Feb 28, 2014

दादा जिन कुशल सूरिजी की आज पुण्य तिथि है ।सभी महानुभावों से निवेदन है की दादावाडी अवश्य जायें और गुरू इकतीसा का पाठ करें।

Jay ho gurudev. ..

दादा जिन कुशल सूरिजी की आज पुण्य तिथि है ।

कुशल सूरि देराउर नगरे ,
भुवनपति सुर ठावे ।
फाल्गुन वदी अमावस सीधा,
पूनम दर्श दिखावे ।
बोलिए कलिकाल कल्पतरु दादा गुरूदेव जिन कुशल सूरिजी की  जय ।।।
तीसरे दादा जिन कुशल सूरिजी की आज पुण्य तिथि है ।
जय जिनेन्द्र
       आज प्रगट प्रभावी चौरासी  गच्छ श्रंगारहार जंगम युग प्रधान भटारक  खरतरगच्छ चारित्र चूड़ामणि तीसरे दादा  श्री जिन कुशल सूरी जी  म.सा. की 681 वीं स्वर्गारोहन जयंती  समारोह बड़े  हर्षोउल्लास से मनाया जा रहा है ।
            आपका जन्म राजस्थान के बाडमेर  में गढ सिवाना में  विक्रम  स्वंत्त 1337  में छाजेड गोत्र में हुवा , आपके बचपन का नाम  करमन था ।
           आप  व्याकरण   न्याय  साहित्य  अलंकार  ज्योतिष  मंत्र चित्रकाव्य  समस्या पूर्ति और जैन  दर्शन  के  अभूतपर्व विद्वान् थे ।
        आप भक्तों के रोम रोम में बसे हुवे हो जब भी भक्त आपको याद करते हैं ,आप तुरंत हाजिर हो जाते हो , आपके राजस्थान में आज भी   जयपुर में मालपुरा , जैसलमेर में बरमसर ,और बीकानेर में नाल  दादावाडी हैं,  जहा आपने अपने भक्तो को  देवलोक होने के बाद दर्शन दिए और उनका मनोरथ पूरा किया ।
          आपके चमत्कार अनगिनत हैं  क्यों की आप सदैव भक्तो के लिए ही बने ,चाहे  लुनिया जी श्रावक का  आज के  पाकिस्तान  से  अपनी बेटियों  का शील  बचाने के लिए बरमसर आना.  एक  शासन  श्रावक भक्त को मालपुरा में  साक्षात दर्शन देना l  करमचंद  बछावत के मंत्री   वरसिंह   की प्रबल इच्छा का  मान रखते हुवे नाल  बीकानेर में साक्षात दर्शन देकर  उनका मनोरथ सिद्ध किया और  शासन की प्रभावना की ।
           आपने 42  साल तक   शासन की सुन्दर  प्रभावना की  कितनो को तारा और कितने के आप  आँखों के हीरे  बने  और कितने अजैनों को  जिन  शासन से जोड़कर  आपने  50000 के करीबन नूतन जैन बनाये  ।
        आपका स्वर्गवास  देराउर जो आज पाकिस्तान में  है वहा फाल्गुन वदि अमावश्या   को  रात्रि दो प्रहर बीतने पर  इस  असार संसार को  त्याग कर  स्वर्गीय देवो की  पंक्ति में अपना आसन जमाया ।
        75  मंडपिकावो से युक्त  निर्वाण यात्रा  निकाली गई  दाह संस्कार किया  गया  उनके संस्कार धाम पर  रिहड़ गोत्र  सेठ पूर्णचन्द्र  के पुत्र  हरिपाल श्रावक्   ने अपने परिवार के साथ सुन्दर स्तूप का निर्माण  करवाया ।
      ऐसे थे मेरे गुरुदेव   साक्षात्  गुरुदेव हाजर हुजुर  गुरुदेव  जिनके नाम स्मरण मात्र से आदि व्याधि सब दूर होकर  एक   नया जीवन मिलता है l
��  जैसलमेर के ब्रह्मसर में और जयपुर के  मालपुरा में दादा श्री जिन कुशल सूरी जी ने जिस  पाषाण पर साक्षात दर्शन दिए उस पर उनके  पदचिन्ह  अंकित हो गए   और  वो आज भी  वहा मोजूद हे आप उनके दर्शन वंदन का लाभ के सकते हे  यही तो  सच्ची श्रधा का प्रतीक है l
जय दादा जिन कुशल सूरी गुरुदेव
सभी महानुभावों से निवेदन है की दादावाडी अवश्य जायें और गुरू इकतीसा का पाठ करें।

