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परम पूज्य मरुधरमणि उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. कर पत्र

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ब्रहमसर दादावाडी में 18-2 को सुबह दादा जिनकुशल गुरू मेला समारोहपूर्वक प्रारम्भ हुआ। प्रत्यक्ष प्रगट प्रभावी खरतरगच्छीय जैनाचार्य जिन कुशल सूरिजी महाराज की 682वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष में परम पूज्य वसीमालानी रत्न शिरोमणि मुनि मनोज्ञसागरजी म. व तपस्वी मुनि नयज्ञसागरजी म. व साध्वी डाॅ. लक्ष्यपूर्णाश्रीजी म. आदि ठाणा की पावन निश्रा में भव्य उल्लास पूर्वक संपन्न हुआ।

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धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि मनोज्ञसागरजी ने कहा कि दादा गुरुदेव यहां प्रत्यक्ष है। कुशलगुरुदेव के गुणों का स्मरण करते हुए कहा कि यहां का कण कण गुरुदेव की महिमा गा रहा है। यहां पर की गई भक्ति का फल अवष्य मिलता है।

Pranam Gurudev ।। स्वीकार करो दादा प्रणाम हमारा है ।।

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अरदास हमारी है
आधार तुम्हारा हैस्वीकार करो दादा
प्रणाम हमारा हैनैनो में रंगे हो तुम
मेरे दिल में बसे हो तुमअर्जी स्वीकार करो
भवसागर पार करो
फिर हाथ फिरा करके
मेरा उद्धार करोगिरते को उठाना तो
दादा काम तुम्हारा हैस्वीकार करो दादा
प्रणाम हमारा है
👏👏👏👏

Dada Gurudev ।।। दादा गुरुदेव का भजन  ।।।

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बोलिये दादा जिनकुशलसुरि गुरुदेव की जय
        ।।। दादा गुरुदेव का भजन  ।।।देराउर में स्वर्ग हुवो
वो मालपुरा में दर्श दियो....माँ जैसल थारो पूत कठे
वो कुशलसुरी गुरुदेव कठे
हो सिवाना में जन्म लियो, हो.....
वो मंत्रीश्वर रो लाल कठे
        माँ जैसल....मैं बांच्यो है इतिहासों में
मायड़ थे ऐडा पूत जणाया
थे नाम लजाओ नहीं थारो
कलयुग में थे अवतार हुआ
"छाजेड़" गौत्र उद्धार कियो हो....
वो कुशल सूरी गुरुदेव कठे
         माँ जैसल....वो धरती देराउर री
जहाँ गुरुदेव का स्वर्ग हुआ
एक भक्त री पुकार सुणी ने
वो मालपुरा धाम बना
हो अमावस री पूनम कीनी....हो....
वो कुशलसुरी गुरुदेव कठे।
      माँ जैसल थारो....

कई गुरुवर इस दुनिया में, सबके रूप सुहाने हैं, मालपुरा में जो सजकर बैठा, हम उसके दिवाने हैं।

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बोलिये दादा जिनकुशल गुरुदेव की जय

मालपुरा दादा गुरुदेव चरण के आज के दर्शन।।। आज 18 फ़रवरी को प्रगट प्रभावी चौरासी गच्छ श्रंगारहार जंगम युग प्रधान भटारक खरतरगच्छ चारित्र चूड़ामणि तीसरे दादा श्री जिन कुशलसूरीश्वर जी म.सा. की 682 वीं स्वर्गारोहण जयंती समारोह बड़े हर्षोउल्लास से मनाया जा रहा है । उनका संक्षिप्त परिचय-

