Posts

Showing posts from 2014

Nice STORY ऐसा व्यक्ति जो काम किए जाने के दौरान दूसरों की तकलीफ भी महसूस करे. ऐसा शख्स जिसने सिर्फ पैसे को ही जीवन का ध्येय न बना रखा हो... बधाई हो, तुम इस जॉब के पूरे हक़दार हो...

पढ़ाई पूरी करने के बाद टॉपर छात्र बड़ी कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा....
छात्र ने पहला इंटरव्यू पास कर लिया...
फाइनल इंटरव्यू डायरेक्टर को लेना था...
डायरेक्टर को ही तय करना था नौकरी पर रखा जाए या नहीं...
डायरेक्टर ने छात्र के सीवी से देख लिया कि पढ़ाई के साथ छात्र एक्स्ट्रा-करिकलर्स में भी हमेशा अव्वल रहा... डायरेक्टर- क्या तुम्हे पढ़ाई के दौरान कभी स्कॉलरशिप मिली ?
छात्र- जी नहीं...
डायरेक्टर- इसका मतलब स्कूल की फीस तुम्हारे पिता अदा करते थे !
छात्र- हाँ श्रीमान !
डायरेक्टर- तुम्हारे पिता काम क्या करते है ?
छात्र- जी वो लोगों के कपड़े धोते है।
ये सुनकर डायरेक्टर ने कहा... ज़रा अपने हाथ
दिखाना...
छात्र के हाथ रेशम की तरह मुलायम और नाज़ुक थे...
डायरेक्टर- क्या तुमने कभी पिता के कपड़े धोने में मदद की है...
छात्र- जी नहीं, मेरे पिता हमेशा यही चाहते रहे है कि मैं स्टडी करूं और ज़्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ूं। हां एक बात और, मेरे पिता मुझसे कहीं ज़्यादा स्पीड से कपड़े धोते है...
डायरेक्टर- क्या मैं तुमसे एक काम कह सकता हूं...
छात्र- जी, आदेश कीजिए !
डायरेक्टर- आज घर वापस जाने के ब…

Photos बेल्लारी (कर्नाटका) में ता. 15 दिसंबर को मुमुक्षु सुश्री शिल्पा बालड़ की भागवती दीक्षा पांच दिन के महोत्सव के साथ संपन्न हुयी।दीक्षा प्रदाता - पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.।नूतन नाम - साध्वी श्री प्रियशैलांजना श्रीजी म.

Image
बेल्लारी (कर्नाटका) में ता. 15 दिसंबर को मुमुक्षु सुश्री शिल्पा बालड़ की भागवती दीक्षा पांच दिन के महोत्सव के साथ संपन्न हुयी।
दीक्षा प्रदाता - पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.।
सानिध्य पूज्या साध्वी श्री पियस्मिताश्रीजी म.साध्वी श्री प्रियलता श्रीजी म.साध्वी श्री प्रियवंदना श्रीजी म.साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजना श्रीजी म. आदि।
नूतन नाम - साध्वी श्री प्रियशैलांजना श्रीजी म.
महोत्सव आयोजक शा मीठालालजी बालड़ परिवार
गढ़सिवाना निवासी।बेल्लारी।

बेल्लारी कर्नाटका में मुमुक्षु सुश्री शिल्पा बॉलर की भागवती दीक्षा निमित्त आयोजन के चित्र

Image

चलो मालपुरा।दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरीजी के चरणों में 31 दिसंबर की रात भव्य संध्या सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधाजी पोडवाल के निर्देशन में

Image
चलो मालपुरा।
दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरीजी के चरणों में 31 दिसंबर की रात भव्य संध्या सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधाजीपोडवाल के निर्देशन में

पालथी मारकर बैठने का यह फायदा जान लीजिए।।। विज्ञान ने भी माना पालथी मारकर बैठने के हैं चमत्कारिक लाभ।।।