Feb 20, 2014

जैनों को अल्पसंख्यक मान्यता : एक स्वागत योग्य घोषणा

जैनों को अल्पसंख्यक मान्यता : एक स्वागत योग्य घोषणा
0 पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी .सा.

यह अत्यन्त हर्ष का विषय है कि जैन समाज को धर्म के आधार पर भारत सरकार ने अल्पसंख्यक की मान्यता प्रदान की है।

प्रथम क्षण में जब हम सुनते हैं तो एक अजीब सा भाव पैदा होता है क्योंकि जैन एक धर्म है... एक विचार धारा है... जीवन जीने की पद्धति है! उसका समाज के साथ कोई गठबंधन नहीं है। तीर्थंकर परमात्मा की देशना के आधार पर अपने जीवन का निर्माण कर कोई भी व्यक्ति जैन हो सकता है।

Feb 16, 2014

चाणक्य के 15 अमर वाक्य

1)➤दूसरों की गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी।

2)➤किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं।

3)➤अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए वैसे दंश भले ही न दो पर दंश दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास करवाते रहना चाहिए।

4)➤हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है, यह कड़वा सच है।

5)➤कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो...
1. मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ?
2 इसका क्या परिणाम होगा ?
3 क्या मैं सफल रहूँगा?

6)➤भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये इस पर हमला कर दो यानी भय से भागो मत इसका सामना करो।

7)➤दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है।

8)➤काम का निष्पादन करो, परिणाम से मत डरो।

9)➤सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है।"

10)➤ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ।

11)➤व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है जन्म से नहीं।

12)➤ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या नीचे के हैं उन्हें दोस्त न बनाओ,वह तुम्हारे कष्ट का कारण बनेगे। समान स्तर के मित्र ही सुखदायक होते हैं।

13)➤अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो। छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो। सोलह साल से उनके साथ मित्रवत व्यवहार करो। आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है।"

14)➤अज्ञानी के लिए किताबें और अंधे के लिए दर्पण एक समान उपयोगी है।

15)➤शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है। शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य
दोनों ही कमजोर है।

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Feb 13, 2014

Dada gurudev ke darshan गुरुदेव के दरबार में दुनिया बदल जाती है...

गुरुदेव के दरबार में दुनिया बदल जाती है...

रहमत से हाथ की लकीर बदल जाती है...

लेता जो भी दिल से गुरुदेव का नाम...

एक पल में उसकी तक़दीर बदल जाती है...

जय गुरूदेव

Feb 11, 2014

अपनों की चोट...

एक सुनार था। उसकी दुकान से मिली हुई एक लुहार की दुकान थी। सुनार जब काम करता, उसकी दुकान से बहुत ही धीमी आवाज होती, पर जब लुहार काम करतातो उसकी दुकान से कानो के पर्दे फाड़ देने वाली आवाज सुनाई पड़ती।

एक दिन सोने का एक कण छिटककर लुहार की दुकान में आ गिरा। वहां उसकी भेंट लोहे के एक कण के साथ हुई।

सोने के कण ने लोहे के कण से कहा,
"भाई, हम दोनों का दु:ख समान है। हम दोनों को एक ही तरह आग में तपाया जाता है और समान रुप से हथौड़े की चोटें सहनी पड़ती हैं। मैं यह सब यातना चुपचाप सहन करता हूं, पर तुम...?"
"तुम्हारा कहना सही है, लेकिन तुम पर चोट करने वाला लोहे का हथौड़ा तुम्हारा सगा भाई नहीं है, पर वह मेरा सगा भाई है।"
लोहे के कण ने दु:ख भरे स्वर में उत्तर दिया। फिर कुछ रुककर बोला,
"पराये की अपेक्षा अपनों द्वारा दी गई चोट की पीड़ा अधिक असह्म होती है।

Feb 9, 2014

क्यों बनू मैं सीता ???