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आज 18 फ़रवरी को प्रगट प्रभावी चौरासी गच्छ श्रंगारहार जंगम युग प्रधान भटारक खरतरगच्छ चारित्र चूड़ामणि तीसरे दादा श्री जिन कुशलसूरीश्वर जी म.सा. की 682 वीं स्वर्गारोहण जयंती समारोह बड़े हर्षोउल्लास सेमनाया जा रहा है । उनका संक्षिप्त परिचय-आपका जन्म राजस्थान के बाडमेर में गढ
सिवाना में विक्रम स्वंत्त 1337 में छाजेड गोत्र में हुवा , आपके बचपन का नाम करमन था ।
आप व्याकरण न्याय साहित्य अलंकार ज्योतिष मंत्र तंत्र चित्राकव्य समस्या पूर्ति और जैन दर्शन के अभूतपर्व विद्वान् थे ।आप भक्तों के रोम रोम में बसे हुवे हो जब भी भक्त आपको याद करते हैं ,आप तुरंत हाजिर हो जाते हो ,आपके राजस्थान में आज भी जयपुर में मालपुरा , जैसलमेर में बरमसर ,और बीकानेर में नाल दादावाडी हैं, जहा आपने अपने
भक्तो को देवलोक होने के बाद दर्शन दिए और
उनका मनोरथ पूरा किया ।
आपके चमत्कार अनगिनत हैं क्यों की आप सदैव भक्तो के लिए ही बने ,चाहे लुनिया जी श्रावक का आज के पाकिस्तान से अपनी बेटियों का शील बचाने के लिए बरमसर आना. एक शासन श्रावक भक्त को मालपुरा में साक्षात दर्शन देना करमचंद बछावत के मंत्री वरसिंह की प्रबल इच्छा का मान रखते …

Chennai me Diksha 25 April 2015 ko

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मुनिराज श्री मनोज्ञसागरजी म. जैसलमेर में गाजे-बाजे के साथ नगर प्रवेश जैन ट्रस्ट जैसलमेर व जैन श्री संघ की ओर से आज गड़ीसर चौराहे पर जैन मुनि पूज्य वसी मालाणी रत्न शिरोमणि ब्रहमसर तीर्थोद्धारक पू. मुनिराज श्री मनोज्ञसागरजी म.सा. एवं बालतपस्वी मुनि श्री नयज्ञसागरजी म.सा. का गाजे-बाजे के साथ स्वर्णनगरी में नगर प्रवेश करवाया। नाकोड़ा भवन में सभा भवन में मुनि मनोज्ञसागर जी म.सा. ने आए हुए सभी जैनधर्मावलम्बियों को संबोधित किया। आगामी भव्य दादा जिनकुशल गुरु मेला एवं तृतीय वार्षिक ध्वजारोहण महोत्सव दिनांक - 18 से 19 फरवरी तक ब्रहमसर तीर्थ में आयोजित होगा इस आयोजन को प.पू. मुनि श्री मनोज्ञसागर जी म.सा. अपनी निश्रा प्रदान करेंगे।

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आज १५ फरवरी २०१५ प.पू. गुरुदेव मुनि मनोज्ञसागर जी म.सा. ठाणा २ का जैसलमेर मे जैन श्री संघ व्दारा भव्य नगर परवेश करवाया गया...
16 फ़रवरी  शाम  को पू.गुरुदेव लौदरवा तीर्थ पधारेगें ता० १७ फरवरी को दोपहर तक गुरुदेव बरमसर गांव पधारेगें
१८ फरवरी को सुबह कुशल धाम बरमसर तीर्थ पधारेगें l

जहाज मंदिर वर्षगांठ संपन्न... श्री जिनकान्तिसागरसूरि स्मारक जहाज मंदिर की 16वीं वर्षगांठ पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री के शिष्य पूज्य मुनिराज श्री मनोज्ञसागरजी म. पू. मुनि श्री नयज्ञसागरजी म. की पावन निश्रा में ता. 2 फरवरी 2015 को मनाई गई। अठारह अभिषेक करवाये गये। सतरह भेदी पूजा पढाने के साथ शिखर पर ध्वजा चढाई गई। मुख्य ध्वजा के अमर लाभार्थी श्री पारसमलजी भानमलजी छाजेड परिवार की ओर से उनके परिवार ने ध्वजा चढाई। इस अवसर पर पूजनीया साध्वी श्री मुक्तिप्रियाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा का ट्रस्ट के आग्रह पर पदार्पण हुआ।

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जहाजमंदिरवर्षगांठसंपन्न... श्रीजिनकान्तिसागरसूरिस्मारकजहाजमंदिरकी 16वींवर्षगांठपूज्यगुरुदेवआचार्यश्रीकेशिष्यपूज्यमुनिराजश्रीमनोज्ञसागरजीम. पू. मुनिश्रीनयज्ञसागरजीम. कीपावननिश्रामेंमाघसुदि 14 सोमवारता. 2 फरवरी 2015 कोमनाईगई।अठारहअभिषेककरवायेगये।सतरहभेदीपूजापढानेकेसाथशिखरपरध्वजाचढाईगई।मुख्यध्वजाकेअमरलाभार्थीश्रीपारसमलजीभानमलजीछाजेडपरिवारकीओरसेउनकेपरिवारनेध्वजाचढाई।इसअवसरपरपूजनीयासाध्वीश्रीमुक्तिप्रियाश्रीजीम.सा. आदिठाणाकाट्रस्टकेआग्रहपर

साधु साध्वी समाचार...

