Jan 29, 2014

फोटो चितलवाना से शंखेश्वरजी पैदल संघ

"प" की महीमा

‘प’ शब्द हमको बहुत प्रिय है। हम जिंदगी भर ‘प’ के पीछे भागते रहते है। जो मिलता है वह भी ‘प’ और जो नहीं मिलता वह भी ‘प’।
पति- पत्नी- पुत्र -पुत्री -परिवार-
पैसा -पद-प्रतिष्ठा -प्रशंसा।
ये सब ‘प’ के पीछे पड़ते-पड़ते हम पाप करते
है यह भी ‘प’ है। फिर हमारा ‘प’ से पतन
होता है और अंत मे बचता है सिर्फ ‘प’ से पछतावा।
पाप के ‘प’ के पीछे पड़ने से अच्छा है 'प' से पुण्य करके "प" के परमात्मा की ‘प’ से प्राप्ति करले..।''

Jan 28, 2014

श्री शंखेश्वर महातीर्थ का पैदल संघ

संघपति मोहनलाल मरडिया ने बताया कि उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभसागरजी .सा. की पावन निश्रा में ता.21 जनवरी को प्रातशुभ मुहूत्र्त में विधि विधान के साथ चतुर्विध संघ का प्रयाण हुआ।
संघपति शांतिलाल मरडिया ने बताया कि चितलवाना से हाडेचाकारोलासांचोर होते हुए ता. 27 जनवरी को भोरोल तीर्थ पहुँचा। ता.28 को वाव पहुचा। वाव में श्री अजितनाथ  श्री गौडी पाश्र्वनाथ भगवान के दर्शन कर सभी आराधक हर्षित हुये।

परम पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरूष आचार्य देव श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी .सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभसागरजी .सा., पूज्य मुनिराज श्री मुक्तिप्रभसागरजी ., पूज्य मुनि श्री मनीषप्रभसागरजी ., पूज्य मुनि श्री मेहुलप्रभसागरजी . आदि की पावन निश्रा एवं पूजनीया माताजी . श्री रतनमालाश्रीजी .सा., पू. साध्वी श्री नीतिप्रज्ञाश्रीजी ., पू. साध्वी श्री विभांजनाश्रीजी . एवं पूजनीया साध्वी श्री प्रियरंजनाश्रीजी ., पू. साध्वी श्री प्रियदिव्यांजनाश्रीजी ., पू. साध्वी श्री प्रियशुभांजनाश्रीजी . आदि की पावन सानिध्यता में श्री चितलवाना से श्री शंखेश्वर महातीर्थ के लिये छह री पालित संघ ता. 21 जनवरी को रवाना हुआ। संघ का आयोजन शा. दलीचंदजी मिश्रीमलजी मावाजी मरडिया परिवार कर रहा है।
संघ प्रयाण से पूर्व ता. 17 जनवरी को पूज्य उपाध्याय श्री एवं पू. माताजी . पू. बहिन . डाँ. विद्युत्प्रभाश्रीजी . आदि साधु साध्वी मंडल का नगर प्रवेश संपन्न हुआ। ता. 18 से संघपति परिवार द्वारा त्रिदिवसीय जीवित महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसके अन्तर्गत ता. 18 को पंचकल्याणक पूजा पढाई गई। ता. 19 को दादा गुरुदेव की पूजा के साथ साथ मातृ पितृ वंदना का अनूठा भावनात्मक कार्यक्रम रखा गया। जिसे आबूरोड की भावना आचार्य ने संचालित किया।
ता. 19 को पूजा के साथ रात्रि में सुप्रसिद्ध लोक संगीतकार श्री प्रकाश माली द्वारा कुल देवी श्री सच्चिया माता का रात्रि जागरण रखा गया। ता. 20 को शान्तिस्नात्र महापूजन का आयोजन किया गया। रात्रि में भक्ति भावना का आयोजन हुआ। हाडेचा निवासी श्री मावजी टोमाजी घोडा परिवार द्वारा विजय तिलक का विधान किया गया।
पूज्यश्री ने प्रवचन फरमाते हुए कहा- एक व्यक्ति गाडी में बैठकर तीर्थ यात्रा करता है। और एक व्यक्ति पैदल चल कर वीतराग परमात्मा की आज्ञा के अनुसार एकासणा आदि छह री का पालन करता हुआ तीर्थ यात्रा करता है। इन दोनों यात्राओं में बहुत अन्तर है।
                छह री का पालन करते हुए यात्री के मन में पल-पल तीर्थ की महिमा गुंजती है। मरडिया परिवार भाग्यशाली है, जो ऐसे विशाल संघ के आयोजन का लाभ प्राप्त हो रहा है।
यह पैदल संघ राधनपुर, समी आदि होते हुए ता. 4 फरवरी को शंखेश्वर महातीर्थ पहुँचेगा। ता. 5 को संघ माला का विधान होगा।
इस अवसर पर संघवी बाबुलाल मरडिया, प्रकाश घोडा, घेवरचंद घोडा, छबीलकुमार घोडा, मदनलाल मरडिया, रमणलाल गांधी आदि गणमान्य नागरिक मौजूद थे, जिन्होंने संघपति परिवार की अनुमोदना की। संगीतकार कमलेश जैन ने परमात्म भक्ति में रंग जमाया।

