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Showing posts from April, 2014

जम्बुद्वीप के भरत क्षेत्र में भविष्य काल में होने वाले तीर्थंकरों के पूर्व भव का नाम व भविष्य का नाम

1. श्रेणिक राजा का जीव, प्रथम नरक से आकर पहले ' श्री पद्मनाभजी ' होंगे। 2. श्री महावीर स्वामी जी के काका सुपार्श्व जी का जीव, देवलोक से आकर दुसरे ' श्री सुरदेव जी ' होंगे । 3. कोणिक राजा का पुत्र उदाइ राजा का जीव , देवलोक से आकर तीसरे ' श्री सुपार्श्व जी ' होंगे।

आठ कर्म

1. ज्ञानावरणीय कर्म- वह कर्म, जिससे आत्मा के ज्ञान-गुण पर परदा पड़ जाए।  जैसे सूर्य का बादल में ढँक जाना।
2. दर्शनावरणीय कर्म- वह कर्म, जिससे आत्मा की दर्शन शक्ति पर परदा पड़ जाए।  जैसे चपरासी बड़े साहब से मिलने पर रोक लगा दे।
3. वेदनीय कर्म- वह कर्म जिससे आत्मा को साता का- सुख का और असाता का-दुःख का अनुभव हो।  जैसे गुड़भरा हँसिया- मीठा भी, काटने वाला भी।
4. मोहनीय कर्म- वह कर्म, जिससे आत्मा के श्रद्धा और चारित्र गुणों पर परदा पड़ जाता है।  जैसे शराब पीकर मनुष्य नहीं समझ पाता कि वह क्या कर रहा है।
5. आयु कर्म- वह कर्म, जिससे आत्मा को एक शरीर में नियत समय तक रहना पड़े।  जैसे कैदी को जेल में।
6. नाम कर्म- वह कर्म, जिससे आत्मा मूर्त होकर शुभ और अशुभ शरीर धारण करे।  जैसे चित्रकार की रंग-बिरंगी तसवीरें।
7. गोत्र कर्म- वह कर्म, जिससे आत्मा को ऊँची-नीची अवस्था मिले। जैसे कुम्हार के छोटे-बड़े बर्तन।
8. अन्तराय कर्म- वह कर्म, जिससे आत्मा की लब्धि में विघ्न पड़े।  जैसे राजा का भण्डारी। बिना उसकी मर्जी के राजा की आज्ञा से भी काम नहीं बनता

Jahaj mandir

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फालना में आराधना भवन का उद्घाटन

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पूज्यगुरुदेवआचार्यभगवंतश्रीजिनकान्तिसागरसूरीश्वरजीम.सा. केशिष्यप्रशिष्यपूज्यमुनिराजश्रीमुक्तिप्रभसागरजीम.सा. पूज्यमुनिराजश्रीमनीषप्रभसागरजीम.सा. कीपावननिश्रामेंफालनानगरमेंश्रीआदिनाथजिनमंदिरएवंदादावाडीकी 12वींवर्षगांठनिमित्तेत्रिदिवसीयपरमात्मभक्तिकाआयोजनहोगा।इसमंदिरदादावाडीकीप्रतिष्ठापूज्यगुरुदेवउपाध्यायश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. कीपावननिश्रामेंवि. 02059 वैशाखशुक्लतृतीयाता. 11 मई 2002 कोसंपन्नहुईथी।

डुठारिया प्रतिष्ठा

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पालीजिलेकेछाजेडपरिवारोंकेगांवश्रीडुठारियानगरमेंआदिनाथपरमात्माकेभव्यातिभव्यजिनमंदिरकीअंजनशलाकाप्रतिष्ठाआगामीवैशाखसुदि 12 रविवारता. 11 मई 2014 कोपूज्यगुरुदेवआचार्यदेवश्रीजिनकान्तिसागरसूरीश्वरजीम.सा. केशिष्यपूज्यगुरुदेवउपाध्यायप्रवरश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. कीपावननिश्रामेंसंपन्नहोनेजारहीहै।

कन्याकुमारी में शिलान्यास संपन्न

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भारतकेदक्षिणीसमुद्रकेकिनारेस्थितऐतिहासिकपर्यटकस्थलकन्याकुमारीमें            परमात्मामहावीरस्वामीकाजिनमंदिरनिर्मितहोनेजारहाहै।साथहीश्रीजिनकुशलसूरिदादावाडीएवंराजेन्द्रसूरिगुरुमंदिरकानिर्माणभीहोगा।




नवप्रभात -उपाध्याय मणिप्रभसागरजी म.

जीवनमेंकभी-कभीऐसीविकटस्थितियांबनजातीहै, जबनिर्णयकरनामुश्किलहोजाताहै।जबव्यक्तिचारोंतरफसेअपनेआपकोघिराहुआमहसूसकरताहै, जबइधरकुआंउधरखाईनजरआतीहै, ऐसीस्थितिमेंउचितसमाधानकैसेपायाजासकताहै! मैंनेएककहानीपढीथी। जंगलमेंएकगर्भवतीहिरणीप्रसवहेतुसुरक्षितस्थानकीखोजकररहीथी।नदीकेकिनारेघनीझाडियोंकेपासबिछीहुईमुलायमघासवालीजगहउसेसुरक्षितप्रतीतहुई।

Jahajmandir magazine april 2014

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सफलता के सात भेद

सफलता के सात भेद कौनसे हैं ?मुझे अपने कमरे के अंदर ही उत्तर मिल गये !छत ने कहा : ऊँचे उद्देश्य रखो !पंखे ने कहा : ठन्डे रहो !घडी ने कहा : हर मिनट कीमती है !शीशे ने कहा : कुछ करने से पहले अपने अंदर झांक लो !खिड़की ने कहा : दुनिया को देखो !कैलेंडर ने कहा : Up-to-date रहो !दरवाजे ने कहा : अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के
लिए पूरा जोर लगाओ !