कुर्सी पर पालथी मारकर बैठना या पंजों के बल जमीन पर बैठना आधुनिक दृष्टि से भले ही हीनता का प्रतीक माना जाए पर अध्यात्मविदों के अनुसार व्यक्ति की माली हालत कैसी भी हो, उसे पालथी मार कर ही बैठना चाहिए।यह सुविधा या स्थिति हर वक्त नहीं मिलती, पर पालथी मारकर बैठने से व्यक्ति का स्वास्थ्य, दिमाग और आत्मविश्वास मजबूत होता है।महर्षि वेद विद्या प्रतिष्ठान के स्वामी चिदविलासानंद के मुताबिक पालथी मारकर बैठने से व्यक्ति का स्वरूप मंदिर की तरह बन जाता है और आकाश से उतरने वाली सूक्ष्म ऊर्जा सहस्त्रार चक्र के सहारे पूरे शरीर में घूम जाती है।जबकि पैर अगर धरती पर हों तो शरीर की स्थिति तड़ितचालक जैसी हो जाती है और विद्युत ऊर्जा शरीर की यात्रा करती हुई जमीन में उतर जाती है। इस बात को वैज्ञानिक तौर पर भी करीब करीब सही पाया गया है।पालथी मारकर भोजन करने का लाभकैलीफोर्निया के बर्कले इंस्टिट्यूट में हुए शोध प्रयोगों के अनुसार पालथी मारकर बैठे व्यक्ति पर आकाश से गिरी बिजली का उतना असर नहीं होता, जितना जमीन पर पैरों के तले लगाकर बैठे या खड़े व्यक्ति पर होता है।यह बात अभी और भी अध्ययन अनुसंधान का विषय बनी हुई है…

दि. 6-12-14 को हुबली नगर दादावाड़ी नूतन दीक्षित साध्वी के नाम और फ़ोटो

Image
आज हुबली नगर दादावाड़ी नूतन दीक्षित साध्वी के नाम
  प्रेमा जीरावला 1 
प पू साध्वी विरलप्रभाश्रीजी मसुमित्रा  जीरावला 2
प पू साध्वी विपुलप्रभाश्रीजी म  ममता बागरेचा 3
प पू साध्वी विरतिप्रभाश्रीजी मशिल्पा ओस्तवाल4
प पू साध्वी विबुद्धप्रभाश्रीजी म प्रिंसी कवाड 5
प पूसाध्वी विशुध्दप्रभाश्री जी  मदर्शना गुलेच्छा6
प पू साध्वी विश्रुतप्रभाश्रीजी

तमिलनाडु के प्रसिद्ध श्री ईरोड नगर में वलयकारा स्ट्रीट में श्री मुनिसुव्रतस्वामी जिन मंदिर एवं श्री जिनकुशलसूरि दादावाडी का निर्माण होने जा रहा है। इस जिनमंदिर दादावाडी की अंजनशलाका ता. 21 जनवरी 2015 को माघ शुक्ल प्रतिपदा बुधवार को पूज्यश्री की पावन निश्रा में संपन्न होगी। परमात्मा श्री मुनिसुव्रतस्वामी और दादा गुरुदेव आदि की दिव्य मूतियों की भव्य शोभायात्रा के साथ पूज्यश्री का नगर प्रवेश 19 जनवरी को होगा। ता. 20 को अंजनशलाका व ता. 21 को प्रतिष्ठा का विधान संपन्न होगा