प्रेषक

मुकेश प्रजापत

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Jan 27, 2014

हमारा धर्म " जैन "  तो  " जाती " कौनसी ?

हमारे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिये....

जागो..... जैनों..... जागो   
       
हमारा धर्म " जैन "  तो  " जाती " कौनसी ?

सभी जैन धर्मी भाईयों, बहनों तथा युवा साथियों

सादर जय जिनेन्द्र....

जैन यह एक " स्वतंत्र धर्म " है,          
       हिन्दु यह भी एक स्वतंत्र धर्म है ।

जैन यह हिन्दु नहीं है .............           
        
यह हमें "राष्ट्रीय अल्पसंख्यक धर्म " का

दर्जा मिलने से साबीत हो चुका है।

हमारे द्वारा भूतकाल में हुई गलतियाँ फिर से
वर्तमान और भविष्य काल में ना हो।

इसलिए...... आगे हमें धर्म की जगह सिर्फ  

" जैन " ही लिखना है।

सिर्फ

"जैन" ही लिखना है।

जन्म दाखला (ग्राम पंचायत,नगर पालिका, महानगरपालिका ) स्कुल में दाखला (Admission) करते वक्त या स्कुल छोडते (Leaving ,TC ) वक्त हमारे धर्म, जाती के बारे में हमारे सबुत, दस्तावेज ,सहमती से या पुछ कर ही लिखा जाता है।

स्कुल रजिस्टर में धर्म, जाती सही लिखी गई है क्या? खुद जाॅच कर देखे (बहुत से स्कुल वाले हमें पुछे बगैर ही अपनी मजीॅ से स्कुल रजिस्टर में गलत जानकारी भर देते है)  हमारी छोटी सी लापरवाही का खामियाजा सरकारी योजना, सहुलियत, स्काॅलरशीप या सरकारी/गैरसरकारी कामकाजों के समय हमारे बच्चो को भविष्य में भुगतना पडता है।

जागो...जैनियों...जागो
   
हमारे जैन धर्म के लिए.............
     
हमारे बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए....

धर्म (Religion) " जैन "  तो जाती (cast) ".............."  क्या लिखे ?

जैन धर्म मे 120 जाती ( हमारी जानकारी में) आती है..!                  
(जैसे ओसवाल, अगरवाल, खंडेलवाल, सैतवाल, शीमाळी,अरसु, असाठी वैश्य, अयोध्यावासी, बघेरवाल, बकरवाल,बन्नोरे, 
बरैय्या, वरैय्या,भाबडा,भावसार,भोजक, चतुथॅ, चिप्पिगा, चितोडा,धाकड, धमॅपाल,गंगेरवाल,गोलालारे,गोलापूवॅ,गोलाशिगारे,हरदा, इद़, जैन ब्राम्हण, जैनबंट, जैन गौडा, जैन गुजर,  जैन कलार, जैन कायस्थ, जैन खञी,जैन कोष्टी,जैन कुरूब,जैन कुरूंब, जैसवाल, जांगडापोरवाल ,जैन जाट,हुंबड, हुमड, कच्छी ओसवाल ,काबोज,कंदोई, कासार, शञिय, घाची, परमार,लाड,मेवाड , लमेचुवाल, नैनार,नागदा,नरसिहपुरा,नरसिगपुरा, नेमा, 
नेवी,पद्मावती,पुरवाल,पल्लीवाल, पंचम, 
परवार,पाटीदार,सादरू,सराक,सेवक, समैय्या,उपाध्ये,वीरवाल ,......,......,........)
आपकी जो " जाती " है वही लिखे ।