नारी कहे
क्यों बनू मैं सीता
तुम राम बनो या न बनो
मैं अग्नि परीक्षा में झोकी जाऊँगी
तुम तो फ़िर रहोगे महलो में
और मैं वनवास को जाऊँगी
000
नारी कहे
क्यों बनू मैं द्रोपदी
तुम धर्म-राज बनो या न बनो
मैं तो जुए में फ़िर हार दी जाऊँगी
तुम करोगे महाभारत सत्ता को
इसकी दोषी मैं रख दी जाऊँगी
000
नारी कहे
क्यों बनू मैं तारा
तुम हरिश्चंद बनो या न बनो
मैं तो नीच कहलादी जाऊँगी
मेरे बच्चे को मारोगे तुम
उसे जीवित कराने को मैं बुलाई जाऊँगी
000
नारी कहे
क्यों बनू मैं मीरा
तुम कान्हा बनो या न बनो
मेरी भक्ति तो फ़िर लज्जित की जायेगी
तुम को तो कुछ न होगा
और मैं विषपान को विवश की जाऊँगी
000
नारी कहे
क्यों बनू मैं अहिल्या
मैं तो फ़िर किसी इन्द्र के द्वारा छली जाऊँगी
और जीवन पत्थर बन राम की प्रतिक्षा में
बिताओंगी
000
नारी कहे ,
कोई बताय
क्यों बनू मैं आदर्श नारी
क्या कोई आदर्श पुरूष मैं पाऊँगी .........
Vikas jain

भोजन करने सम्बन्धी कुछ जरुरी नियम

1.पांच अंगों ( दो हाथ , २ पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करें !
2. गीले पैरों खाने से आयु में वृद्धि होती है !
3. प्रातः और सायं ही भोजन का विधान है ! क्योंकि पाचन क्रिया की जठराग्नि सूर्योदय से 2 घंटे बाद तक एवं सूर्यास्त से 2 : 3 0 घंटे पहले तक प्रबल रहती है।
4. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंह करके ही खाना चाहिए !
5. दक्षिण दिशा की ओर किया हुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है !
6 . पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है !
7. शैय्या पर , हाथ पर रख कर , टूटे फूटे बर्तनों में भोजन नहीं करना चाहिए !
8. मल मूत्र का वेग होने पर,कलह के माहौल में, अधिक शोर में, पीपल, वट वृक्ष के नीचे, भोजन नहीं करना चाहिए !
9 परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए !
10. खाने से पूर्व सभी भूखों को भोजन प्राप्त हो ऐसी प्राथना करके भोजन करना चाहिए !
11. भोजन बनाने वाला शुद्ध मन से रसोई में भोजन बनाये ।
12. इर्षा , भय , क्रोध, लोभ ,रोग , दीन भाव, द्वेष भाव,के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है !
13. भोजन के समय मौन रहे !
14. भोजन को बहुत चबा चबा कर खाए !
15. रात्री में न खाए !
16. गृहस्थ को 320 g से ज्यादा न खाना चाहिए !
17. सबसे पहले मीठा, फिर नमकीन, अंत में कडुवा खाना चाहिए !
18. सबसे पहले रस दार, बीच में गरिष्ठ, अंत में द्राव्य पदार्थ ग्रहण करे !
19. थोडा खाने वाले को -आरोग्य, आयु, बल, सुख और सौंदर्य प्राप्त होता है।
20. जिसने ढिढोरा पीट कर खिलाया हो वहा कभी न खाए !
21. कुत्ते का छुवा, बासी , अनादर युक्त , अवहेलना पूर्ण परोसा गया भोजन कभी न करे।
ये नियम आप जरुर अपनाये और फर्क देखें