Image
ईरोड में जिनमंदिर एवं दादावाडी का निर्माणसादर आमंत्रण
इस मंदिर एवं दादावाडी का संपूर्ण निर्माण पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. की पावन प्रेरणा से शासन रत्न श्री मनोजकुमारज हरण के मार्गदर्शन में मूल लोहावट निवासी जेठिया ग्रुप के श्री जवाहरलालजी प्रदीपकुमारजीशरदकुमारजी पारख परिवार लोहावट-राजीम-ईरोड वालों की ओर से करवाया जा रहा है। पूज्य गुरुदेवश्री के दक्षिण प्रदेश के प्रवास को ख्याल में रखते हुए जिन मंदिर दादावाडी का निर्माण शीघ्र गति से करवाया जा रहा है। इस जिनमंदिर दादावाडी की अंजनशलाका ता. 21 जनवरी 2015 को माघ शुक्ल प्रतिपदा बुधवार को पूज्यश्री की पावन निश्रा में संपन्न होगी। परमात्मा श्री मुनिसुव्रतस्वामी और दादा गुरुदेव आदि की दिव्य मूतियों की भव्य शोभायात्रा के साथ पूज्यश्री का नगर प्रवेश 19 जनवरी को होगा। ता. 20 को अंजनशलाका व ता. 21 को प्रतिष्ठा का विधान संपन्न होगा

चैन्नई में दो दीक्षा 25 अप्रेल को पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. की निश्रा एवं पूजनीया पाश्र्वमणि तीर्थ प्रेरिका श्री सुलोचनाश्रीजी म. आदि ठाणा की सानिध्य में मुमुक्षु श्रीमती जयादेवी सेठिया एवं उनके पुत्र मुमुक्षु श्री संयमकुमार सेठिया (उम्र-11) वर्ष का भागवती दीक्षा महोत्सव दि. 25 अप्रेल 2015 को चैन्नई के कोण्डीतोप में होगा। दीक्षार्थी अमर रहो... जहाज मंदिर परिवार की ओर से हार्दिक अभिनंदन

पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. की निश्रा एवं पूजनीया पाश्र्वमणि तीर्थ प्रेरिका श्री सुलोचनाश्रीजी म. आदि ठाणा की सानिध्य में मुमुक्षु श्रीमती जयादेवी सेठिया एवं उनके पुत्र मुमुक्षु श्री संयमकुमार सेठिया (उम्र-11) वर्ष का भागवती दीक्षा महोत्सव दि. 25 अप्रेल 2015 को चैन्नई के कोण्डीतोप में होगा।दीक्षार्थी अमर रहो...जहाज मंदिर परिवार की ओर से हार्दिक अभिनंदन

इचलकरंजी में दीक्षार्थी बहिनों का अभिनंदन

Image
पूज्य गूरूदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. आदि ठाणा की शुभ निश्रा में दि. 26-10-2014 को इचलकरंजी में वैराग्यवती सुश्री प्रेमा मांगीलाल जीरावला बेंगलोर,
वैराग्यवती सुश्री शिल्पा मीठालाल बालर बल्लारी,
सुश्री वैराग्यवती सुश्री सुमित्रा मांगीलाल जीरावला-बैंगलोर,
वैराग्यवती सुश्री ममता तेजराज बागरेचा-गंगावती,
वैराग्यवती सुश्री शिल्पा जसराज ओस्तवाल-गदग,
वैराग्यवती सुश्री प्रिन्सी बाबुलाल कवाड-हुबली
एवं वैराग्यवती सुश्री दर्शना वीरचंद गोलेच्छा
 का स्वागत सकल जैन समाज की ओर से आयोजन किया गया है।
अभिनंदन के पश्चात वरघोडा निकाला गया। इस अवसर पर सकल जैन समाज ने दीक्षार्थी बहिनों की उज्जवल भविष्य की कामना की।




इचलकरंजी से श्री कुंभोजगिरि तीर्थ के छह री पालित पद यात्रा संघ का आयोजन

Image
श्री मणिधारी जिनचन्द्रसूरि जैन श्वेताम्बर संघ के तत्वावधान में पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. की पावन निश्रा में इचलकरंजी से श्री कुंभोजगिरि तीर्थ के छह री पालित पद यात्रा संघ का आयोजन किया गया है।
इस चार दिवसीय संघ का आयोजन गढ़ सिवाना निवासी श्रीमती पिस्तादेवी छगनलालजी छाजेड परिवार द्वारा किया गया है।
कार्यक्रम के अनुसार छहरी पालित संघ से पहले त्रिदिवसीय जीवित महोत्सव का आयोजन किया गया है। जिसका प्रारंभ 6 नवम्बर 2014 कार्तिक पूर्णिमा से होगा। ता. 7 को श्री सिद्धचक्र महापूजन का आयोजन होगा। रात्रि में मातृ पितृ वंदना का भाव प्रवण समारोह होगा। ता. 8 को जीवित महोत्सव क्षमायाचना समारोह होगा।