जाती की जगह ........
"जैन पंथ "..............
(श्वेताम्बर, दिगम्बर) 

उपपंथ.............
(मदिरमागीॅ, देरावासी,
स्थानकवासी, तेरापंथी)

उपजात..................
(बिस्सा, दस्सा, पाचा)

गोत्र.................
(मंडलेचा, ओस्तवाल,गांधी, मोदी, कोठारी, भडारी, सेठी, पोतदार, पाटणी, गर्ग, सोईतकर, आवाडे, शाह, अदाणी )

प्रादेशिक भाषा ..........
(मारवाडी, गुजराती, पंजाबी,मराठी )

ऐसा कुछ भी ना लिखे ।यह हमारे लिये भविष्य मे सरकारी योजना,सुविधा,हक लेने मे बहुत नुकसानदाई हो सकता है।          
तथा जाती में "जैन" भी ना लिखे" जैन " यह धर्म है। जाती नहीं इसका विशेष ध्यान रखे।

  धर्म - जैन
  जात - ओसवाल, अगरवाल, खंडेलवाल, सैतवाल, शीमाली  (120 जाती मे से जो आपकी जाती हो वही लिखे)

विशेष सुचना - 10वी कक्षा तक आप सबुत के दस्तावेज स्कुल में देकर धर्म, जाती में सुधार करा सकते है ।
धन्यवाद ।

Jan 23, 2014

Nice HEART touching STORY

जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी
से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम
पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , " काँच की बरनी और दो कप चाय " हमें याद आती है ।

दर्शनशास्त्र के एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बड़ी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें
टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ...
उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई?
हाँ ...
आवाज आई ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये. धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये ,
फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ?
हाँ
.. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा ..

सर ने टेबल के नीचे से चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित थोड़ी सी जगह में सोख ली गई ...

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया

इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो ....

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान, परिवार, बच्चे, मित्र, स्वास्थ्य और शौक हैं ,

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी , कार , बड़ा मकान आदि हैं , और

रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें , मनमुटाव , झगडे है ..

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या
कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ...
ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ...

यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे रहोगे
और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय
नहीं रहेगा ...

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह घूमने निकल जाओ , मकान के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ...
टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है
... बाकी सब तो रेत है ..
छात्र बड़े ध्यान से सुन रहे थे ..

अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया कि " चाय के दो कप " क्या हैं ?

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया ...
इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन
अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिये ।

( अपने खास मित्रों और निकट के व्यक्तियों को यह विचार तत्काल बाँट दो .. मैंने अभी - अभी यही किया है)
  ~*~   ~*~   ~*~   ~*~

