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Showing posts from October, 2013

JAY PALITANA ... JAI ADINATH ... JAY GURUDEV....

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UJJAIN AVANTI PARSWANATH JIRNODDHAR

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UJJAIN AVANTI PARSWANATH JIRNODDHAR
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DADA SHREE JINKUSHAL GURUDEV

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अपने घर की याद ही समझदारी है

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- उपाध्याय मणिप्रभसागर पालीताणा, 
जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ के उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरूदेव मरूध्ार मणि श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. ने आज श्री जिन हरि विहार ध्ार्मशाला में उपधान तप की आराधना के अंतर्गत प्रवचन फरमाते हुए कहा- अब हमें अपने घर की याद आने लगी है। मेरा कोई घर है, यह तो मैं लम्बे समय से जानता हूॅं। पर अभी तक पाया नहीं है। इसे पाने के लिये मैंने यात्रा तो बहुत की है। पर मिला अभी तक नहीं है।

लक्ष्य के अनुसार हो मन का निर्माण - उपाध्याय मणिप्रभसागर

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पालीताणा, 18 अक्टूबर! जैनश्वे. खरतरगच्छसंघकेउपाध्यायप्रवरपूज्यगुरूदेवमरूध्ारमणिश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. नेआजश्रीजिनहरिविहारध्ार्मशालामेंउपधानतपकीआराधनाकेअंतर्गतप्रवचनफरमातेहुएकहा- हमेंमनकेअनुसारजीवनकानिर्माणनहींकरनाहै।बल्किजीवनकेलक्ष्यके

उपकारी को कभी न भूलो

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उपाध्यायमणिप्रभसागर पालीताणाजैनश्वे. खरतरगच्छसंघकेउपाध्यायप्रवरपूज्यगुरूदेवमरूधरमणिश्रीमणिप्रभसागरजी.सा.कीपावननिश्रामेंआजश्रीजिनहरिविहारधर्मशालामेंश्रीनवपदजीकीओलीकेआखिरीदिनप्रवचनफरमातेहुएकहा- जीवनमेंहरव्यक्तिकेसाथदोघटनाऐंहोतीहै।

समभाव का बोध देता है- स्वाध्याय

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- उपाध्याय मणिप्रभसागर पालीताणा, 16 अक्टूबर!
जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ के उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरूदेव मरूधर मणि श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. की पावन निश्रा में आज श्री जिन हरि विहार धर्मशाला में श्री नवपदजी की ओली के सातवें दिन प्रवचन फरमाते हुए कहा- परमात्मा महावीर ने मोक्ष मार्ग का निरूपण करते हुए ज्ञान और कि्रया को हेतु बताया है। ज्ञान और कि्रया इन दोनों के संगम से ही मोक्ष होता है। परन्तु इसमें सर्वप्रथम ज्ञान को कहा है। ज्ञान के बिना न तो सम्यक् दर्शन पाया जा सकता है, न आचरण की विशुद्धि होती है।

Jain Religion is very oldest Religion

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Jain Religion is very oldest Religion

रोशनी देने वाला उपाध्याय - श्री मणिप्रभसागरजी म.

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ता. 13.10.13 - जैनश्वे. खरतरगच्छसंघकेउपाध्यायप्रवरपूज्यगुरूदेवमरूधरमणिश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा.कीपावननिश्रामेंआजश्रीजिनहरिविहारधर्मशालामेंश्रीनवपदजीकीओलीकेचौथेदिनप्रवचनफरमातेहुएकहा- आजचौथेदिनहमेंस्वाध्यायदिवसमनानाहै, क्योंकिचौथेदिनउपाध्यायपदकीआराधनाकीजातीहै।उपाध्यायज्ञानकीरोशनीदेताहै।ज्ञानकेबिनायथार्थसत्यकाबोधनहींहोता।इसलियेज्ञानकोसर्वाधिकमहत्वदियागयाहै।

ANSWER by GURUDEV MANIPRABHSAGARJI MS on ACHARYA PAD

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ANSWER by GURUDEV MANIPRABHSAGARJI MS on ACHARYA PAD

अपने कानों पर पहरेदारी बहुत जरूरी -मणिप्रभसागर

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जैनश्वे- खरतरगच्छसंघकेउपाध्यायप्रवरपूज्यगुरूदेवमरूधरमणिश्रीमणिप्रभसागरजीम- सा-  नेआजश्रीजिनहरिविहारधर्मशालामेंआयोजितधर्मसभाकोसंबोधितकरतेहुएकहा- अपनीसोचकेप्रतिजागरूकरहनाएकअच्छेऔरसाफसुथरेतथाप्रेमसेभरेजीवनकेलियेबहुतजरूरीहोताहै।

PUJYA UPADHYAY GURUDEV JI KO ACHARYA PAD GRAHAN KI VANANTI KARTE HUYE TEJRAJ JI GULECHA

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PUJYA UPADHYAY GURUDEV JI KO ACHARYA PAD GRAHAN KI VANANTI KARTE HUYE TEJRAJ JI GULECHA

प्रसन्नता ही भविष्य

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जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ के उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरूदेव मरूध्ार मणि श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. ने श्री जिन हरि विहार ध्ार्मशाला में आज प्रवचन फरमाते हुए कहा- कष्ट और दु:ख की परिभाषा समझने जैसी है। उपर उपर से दोनों का अर्थ एक-सा लगता है, पर गहराई से सोचने@समझने पर इसका रहस्य कुछ और ही पता लगता है।
कष्टों में जीना अलग बात है और दु:ख में जीना अलग बात है। कष्ट जब हमारे मन को दु:खी करते हैं तो जीवन अशान्त हो जाता है। और कष्टों में भी जो व्यक्ति मुस्कुराता है, वे जीवन जीत जाते हैं।

भविष्य की सोच महत्वपूर्ण

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भविष्य की सोच महत्वपूर्ण
जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ के उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरूदेव मरूध्ार मणि श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. ने श्री जिन हरि विहार ध्ार्मशाला में आज प्रवचन फरमाते हुए कहा- जीवन पुण्य और पाप का परिणाम है। पूर्व पर्याय {पूर्व जन्म} का पुरूषार्थ हमारे वर्तमान का अच्छापन या बुरापन तय करता है।


बिना जानकारी के जीवन का निर्माण नहीं होता!

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जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ के उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरूदेव मरूध्ार मणि श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. ने श्री जिन हरि विहार ध्ार्मशाला में आज प्रवचन फरमाते हुए कहा- हम क्या जानते हैं? यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है! जितना महत्वपूर्ण यह है कि हम क्या समझते हैं? क्योंकि जानना बुद्धि का परिणाम है... समझना आचार का परिणाम!

A REAL VIDEO OF AJMER DADAWADI, FIRST DADA GURUDEV SHREE JINDUTTSURIJI MS KI SAMADHI BHOOMI AJMER (RAJ.) INDIA

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A REAL VIDEO OF AJMER DADAWADI,  FIRST DADA GURUDEV SHREE  JINDUTTSURIJI MS KI SAMADHI BHOOMI AJMER (RAJ.) INDIA

अपने कानों पर पहरेदारी बहुत जरूरी -मणिप्रभसागर

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अपनेकानोंपरपहरेदारीबहुतजरूरी -मणिप्रभसागर
जैनश्वे-  खरतरगच्छसंघकेउपाध्यायप्रवरपूज्यगुरूदेवमरूधरमणिश्रीमणिप्रभसागरजीम- सा-  नेआजश्रीजिनहरिविहारधर्मशालामें