मंगल संदेश

Image
Mantra Jaap

Song Gautam swami Stuti

Image

वंदना गुरूदेव

Image

Jahaj Mandir Magazine October 2014 in pdf format

UPADHAN TAP Q ????

Image

कोयम्बतूर में अंजनशलाका प्रतिष्ठा 2 फरवरी को

Image
पूज्यगुरुदेवउपाध्यायश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. आदिसाधुसाध्वीमंडलकीपावननिश्रामेंकोयम्बतूरनगरमेंनवनिर्मितश्रीस्तंभनपाश्र्वनाथजिनमंदिरएवंश्रीजिनदत्तसूरिदादावाडीकीअंजनशलाकाप्रतिष्ठामाघसुदि 14 ता. 2 फरवरी 2015 कोसंपन्नहोगी।इसमंदिरदादावाडीमेंपरमात्मास्तंभनपाश्र्वनाथपरमात्माकी 51 इंचकीप्रतिमाकेअलावादादागुरुदेवश्रीजिनदत्तसूरिकी 41 इंचीतथानाकोडाभैरव, पद्मावती, अंबिकादेवीएवंसरस्वतीदेवीकी 31 इंचीप्रतिमाऐंबिराजमानहोगी।

CHOHTAN ME UPDHAAN TAP KA AAYOJAN

Image
CONTACT NUMBER 070739 00641
094614 89609

कन्याकुमारी में वर्धमान स्वामी मंदिर दादावाड़ी की अंजनशलाका प्रतिष्ठा 27 फरवरी को...... समारोह का प्रारंभ 24 फरवरी से होगा। ता. 26 फरवरी को शोभायात्रा का आयोजन होगा। प्रतिष्ठा के इस पावन अवसर पर पूरे भारत से भक्तजन पधारेंगे। सादर आमंत्रण

देशकेदक्षिणीकिनारेकासुप्रसिद्धपर्यटनस्थलकन्याकुमारीमेंलम्बेसमयसेजिनमंदिरबनानेकीचर्चाचलरहीथी।यहाँभ्रमणआदिकेउद्देश्यसेप्रतिवर्ष 6 लाखसेअधिकजैनबंधुओंकाआगमनहोताहै।परन्तुजैनमंदिरनहींहोनेकेकारणवेपरमात्मदर्शनसेवंचितरहतेथे।इसकारणयहाँजिनमंदिरकानिर्माणअत्यन्तजरूरीथा।इसकार्यकोहाथमेंलियाचेन्नईनिवासीश्रीमोहनचंदजीढड्ढाने! वहाँभूखण्डप्राप्तकरनेकेप्रयत्नकरनाप्रारंभकिया। तभीपताचलाकिवहाँएकभूखण्डमदुराईनिवासीश्रीबगदावरमलजीकेपासउपलब्धहै।उनसेसंपर्ककियागया।उन्होंनेभीमदुराईसंघकेसाथमिलकरजिनमंदिरआदिनिर्माणकेलक्ष्यसेहीयहभूखण्डकुछवर्षोंपहलेखरीदाथा।
उन्होंनेयहविशालभूखण्डश्रीजैनतीर्थसंस्थानरामदेवराट्रस्टकोसुपुर्दकरदिया।संस्थानकेअध्यक्षश्रीमोहनचंदजीढड्ढानेकडीमेहनतकरकेवहाँजिनमंदिरनिर्माणकरने

चेन्नई नगर की धन्य धरा पर श्री धर्मनाथ जिन मंदिर की अंजनशलाका प्रतिष्ठा पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. आदि साधु साध्वी मंडल की पावन निश्रा में ता. 26 अप्रेल 2015 को अत्यन्त उल्लास के साथ संपन्न होगी।