Jan 20, 2014

जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा मिला

जैन समुदाय को अब अल्पसंख्यक का दर्जा मिल गया है. 20 . 01 . 2014 को इसकी मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट ने दे दी.
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जैन समुदाय के अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त होने से  लाभ
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1) जैन धर्म की सुरक्षा होगी।
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2) जैन धर्म की नैतिक  शिक्षा पढ़ाई कराने का जैन स्कूलो को अधिकार
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3) कम ब्याज पर लोन, व्यवसाय व् शिक्षा तकनिकी हेतु उपलब्ध होंगे।
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4) जैन कोलेजो में जैन बच्चो के लिए 50 % आरक्षित सीट होगी।
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5) जैन समुदाय में अल्पसंख्यक घोषित होने से सविधान के अनुच्छेद 25 से 30 के अनुसार जैन समुदाय धर्म, भाषा,संस्कृति की रक्षा सविधान में उपलब्धो के अंतर्गत हो सकेगी।
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6) जैन धर्मावलंबियो के धार्मिक स्थल, संस्थाओं, मंदिरों, तीर्थ, क्षेत्रो एव ट्रस्ट का सरकारी करण या अधिग्रहण आदि नही किया जा सकेगा अपितु धार्मिक स्थलों का समुचित विकास एव सुरक्षा के व्यापक प्रबंध शासन द्वारा भी किए जायेंगे।
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7) उपासना स्थल अधिनियम 1991 ( 42आक- 18-9-91) के तहत किसी धार्मिक उपासना स्थल बनाए रखने हेतु स्पष्ट निर्देश जिसका उलघ्घन धरा 6(3) के अधीन दंडनीय अपराध है ।
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8) पुराने स्थलों एव पुरातन धरोहर को सुरक्षित रखना  सन 1958 के अधिनियम धारा 19 एव 20 के तहत सुरक्षित हो।
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9) समुदाय द्वारा संचालित ट्रस्टो की सम्पति को किराया नियंत्रण अधिनियम से भी मुक्त रखा जाएगा ।
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10)जैन धर्मावलम्बी अपनी प्राचीन संस्कृति पुरातत्व एव धर्मस्थलो का सरक्षण कर सकेंगे।
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11) जो प्रतिभावन अल्पसंख्यक विधार्थी जिले के उत्क्रिस्ट विधालयो में प्रवेश पाते है तो उनमे गरीबी रेखा से निचे जीवनयापन करने वाले विधार्थियो का 9 वि, 10वि, 12वि, का शिक्षण शुल्क एव अन्य लिया जाने वाला शुल्क पूर्णत माफ़ कर दिया जाएगा।
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12) जैन मंदिरों, तीर्थ स्थलों, शेक्षणिक संस्थाओं इत्यादि के प्रबंध की जिम्मेदारी समुदाय के हाथ में दी जायेगी।
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13) शेक्षणिक एव अन्य संथाओ को स्थापित करने या उनके संचालन में सरकारी हस्तक्षेप कम हो जाएगा।
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14) विश्व विद्यालय द्वारा संचालित कोचिंग कोलेजो में समुदाय के विद्यार्थियों को फ़ीस माफ़ या कम होने की प्राप्प्त होगी।
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15) सरकार द्वारा जैन समुदाय को स्कुल, कोलेज, छात्रावास, शोध या प्रशिक्षण संस्थान खोलने हेतु सभी सुविधाए एव रियायती दर पर जमींन उपलब्ध करवाई जायेगी।
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16) जैन समुदाय के विद्यार्थियों को प्रशानिक सेवाओं और व्यवसायिक पाठ्यक्रम के प्रशिक्षण हेतु अनुदान मिल सकेगा ।
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17) जैन समुदाय द्वारा संचालित जिन संस्थाओं पर कानून की आड़ में बहुसंख्यको ने कब्जा जमा रखा है उनसे मुक्ति मिलेगी।
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18) जैन धर्मावलम्बी द्वारा पुण्यार्थ, प्राणी सेवा, शिक्षा इत्यादि हेतु दान धन कर मुक्त होगा।
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19) जैन धर्मावलम्बी को बहुसंख्यको समुदाय के द्वारा प्रताड़ित किये जाने की स्थति में सरकार जैन धर्मावलम्बी की रक्षा करेगी।
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20) अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थल के समुचित विकास एव सुरक्षा के व्यापक प्रबंध शासन द्वारा किये जायेंगे।
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21) अल्पसंख्यक वर्ग युवाओं में खेल कूद व् अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में प्रोत्साहन हेतु अनुदान एक छात्रवृत्यियो में विशेष प्रावधानो का लाभ मिल सकेगा, ताकि गरीबी रेखा से निचे आने वाले तथा आर्थिक स्थति से कमजोर वर्ग का शेक्षणिक, सामायिक एव आर्थिक विकास हो सके।
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21) अल्पसंख्यक समुदाय के लिए कराए गए आर्थिक सामाजिक, शेक्षणिक स्थति के सर्वेक्षण के आधार पर रोजगार मूल सुविधा का लाभ मिलेगा ।
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भाईयो बहनो तथा युवा साथिओ..
जय जिनेन्द्र
जैन समाज के लिये बहुत बड़ी खुश का दिन इस खबर से पुरे जैन समाज में ख़ुशी की लहर... खुश खबर.
भारत सरकार ने जैन समाज को आज राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा देने कि घोषणा कर दी है। 
भारत सरकार को.. धन्यवाद.. धन्यवाद..
ये हमारे पुरे जैन समाज के अच्छी खबर है क्युकी आज हो ये घोषणा हुई है इस घोषणा का जैन समाज को 25 साल से इन्तजार कर रहा था लेकिन हमारे जैन भाई बहनों ने जो आन्दोलन किये है उसका फल आज पूरे जैन समाज को मिला.