0 पूज्यब्रह्मसरतीर्थोद्धारकमुनिश्रीमनोज्ञसागरजीम.सा. पूज्यमुनिश्रीनयज्ञसागरजीम.सा. अहमदाबादसेविहारकरडीसा, पांथावाडा, भीनमालहोतेहुएजहाजमंदिरमांडवलागुरुधामपधारे।ता. 2 फरवरीकोउनकीपावननिश्रामेंजहाजमंदिरकीवर्षगांठमनाईगई।वहाँसेवेविहारकरब्रह्मसरपधारेंगे। 0 पूज्यमुनिश्रीमुक्तिप्रभसागरजीम. मनीषप्रभसागरजीम.चौहटनउपधानकीसंपन्नताकेपश्चात्विहारकरजैसलमेर, अमरसागर, ब्रह्मसरआदितीर्थोंकीयात्राकरतेहुएलौद्रवपुरपधारे, जहाँउनकीनिश्रामें 26 जनवरीकोजीर्णोद्धारकृतदादावाडीकीप्रतिष्ठासंपन्नहुई।तत्पश्चात्वहाँसेपोकरणहोतेहुएफलोदीपधारे।वहाँउनकीनिश्रामें 11 फरवरीकोदादावाडीकीप्रतिष्ठासंपन्नहोगी। 0 पूज्यमुनिश्रीमयंकप्रभसागरजीम. मेहुलप्रभसागरजीम.सा. सूरतबडौदाहोतेहुएखंभातपधारे।खरतरगच्छकेआराध्यदेवश्रीस्तंभनपाश्र्वनाथपरमात्माकीयात्रासंपन्नकी।वहाँसेविहारकरता. 21 जनवरीको

तमिलनाडु प्रान्त के तिरूपुर नगर में श्री पाश्र्वनाथ परमात्मा के शिखरबद्ध मंदिर एवं दादावाडी की अंजनशलाका प्रतिष्ठा पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म.सा. एवं पू. छत्तीसगढ़ रत्ना महत्तरा साध्वी श्री मनोहरश्रीजी म.सा. की शिष्या पू. साध्वी श्री तरूणप्रभाश्रीजी म. तथा पू. साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी म. की शिष्या पू. साध्वी श्री मयूरप्रियाश्रीजी म., आदि साध्ाु-साध्वी मंडल की पावन निश्रा में ता. 26 जनवरी 2015 को अत्यन्त आनंद व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई।

तिरूपुरमेंदादावाडीकीप्रतिष्ठासंपन्न इसनगरमेंविहारकरतेहुए 15 वर्षपूर्वपध्ाारेपू. साध्वीश्रीहेमप्रभाश्रीजीम.सा. नेइसनगरमेंदादावाडीबनानेकीप्रेरणादी।संघकागठनहुआ।चारपांचवर्षश्रीमनोजकुमारजीहरणपध्ाारे।औरजिनमंदिरदादावाडीकाभूमिपूजन, खातमुहूर्त्तवशिलान्याससंपन्नहुआ। महोत्सवकाप्रारंभ 19 जनवरीकोकुंभस्थापनासेहुआ।ता. 23 जनवरीकोपूज्यगुरुभगवंतोंकामंगलप्रवेशहुआ।ता. 25 जनवरीकोभव्यातिभव्यशोभायात्राकाआयोजनश्रीसुवििध्ानाथमंदिरसेकियागया।समस्तजैनसमाजकेअलावातमिलसमाजकेलोगोंकासहयोगपूर्णरहा।

