातुर्मास त्याग तप साधना आराधना के साथ चल रहा है।
पूज्या साध्वी श्री विश्वज्योतिश्रीजी .सा. के प्रभावशाली प्रवचनों को श्रवण करने के लिये भीड उमड पडती है। काँलेज आदि में आपके प्रवचनों ने संस्कारों का अनूठा वातावरण खडा किया है। तपश्चर्या के साथ साथ कई पारिवारिक, सामाजिक शिविर आदि का आयोजन चल रहा है।

बाडमेर की कुशल वाटिका का कार्य प्रगति पर

बाडमेर-अहमदाबाद मुख्य मार्ग पर चौहटन निवासी श्री आसुलालजी डोसी परिवार द्वारा समर्पित 150 बीघा विशाल भूखण्ड पर कुशल वाटिका कार्य प्रगति पर है।

पूजनीया बहिन . डाँ. विद्युत्प्रभाश्रीजी .सा. की पावन प्रेरणा से बन रही यह कुशल वाटिका शिक्षा जगत को समर्पित है।
पूजनीया बहिन . ने एक सपना देखा था कि समाज में जब तक संस्कार युक्त शिक्षा का वातावरण नहीं बनेगा, तब तक भावी पीढी में धर्म की स्थापना नहीं हो सकती।
इसी सपने को साकार करने के लिये ट्रस्ट मंडल अथक प्रयास कर रहा है। योजना के अन्तर्गत स्कूल की आलीशान बिल्डींग तैयार होकर शिक्षा प्रारंभ हो चुकी है। गत वर्ष से प्रारंभ इस स्कूल में अभी 400 छात्र अंग्रेजी माध्यम से संस्कारी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मात्र एक वर्ष में इस स्कूल ने शहर में अपनी विशिष्ट छाप अंकित की है।
कुशल वाटिका में जिन मंदिर, दादावाडी, धर्मशाला, उपाश्रय, प्रवचन हाँल, भोजनशाला, कार्यालय, प्याऊ, संघ भवन, आयंबिल भवन आदि का निर्माण हो चुका है। दूसरी स्कूल विशाल छात्रावास का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है। जिन मंदिर दादावाडी का कार्य पूर्णाहुति पर है। भविष्य में यहाँ 56 फीट ऊँचे समवशरण पर 52 फीट की दादा गुरूदेव श्री जिनकुशलसूरि की दर्शनीय प्रतिमा बिराजमान होगी। साथ ही यहाँ काँलेज, भक्ति आश्रम, विशाल चिकित्सालय, गोशाला आदि का निर्माण अगले चरण में होगा।
आगामी माघ सुदि 3, ता. 13 फरवरी 2013 को इसकी प्रतिष्ठा पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी .सा. की पावन निश्रा में संपन्न होगी।
ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री भँवरलालजी छाजेड मुंबई, प्रतिष्ठा समिति के संयोजक संघवी श्री तेजराजजी गुलेच्छा बैंगलोर तथा महामंत्री श्री दीपचंदजी बाफना इस प्रतिष्ठा को ऐतिहासिक बनाने के लिये पूरी तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने पिछले दिनों इस प्रतिष्ठा से सभी को जोडने के लिये मालेगाँव, इचलकरंजी, सूरत आदि शहरों का दौरा किया।
इस प्रतिष्ठा महोत्सव को विराट् रूप दिया जा रहा है। इस हेतु प्रतिष्ठा महोत्सव समिति की रचना की गई है। जिसमें संघवी श्री पुखराजजी भंसाली हाडेचा वालों को चेयरमेन, श्री बाबुलालजी डोसी जयपुर को अध्यक्ष, श्री मांगीलालजी मालू को उपसंयोजक, अमृतलालजी जैन को महामंत्री बनाया गया है। साथ ही संघवी श्री अशोकजी भंसाली, श्री मनोहरजी कानूगो, श्री मेवारामजी घीया, श्री गजेन्द्रजी भंसाली, श्री ओमप्रकाशजी मंडोवरा को सहसंयोजक का पद प्रदान किया गया है।
प्रतिष्ठा संबंधी तमाम व्यवस्थाओं का निर्धारण समायोजन का उत्तरदायित्व समायोजक संघवी श्री विजयराजजी डोसी बैंगलोर सम्हाल रहे हैं। जबकि स्वागताध्यक्ष का उत्तरदायित्व श्री मेवारामजी जैन {विधायक बाडमेर} निभायेंगे।
ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री भँवरलालजी छाजेड ने बताया कि कुशल वाटिका के प्रति सभी जगहों पर बहुत ही सुन्दर वातावरण बना हुआ है। अर्थ सहयोग के लिये भी श्रद्धालु लोग सामने से अपनी राशि अर्पण कर रहे हैं।
मुंबई नगर में पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी .सा. ने अपने प्रवचन में कुशल वाटिका की पूरी योजना विस्तार से समझाई। आम लोगों की प्रतिक्रिया रही कि कुशल वाटिका समाज की एक अनूठी और उपयोगी धरोहर है। यह योजना हमारे समाज के लिये सर्च लाइट का कार्य करेगी।