Jan 12, 2014

" बकरा ईद " और " मकर सक्रान्ति " मे क्या फर्क है ?

मित्रो इस मैसेज को आप जरूर पढ़े और सब तक पहुचाएं :-

एक सवाल
" बकरा ईद " और " मकर सक्रान्ति " मे क्या फर्क है ?

जवाब तो यही कि " बकरा ईद " मुस्लिमो का त्यौहार है ,
और " मकर सक्रान्ति " हिन्दुओं का त्यौहार है |

              लेकिन

बकरा ईद पर जीव हिंसा होती है , इसीलिए मुस्लिम मनाते है |

तो क्या मकर सक्रान्ति पर जीव हिंसा नही होती है  ?

मित्रो अब आप सोचिए हमारे मे और मुस्लिमो मे अब क्या फर्क रह गया है | हम मकर सक्रान्ति को एक दिन की खुशी के लिए कितने पक्षीयो की हिंसा करते है , क्या आपको मालूम है ?
हम पहले भी मकर सक्रान्ति मनाते थे तब हम घर पर तिल के लड्डू खाते - खिलाते और इस दिन निरीह जीव सेवा करते थे |
अब हम थोड़ी खुशी के लिए पतंग उड़ाकर जब घर चले जाते है और टूटा मांजा ( धागा ) पेड़ो व तारो पर इधर उधर लटका रहता है | पक्षी बेचारे नासमझ कि घोंसले बनाने के काम आएगा पर उनको क्या पता कि ये फांसी का फंदा है और फंस जाते है या इनके पंख कट जाते है |

मित्रो आपसे हमारी इतनी ही विनती है कि आप कोई पतंग ना उड़ाए , उन पक्षीयो को आज़ादी से उड़ने दे |

"जीव दया सबसे बड़ी सेवा है सभी जीव प्रेमीयो से विनती है कि ऐसी अनजाने मे हो रही हिंसा को रोकने के लिए अधिक से अधिक भाईयो , बहिनो तक यह जानकारी पहुचाएं ......

Jan 10, 2014

EK KABOOTAR MUJHSE BOLA कबूतर की मार्मिक बात के लिए click करे

EK KABOOTAR MUJHSE BOLA

MERE PANKH TOOT JATE HAI JAB TUM PATANG UDATE HO

HUME TO PATANG K DHAAGO SE MAAR DETE HO AUR TUM KATLKHANE SE DUSRE JEEVO KO CHUDATE HO
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AISA KIS DHARAM ME LIKHA HAI KI EK KO JINDAGI AUR EK KO MOUT DE DO

PATANG NA UDAKAR TUM CHAHO TO HUMARI DUA LE LO
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TUMHE TO PATANG UDAANE ME MAZA AATA HAI

MAGAR BEKASOOR KABOOTAR KIS BAAT KI SAZA PATA HAI
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TUM CHAHO TO HUME BAJRI JWAAR CHANA NA DAALO AUR NA DO HUME KOI DAANA

BAS ITNI GUJARISH HAI DOSTO KI IS SANKRANTI PE PATANG NA UDANA

तू मने इंसान जीवन दान आपि दे....
आसमां में एक ऊँची उड़ान आपि दे..!!

हु जिवु छू आसमां में पंख लहरा कर,
कट रहे मेरे पंख पतंगों से टकरा कर,
लहुलुहान म्हारी आत्मा ने सम्मान आपि दे.
तू मने इंसान जीवन दान आपि दे..!!

क्या मिलेगा कुछ क्षणों में पतंग लहरा कर..
जा दान कर सकरात को पुन्य कमा कर..
नुकीले धागों से पंछियों को मेहरबान आपि दे...
तू मने इंसान जीवनदान आपि दे...!!

Jan 6, 2014

जैन समाज के शिखर पुरुष ‘जैन पद्म श्री’ विभुषित श्री दीपचंदजी गार्डी आज हमारे बिच नहीं रहे


जैन समाज के शिखर पुरुष 'जैन पद्म श्री' विभुषित श्री दीपचंदजी गार्डी आज हमारे बिच नहीं रहे . ईश्वर उनकी आत्मा को चिर शांति प्रदान करे . JAHAJ MANDIR उन्हें श्रद्धांजलि प्रदान करते है...