चेन्नईमेंअंजनशलाकाप्रतिष्ठा 26 अप्रेलको चेन्नईमेंश्रीधर्मनाथपरमात्मासेसुशोभितकायहमंदिरसबसेज्यादापूजेजानेवालेमंदिरोंमेंगिनाजाताहै।इसकानिर्माणपूजनीयाप्रवर्तिनीश्रीविचक्षणश्रीजीम. द्वारास्थापितश्रीजिनदत्तसूरिमंडलद्वाराकरवायागयाथा।अभीउसमंदिरकापूराजीर्णोद्धारकरवायाजारहाहै।मूलनायकपरमात्माकाउत्थापननहींकरवायागयाहै।नीचेअभिनवगर्भगृहकानिर्माणकियागयाहैजिसमेंपरमात्माधर्मनाथप्रभु, दादागुरुदेवआदिकीप्रतिमाऐंबिराजमानकीजायेगी।
प्रतिष्ठाकीविनंतीवमुहूर्त्तप्राप्तकरनेकेलियेश्रीजिनदत्तसूरिमंडलइचलकरंजीमेंबिराजमानपूज्यश्रीकीसेवामेंपहुँचा।औरअंजनशलाकाप्रतिष्ठाचातुर्मासआदिकीभावभरीविनंतीकी।अंजनशलाकाप्रतिष्ठाकीविनंतीस्वीकारकरतेहुएवैशाखसुदि 8 ता. 26 अप्रेल 2015 काशुभमुहूर्त्तप्रदानकिया।सकलसंघमेंआनंदछागया।

इचलकरंजी में पंचाह्निका महोत्सव .,,,.,,....,.चौथे दादा गुरुदेव को याद किया.,.,.,.,.,.,.इचलकरंजी में 45 आगम वांचना

पूज्यगुरुदेवआचार्यभगवंतश्रीजिनकान्तिसागरसूरीश्वरजीम.सा. केशिष्यपूज्यगुरुदेवउपाध्यायश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. पूज्यमुनिश्रीमयंकप्रभसागरजीम.सा. पूज्यमुनिश्रीमनितप्रभसागरजीम.सा. पूज्यमुनिश्रीमेहुलप्रभसागरजीम.सा. पूज्यमुनिश्रीसमयप्रभसागरजीम.सा. पूज्यमुनिश्रीविरक्तप्रभसागरजीम.सा. पूज्यमुनिश्रीश्रेयांसप्रभसागरजीम.सा. एवंपूजनीयागुरुवर्याबहिनम. डाँ. श्रीविद्युत्प्रभाश्रीजीम.सा. कीशिष्यापूजनीयासाध्वीडाँ. श्रीनीलांजनाश्रीजीम. पू. साध्वीश्रीविभांजनाश्रीजीम. पू. साध्वीश्रीनिष्ठांजनाश्रीजीम. पू. साध्वीश्रीआज्ञांजनाश्रीजीम0.ण्कीपरमपावननिश्रामेंचातुर्मासमेंहुईमासक्षमण, सिद्धितप, वीशस्थानकतपआदिविविधतपाराधनाकेउपलक्ष्यमेंपंचािÉकामहोत्सवकाआयोजनकियागया।

कहानी... सारे तथ्यों और सबूतों कि जांच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है!

एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए उजड़े, वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये! हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ?? यहाँ न... तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं! यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा! भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज कि रात बिता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे! रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे उस पर एक उल्लू बैठा था।

जीवन में कई बार हम गिरते हैं, हारते हैं, हमारे लिए हुए निर्णय हमें मिटटी में मिला देते हैं. हमें ऐसा लगने लगता है कि हमारी कोई कीमत नहीं है. लेकिन आपके साथ चाहे जो हुआ हो या भविष्य में जो हो जाए , आपका मूल्य कम नहीं होता. आप स्पेशल हैं, इस बात को कभी मत भूलिए.

