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PALITANA PARYUSHAN FESTIVAL 2015

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PALITANA PARYUSHAN FESTIVAL 2015 

4th Dada Gurudev Achary Jinchandrasuri... चौथे दादा गुरुदेव अकबर प्रतिबोधक श्री जिन चंद्रसूरिजी म. की जयंती पर विशेष आलेख

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चौथे दादा गुरुदेव अकबर प्रतिबोधक श्री जिन चंद्रसूरिजी म. की जयंती पर विशेष आलेख
जन-जन के ह्रदय में बसी हुई अहिंसा, करुणा और मैत्रीभाव को मानव ही नहीं पशु-पक्षीयो तक साकार रूप देने वाले, शिथीलाचार से व्यथित होकर शास्त्रविहित साध्वाचार परंपरा को क्रियोद्धार के द्वारा विकसित करने वाले, सम्राट अकबर को प्रतिबोध देकर धार्मिक दिवसों में सर्वत्र हिंसा निषेध के आदेश प्राप्त करने वाले गच्छनायक युगप्रधान श्री जिनचंद्रसुरीजी म. जैन धर्म के आकाश में भानु के समान हुए है। दादा गुरुदेवो में ये चौथे दादागुरु है। 

Purpose of Paryushan Parva

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Paryushan Parva is a spiritual-oriented festival and not a material-oriented one. It is an opportunity to fulfilling oneself with higher spiritual feelings to create global peace and harmony. The very idea of this festival is that if in any part of our life we feel a lack of any quality this is the good time to re-cultivate that quality in our life. We can say this is the time to shape our life in the direction of peace and harmony besides comfortable and fulfilling relationships. The required changing area of your life may be such as…

Meaning of Paryushan

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The word “Paryushan” has several different meanings:      Pari + ushan = all kinds + to burn = to burn (shed) our all types of karmas. To shed our karmas, we do twelve different types of austerities including fasting.      Another meaning of “ushan” is to stay closer. To stay closer to our own soul from all directions and to stay absorbed in our own-self (soul), we do Svadhyaya5 (self-study), meditation, austerities, etc. Pari + upshamana = upshamana means to suppress, to suppress our passions (kashayas – anger, ego, deceit and greed) from all directions.

Phalodi फलोदी में धर्म गंगा

परम पूज्य गणाधीश उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती मुनिराज श्री मुक्तिप्रभसागरजी म.सा. व मनीषप्रभसागरजी म.सा. का फलौदी में चातुर्मास धूम-धाम से चल रहा है। चातुर्मासिक आराधना का दौर व जिनवाणी की साधना सानन्द चल रही है। आराधना के दौरान तपस्या की धारा अविरल बह रही है। तपस्या में नौ उपवास, तेले, शासन चक्र तप एवं प्रत्येक रविवार को एकासनें, अक्षयनिधि तप आदि तपस्याएं हो रही है। पूज्यश्री की निश्रा में प्रत्येक रविवार को शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में बालकों को प्रभु पुजा, नव तत्त्व, कर्म मीमांसा आदि का ज्ञान देकर संस्कारित किया जा रहा है। पूज्य श्री मनीषप्रभसागर जी म.सा. द्वारा सशक्त उदाहरणों के माध्यम से जीवन जीने की कला के आदर्श प्रस्तुत किये जाते है जिनकी अनुपालना से बालकों का जीवन ज्ञान की खुश्बु से सुंगधित हो ही रहा है।

Mumbai मुम्बई में ‘अमावस को चांद उगायो’ नाटिका का आयोजन

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श्री शांतिनाथ मंदिर, विल्सन गली, मुम्बई स्थित श्री खरतरगच्छ संघ सांचोर के तत्वावधान में पूज्या साध्वीवर्या हेमरत्नाश्रीजी म. व जयरत्नाश्रीजी म. के सानिध्य एवं पूज्या साध्वी नूतनप्रियाश्रीजी म. के निर्देशन में दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरीश्वरजी म. एवं दादा गुरुदेव श्री जिनचंद्रसूरीश्वरजी म. के जीवन पर आधारित भव्य नाटिका का आयोजन दि. 6 सितम्बर 2015 को किया गया है।
‘अमावस को चांद उगायो’ नाटिका में हृदय की गहराइयों तक स्पर्श करने वाले कई भावुक दृश्यों का संयोजन व संचालन सौ. प्रेमलता ललवाणी अथक प्रयासों से कर रही है।

यह नाटिका दि. 6 सितम्बर 2015 को दोपहर दो बजे माननीय विधायक श्री मंगलप्रभातजी लोढा एवं नगर सेवक श्री शांतिलालजी दोशी के आतिथ्य में मुम्बई गिरगांव के प्रसिद्ध मुम्बई मरा़ठी साहित्य संघ सभागार में आयोजित होगी।
नाटिका का सम्पूर्ण लाभ लिया है दादा गुरु भक्त बोथरा बाबुलालजी धर्माजी कानुंगो, सांचोर-मुम्बई ने। श्री संघ की ओर से सभी को पधारने का हार्दिक निवेदन है।
संपर्क- 66109406