चेन्नई नगर में ता. 2 मई 2015 को वैराग्यवती कुमारी ममता बरडिया की भागवती दीक्षा पूज्य गुरुदेव उपाध्यायश्री मणिप्रभसागरजी म.सा. एवं पू. पाश्र्व मणि तीर्थ प्रेरिका साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी म. सुलक्षणाश्रीजी म. आदि की निश्रा में चूले में आयोजित होगी।

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चेन्नईमेंएकऔरदीक्षाहोगी चेन्नईनगरमेंता. 2 मई 2015 कोवैराग्यवतीकुमारीममताबरडियाकीभागवतीदीक्षापूज्यगुरुदेवउपाध्यायश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. एवंपू. पाश्र्वमणितीर्थप्रेरिकासाध्वीश्रीसुलोचनाश्रीजीम. सुलक्षणाश्रीजीम. आदिकीनिश्रामेंचूलेमेंआयोजितहोगी।यहज्ञातव्यहैकिकुमारीममताकीबडीबहिनपूजनीयासाध्वीश्रीसुलोचनाश्रीजीम.सा. केपासदीक्षितहै।

कोयम्बतूर में ता. 2 फरवरी को मंगल मुहूत्र्त में परमात्मा स्तंभन पाश्र्वनाथ, दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि, नाकोडा भैरव, घंटाकर्ण महावीर, श्री अंबिका देवी, श्री सरस्वती देवी, श्री काला गोरा भैरव, श्री पाश्र्व यक्ष एवं श्री पद्मावती देवी की प्रतिष्ठा की गई। मंदिर दादावाडी की प्रतिष्ठा संपन्न

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तमिलनाडुकेकोयम्बतूरनगरमेंश्रीझाबकपरिवारद्वारास्वद्रव्यसेनिर्मितश्रीस्तंभनपाश्र्वनाथजिनमंदिरएवंश्रीजिनदत्तसूरिदादावाडीकीअंजनशलाकाप्रतिष्ठापूज्यगुरुदेवउपाध्यायश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. पूज्यमुनिश्रीविरक्तप्रभसागरजीम.सा. एवंपूजनीयामहत्तरासाध्वीश्रीमनोहरश्रीजीम.सा. कीशिष्यापूजनीयासाध्वीश्रीतरूणप्रभाश्रीजीम.  एवंपूजनीयामहत्तराश्रीचंपाश्रीजीम. जितेन्द्रश्रीजीम. कीशिष्यापूजनीयासाध्वीश्रीविमलप्रभाश्रीजीम. आदिकेपावनसानिध्यमेंपरमभक्तिभावनाकेवातावरणमेंसंपन्नहुई। ता 2फरवरीकोमंगलमुहूत्र्तमेंपरमात्मास्तंभनपाश्र्वनाथ,दादागुरुदेवश्रीजिनदत्तसूरि,नाकोडाभैरव,घंटाकर्णमहावीर,श्रीअंबिकादेवी,श्रीसरस्वतीदेवी,

गलती निकालने की प्रवृत्ति रूग्ण मानसिकता का प्रतिबिम्ब है। और इसी से आदमी जीवन को दु:खमय बनाता है। अपने दोषों का अवलोकन करके सुध्ाारने का प्रयास करने में ही जीवन की सार्थकता है। और इसी से मन निर्विकार परमात्म स्वरूप का प्राप्त हो सकता है।

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नवप्रभात
0 उपाध्याय मणिप्रभसागरजी म.
एक कलाकार ने प्रतिमा का निर्माण किया था। प्रतिमा बहुत ही सुन्दर बनी थी। एक व्यक्ति बडे ध्यान से उस प्रतिमा का निरीक्षण कर रहा था।
कलाकार ने पूछा- कैसी बनी है प्रतिमा! कोई कमी तो नहीं रह गई है। आप जिस ढंग से प्रतिमा का अवलोकन कर रहे हैं, उससे ज्ञात होता है कि आप एक अनुभवी पारखी आदमी है। इस प्रतिमा के संदर्भ में कोई सुझाव हो तो बतायें।
उस व्यक्ति ने कहा- प्रतिमा तो बहुत सुन्दर बनी है। पर इसका दायां गाल थोडा ज्यादा उपसा हुआ है। थोडा कम करेंगे तो प्रतिमा सर्वथा निर्दोष हो जायेगी।