सबसे कीमती चीज एक जाने-माने स्पीकर ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सेमीनार शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए. फिर उसने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें से किसी एक को दूंगा पर  उससे पहले मुझे ये कर लेने दीजिये .” और उसने नोट को अपनी मुट्ठी में चिमोड़ना शुरू कर दिया. और  फिर उसने पूछा,” कौन है जो अब भी यह नोट लेना चाहता है?” अभी भी लोगों के हाथ उठने शुरू हो गए.

अवसर की पहचान... आपने कई बार दूसरो को ये कहते हुए सुना होगा या खुद भी कहा होगा कि ‘हमे अवसर ही नही मिला’ लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है ।

Don’t miss an opportunity.एक बार एक ग्राहक चित्रो की दुकान पर गया । उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे । पहले चित्र मे चेहरा पूरी तरह बालो से ढँका हुआ था और पैरोँ मे पंख थे ।एक दूसरे चित्र मे सिर पीछे से गंजा था।ग्राहक ने पूछा – यह चित्र किसका है?दुकानदार ने कहा – अवसर का ।ग्राहक ने पूछा – इसका चेहरा बालो से ढका क्यो है?दुकानदार ने कहा -क्योंकि अक्सर जब अवसर आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नही है ।ग्राहक ने पूछा – और इसके पैरो मे पंख क्यो है?दुकानदार ने कहा – वह इसलिये कि यह तुरंत वापस भाग जाता है, यदि इसका उपयोग न हो तो यह तुरंत उड़ जाता है ।ग्राहक ने पूछा – और यह दूसरे चित्र मे पीछे से गंजा सिर किसका है?दुकानदार ने कहा – यह भी अवसर का है । यदि अवसर को सामने से ही बालो से पकड़ लेँगे तो वह आपका है ।अगर आपने उसे थोड़ी देरी से पकड़ने की कोशिश की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा और वो फिसलकर निकल जायेगा । वह ग्राहक इन चित्रो का रहस्य जानकर हैरान था पर अब वह बात समझ चुका था ।आपने कई बार दूसरो को ये कहते हुए सुना होगा या खुद भी कहा होगा कि ‘हमे अवसर ही नही मिला’ लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और…

दादा जिनचन्द्रसूरि जिनशासन के उज्ज्वल नक्षत्र हैं -उपाध्याय मणिप्रभसागर

Image
इचलकरंजी ता. 10 सितम्बर 2014श्री मणिधारी जिनचन्द्रसूरि जैन श्वेताम्बर संघ के तत्वावधान में पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागर ने श्री सुखसागर प्रवचन मंडप में चतुर्थ दादा गुरुदेव श्री जिनचन्द्रसूरि की 401वीं पुण्य तिथि के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा- जिन शासन के इतिहास में केवल चार दादा गुरुदेव हुए हैं। जिन्होंने अपने संयम, त्याग, तप और आराधना साधना के बल पर जिन शासन की महती प्रभावना की। उनमें प्रथम दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि इतिहास के उज्ज्वल नक्षत्र हैं, जिन्होंने हजारों गोत्रों की स्थापना करके जिन शासन को पूर्ण रूप से समृद्ध बनाया। उनके महाचमत्कारी चरण अहमदाबाद में दादा साहेब ना पगला में बिराजमान है। उनके चरणों से ही वह पूरा क्षेत्र दादा साहेब ना पगला के नाम से सुप्रसिद्ध हैं। जहाँ हर सोमवार को हजारों श्रद्धालु दर्शन करके अपने जीवन को धन्य बनाते हैं। उनकी पावन परम्परा में चौथे दादा गुरुदेव हुए। उनका समय सोलहवीं व सतरहवीं शताब्दी का संधिकाल था। मात्र नौ वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण करके मात्र सतरह वर्ष की उम्र में आचार्य बन कर संपूर्ण खरतरगच्छ के अधिपति बने।उनके ज…

क्रियोद्धारक श्री जिनचन्द्रसूरि गुरुदेव का मिताक्षरी परिचय... प्रस्तुति- आर्य मेहुलप्रभसागरजी म.

