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Showing posts from March, 2014

श्री हस्तिनापुर तीर्थ

पावनतीर्थश्रीहस्तिनापुरकाधार्मिकऔरएतिहासिकमहत्व हैं।इसतीर्थकीप्राचीनतादादाआदिनाथसेप्रारंभहोतीहे।भगवानकेवर्षीतपजैसेमहानतपकापारना,१२ कल्याणककीपावनभूमि, ६चक्रवतीयोकीजन्मभूमि, अन्नतराजामहाराजोकेशासनकालऔरपांडवोऔरकोरवोंकीराजधानीकागौरवइसभूमिकोप्राप्त है।

श्री चंपा पूरी तीर्थ

   श्री चंपा पूरी तीर्थ
बिहार की  प्रसिद्ध सिल्क नगरी भागलपुर से  महज ६ कि.मी. की दुरी पर श्री चंपा पूरी तीर्थ आया हुवा है ।
  १२ वे तीर्थंकर श्री वासुपूज्य स्वामी  का जन्म के साथ साथ इनके पांचो कल्याणक इसी पावन चम्पापुरी तीर्थ पर हुवे।
तीर्थंकर वासुपूज्य स्वामी के माँ का नाम जया रानी और पिता का नाम वसुपूज्य था ।
भगवान आदिनाथ ने भरत देश को ५२ जन पदों में विभाजित किया था, उसमे अंग जनपद भी एक था।
चंपा अंग जनपद की राजधानी थी।यहाँ  के राजा का नाम दधि वाहन और रानी का नाम अभया था। चंपा नगरी के द्वार खोलने वाली महासती सुभद्रा थी।

श्री पावापुरी तीर्थ   

श्री पावापुरी तीर्थ   
जहाँ भगवान महावीर का प्रदापर्ण हुवा  और वहा के राजा हस्तिपाल ने अपने राज्य में भगवान को स्थान उपलब्ध कराया था।
भगवान के दर्शनार्थ अनेको राजागण, श्रेष्ठीगण आदि भक्त आते रहते थे प्रभु ने अपने प्रथम गणधर श्री गौतम स्वामी को निकट गाव में देवशर्मा  ब्राह्मण के यहाँ उपदेश देने के लिए भेजा।
कार्तिक कृष्णा १४ के प्रात: काल प्रभु की अन्तिम देशना प्रारम्भ हुई उस समय मलवंश के ९ राजा, लिच्छवींवशं के ९ राजा आदि  भक्तगणों से पूरी सभा भरी हुई थी। सारे श्रोता प्रभु की अमृतमयि वाणी को अत्यन्त भाव पूर्वक और  श्रद्धा पूर्वक सुन रहे थे।

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बड़े काम के कोड है... शेयर करे और दुसरो को भी बताये !

बड़े काम के कोड है... शेयर करे और दुसरो को भी बताये!. क,ख,ग क्या कहता है जरा गौर करें... - क्लेश मत करो
ख- खराब मत करो
ग- गर्व ना करो
घ- घमण्ड मत करो च- चिँता मत करो
छ- छल-कपट मत करो
ज- जवाबदारी निभाओ
झ- झूठ मत बोलो

हमारी ख़ुशी दूसरों की ख़ुशी में छिपी हुईहै।

एक बार पचास लोगों का ग्रुप
किसी सेमीनार में हिस्सा ले रहा था।
सेमीनार शुरू हुए अभी कुछ ही मिनट बीते थे
कि स्पीकर अचानक ही रुका और
सभी पार्टिसिपेंट्स को गुब्बारे देते हुए बोला ,
आप सभी को गुब्बारे पर इस मार्कर से
अपना नाम लिखना है।”

बाड़मेर में कल्याणपुरा अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न

बाड़मेर में कल्याणपुरा स्थित महावीर चौक के पाश्र्वनाथ जिनालय के जीर्णोद्धार कारत जिन मंदिर की भव्यातिभव्य अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न हुए।श्री पाश्र्वनाथ जिनालय की अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. की पावन निश्रा में एवं साध्वी श्री सुरंजनाश्री आदि ठाणा एवं डाँ. विद्युत्प्रभाश्री आदि ठाणा के पावन सानिध्य में 5 मार्च को सम्पन्न होगी।अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन आज प्रात:10बजे वाराणसी नगरी में सुसज्जित राजदरबार के रंग मण्डप पर आज माता त्रिशला के चौदह स्वप्नों के दर्शन का मनमोहक कार्यक्रम हुआ जिसमें चौदह स्वप्न, हाथी, रिषभ, सिंह लक्ष्मीजी, फूलों की माला, चन्द्र, सूरज, ध्वजा, कलश, पदम सरोवर, खीर समुद्र, देव विमान, रत्नों की राशि, अग्नि धूम के प्रत्येक स्वप्न बालिकाओं द्वारा अपने सिर पर रखकर झूमते-नाचते हुए सभी श्रद्धालुओं को दर्शन कराए।च्यवन कल्याणक के बारे में बताया कि परम कृपासिंधु अनंत उपकारी श्री अरिहंत परमात्मा का देवलोक अथवा नरक गति का आयुष्य पूर्ण करने पर मनुष्य गति माता की कुक्षि में अवतरण होता है …