Image
जन्म नाम- सुलतान कुमार
गौत्रा- रीहड़ गौत्र
माता- सौ. श्रिया देवी
पिता- श्रेष्ठि श्रीवन्तजी शाह ओसवाल
जन्म स्थान- खेतसर जोधपुर के पास, राज.
जन्म तिथि- वि.सं. 1595, चैत्रा वदि 12
दीक्षा- वि.सं. 1604, भोपालगढ़-बडलु, राज., दादावाडी स्थल पर
दीक्षित नाम- सुमतिधीर मुनि
गुरू नाम- खरतरगच्छ नायक श्री जिनमाणिक्यसूरिजी म.
आचार्य पद- वि.सं. 1612, भादवा सुदि 9
बीकानेर चातुर्मास- रांगडी चौक स्थित बडे उपाश्रय में
सूरिमन्त्र प्रदाता- आचार्य श्री जिनगुणप्रभसूरिजी म.
क्रियाद्धार- वि.सं. 1614, चैत्र वदि 7, बीकानेर
छम्मासी तपाराधना- वि.सं. 1615, महेवा नगर में
पौषधविधि प्रकरण टीका रचना- पाटण में वि.सं. 1616
पाटण में जयपताका- वि.स. 1617 कार्तिक सुदि 7 को अनेक आचार्य की उपस्थिति में
खंभात प्रतिष्ठा- वि.स. 1618
बीकानेर प्रतिष्ठा- वि.सं. 1622, वैशाख सुदि 3
पट्टधर शिष्य दीक्षा- वि.सं. 1623, मिगसर वदि 5
पट्टधर शिष्य- मानसिंह, दीक्षित नाम- मुनि महिमराज, आचार्य नाम- श्री जिनसिंह सूरि

पूज्य आचार्य प्रवर चतुर्थ दादा गुरूदेव महान कि्रयोद्धारक श्री जिनचन्द्रसूरीश्वरजी म. को पावन पुण्यतिथि पर वंदनावली... आपकी कृपा हम पर बरसती रहे...

Image

पूज्य आचार्य प्रवर चतुर्थ दादा गुरूदेव महान कि्रयोद्धारक श्री जिनचन्द्रसूरीश्वरजी म. को पावन पुण्यतिथि पर वंदनावली... आपकी कृपा हम पर बरसती रहे...

Image

स्वयं विचार कीजिये :- क्या है सबसे बेहतर !!!

इतना कुछ होते हुए भी
शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी...
मौन होना सब से बेहतर है। दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी...
सफेद रंग सब से बेहतर है। खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी...
उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है। पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी..
पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है। देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी...
बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है। सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी...
अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है। जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी...
सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतरहै।इंसान के अंदर जो समा जायें वो
             " स्वाभिमान "
                    और
जो इंसान के बहार छलक जायें वो
             " अभिमान "

मुंबई में महाचमत्कारी दादा गुरुदेव महापूजन का आयोजन

Image
धर्म नगरी मुंबई में श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ मुंबई के तत्वावधान में श्री मणिधारी युवा परिषद्, मुंबई द्वारा पू. साध्वी सुलोचना श्री जी म.सा की शिष्या पू. साध्वी डाँ. श्री प्रियश्रद्धांजनाश्रीजी म. आदि ठाणा की
पावन निश्रा में महाचमत्कारी दादा गुरुदेव महापूजन का भव्य आयोजन 17अगस्त 2014 को मोरारबाग वाडी में किया गया। 
इस अवसर पर पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभसागर जी म. के शिष्या पूज्य मुनि श्री मेहुलप्रभसागरजी म. द्वारा संकलित "दादा गुरुदेव की पूजा" पुस्तिका का विमोचन सुश्री मंजूजी लोढा, श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ के संस्थापक अध्यक्ष श्री प्रकाशजी कानुगो एवं अध्यक्ष श्री मांगीलालजी शाह द्वारा किया गया।

श्री मणिधारी जिनचन्द्रसूरि जैन श्वेताम्बर संघ में पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी ms

Image

इचलकरंजी श्री मणिधारी जिनचन्द्रसूरि जैन श्वेताम्बर संघ में पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी ने श्री सुखसागर प्रवचन मंडप में पर्युषण महापर्व के छठे दिन विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा- परमात्मा महावीर के जीवन की सबसे बडी विशिष्टता है कि उनका आचार पक्ष व विचार पक्ष एक समान था। मात्र उपदेश देने वाले तो हजारों हैं, पर उनका अपना जीवन अपने ही उपदेशों के विपरीत होता है। ऐसे व्यक्ति पूज्य नहीं हुआ करते। पूज्य तो वे ही होते हैं, जिनकी कथनी करणी एक समान हो।

Image
ऐसे समय में परमात्मा महावीर के अजर अमर और समय निरपेक्ष सिद्धान्त ही हमारी रक्षा कर सकते हैं। आज अहिंसा, अनेकांत और अपरिग्रह इन तीन सिद्धान्तों को अपनाने की अपेक्षा है। ये तीन सिद्धान्तों के आधार पर पूरे विश्व में शांति और आनन्द का वातावरण छा सकता है।
उन्होंने परमात्मा महावीर के साढे बारह वर्षों में साधना काल की विवेचना करते हुए कहा- परमात्मा महावीर ने क्रोध, मान, माया, लोभ, राग, द्वेष इन भावों को तिलांजलि देकर मौन साधना का प्रारंभ किया। क्रोध की स्थितियों में भी वे पूर्ण करूणा के भावों से भर जाते थे। उनके जीवन की व्याख्या सुनते हुए जब उन्हें मिले कष्टों का विशद विवेचन सुनते हैं तो हमारी आंखों में अश्रु धारा बहने लगती है। संगम देव और कटपूतना के द्वारा दिये गये उपसर्गों को जब सुनते हैं तो हमारे रोंगटे खडे हो जाते हैं। परन्तु परमात्मा महावीर तो करूणा की साक्षात् मूर्ति थे। चण्डकौशिक को उपदेश देने के लिये स्वयं चल कर उसकी बाबी तक पहुँचे थे।

श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ मुंबई में धर्म आराधना का ठाठ लगा

Image
धर्म नगरी मुंबई में श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ मुंबई के तत्वावधान में आयोजित पू. साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी म. की शिष्या पू साध्वी डाँ. श्री प्रियश्रद्धांजनाश्रीजी म., प्रियश्रेष्ठांजनाश्रीजी म. की पावन निश्रा में धर्म आराधना का ठाठ लगा हैै। ता. 3 अगस्त 2014 को नेम राजुल के जीवन चरित्र पर आधारित नाटिका का मंचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में विठल वाडी प्रांगण से बाजते गाजते नेम कुंवर की बारात निकाली गयी। बारात गोडवाल भवन पहुच कर धर्मसभा में परिवर्तित हुयी। प्रवचन के पश्चात बालक बालिकाओं द्वारा नेमकुमार के जीवन से जुडी विभिन्न घटनाओं का सटीक मंचन किया। जिसमें प्रियंवदा दासी द्वारा जन्म की बधाई, कृष्ण महाराजा एवं सत्यभामा व रुक्मणी रानी द्वारा नेम कुंवर को विवाह हेतु मनाना, नेम कुंवर का बारात लेकर आना, पशुओं का आक्रंद सुन अपनी बारात मोडना, नेम कुमार और राजुल के बीच का संवाद, राजुल का बोध एवं संयम लेने का निर्णय तथा राजुल और नेम कुमार का गिरनार की ओर प्रस्थान जैसे विभिन्न द्रश्यों को देख कर उपस्थित जन समुदाय भाव विभोर हो गया।