Feb 20, 2015

परम पूज्य मरुधरमणि उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. कर पत्र

ब्रहमसर दादावाडी में 18-2 को सुबह दादा जिनकुशल गुरू मेला समारोहपूर्वक प्रारम्भ हुआ। प्रत्यक्ष प्रगट प्रभावी खरतरगच्छीय जैनाचार्य जिन कुशल सूरिजी महाराज की 682वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष में परम पूज्य वसीमालानी रत्न शिरोमणि मुनि मनोज्ञसागरजी म. व तपस्वी मुनि नयज्ञसागरजी म. व साध्वी डाॅ. लक्ष्यपूर्णाश्रीजी म. आदि ठाणा की पावन निश्रा में भव्य उल्लास पूर्वक संपन्न हुआ।

धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि मनोज्ञसागरजी ने कहा कि दादा गुरुदेव यहां प्रत्यक्ष है। कुशलगुरुदेव के गुणों का स्मरण करते हुए कहा कि यहां का कण कण गुरुदेव की महिमा गा रहा है। यहां पर की गई भक्ति का फल अवष्य मिलता है।

Feb 18, 2015

Pranam Gurudev ।। स्वीकार करो दादा प्रणाम हमारा है ।।

अरदास हमारी है
आधार तुम्हारा है

स्वीकार करो दादा
प्रणाम हमारा है

नैनो में रंगे हो तुम
मेरे दिल में बसे हो तुम

अर्जी स्वीकार करो
भवसागर पार करो
फिर हाथ फिरा करके
मेरा उद्धार करो

गिरते को उठाना तो
दादा काम तुम्हारा है

स्वीकार करो दादा
प्रणाम हमारा है
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Dada Gurudev ।।। दादा गुरुदेव का भजन  ।।।

बोलिये दादा जिनकुशलसुरि गुरुदेव की जय
        ।।। दादा गुरुदेव का भजन  ।।।

देराउर में स्वर्ग हुवो
वो मालपुरा में दर्श दियो....

माँ जैसल थारो पूत कठे
वो कुशलसुरी गुरुदेव कठे
हो सिवाना में जन्म लियो, हो.....
वो मंत्रीश्वर रो लाल कठे
        माँ जैसल....

मैं बांच्यो है इतिहासों में
मायड़ थे ऐडा पूत जणाया
थे नाम लजाओ नहीं थारो
कलयुग में थे अवतार हुआ
"छाजेड़" गौत्र उद्धार कियो हो....
वो कुशल सूरी गुरुदेव कठे
         माँ जैसल....

वो धरती देराउर री
जहाँ गुरुदेव का स्वर्ग हुआ
एक भक्त री पुकार सुणी ने
वो मालपुरा धाम बना
हो अमावस री पूनम कीनी....हो....
वो कुशलसुरी गुरुदेव कठे।
      माँ जैसल थारो....

कई गुरुवर इस दुनिया में, सबके रूप सुहाने हैं, मालपुरा में जो सजकर बैठा, हम उसके दिवाने हैं।

बोलिये दादा जिनकुशल गुरुदेव की जय

Feb 17, 2015

मालपुरा दादा गुरुदेव चरण के आज के दर्शन।।। आज 18 फ़रवरी को प्रगट प्रभावी चौरासी गच्छ श्रंगारहार जंगम युग प्रधान भटारक खरतरगच्छ चारित्र चूड़ामणि तीसरे दादा श्री जिन कुशलसूरीश्वर जी म.सा. की 682 वीं स्वर्गारोहण जयंती समारोह बड़े हर्षोउल्लास से मनाया जा रहा है । उनका संक्षिप्त परिचय-

आज 18 फ़रवरी को प्रगट प्रभावी चौरासी गच्छ श्रंगारहार जंगम युग प्रधान भटारक खरतरगच्छ चारित्र चूड़ामणि तीसरे दादा श्री जिन कुशलसूरीश्वर जी म.सा. की 682 वीं स्वर्गारोहण जयंती समारोह बड़े हर्षोउल्लास से मनाया जा रहा है । उनका संक्षिप्त परिचय-

आपका जन्म राजस्थान के बाडमेर में गढ
सिवाना में विक्रम स्वंत्त 1337 में छाजेड गोत्र में हुवा , आपके बचपन का नाम करमन था ।
आप व्याकरण न्याय साहित्य अलंकार ज्योतिष मंत्र तंत्र चित्राकव्य समस्या पूर्ति और जैन दर्शन के अभूतपर्व विद्वान् थे ।

आप भक्तों के रोम रोम में बसे हुवे हो जब भी भक्त आपको याद करते हैं ,आप तुरंत हाजिर हो जाते हो ,आपके राजस्थान में आज भी जयपुर में मालपुरा , जैसलमेर में बरमसर ,और बीकानेर में नाल दादावाडी हैं, जहा आपने अपने
भक्तो को देवलोक होने के बाद दर्शन दिए और
उनका मनोरथ पूरा किया ।
आपके चमत्कार अनगिनत हैं क्यों की आप सदैव भक्तो के लिए ही बने ,चाहे लुनिया जी श्रावक का आज के पाकिस्तान से अपनी बेटियों का शील बचाने के लिए बरमसर आना. एक शासन श्रावक भक्त को मालपुरा में साक्षात दर्शन देना करमचंद बछावत के मंत्री वरसिंह की प्रबल इच्छा का मान रखते हुवे नाल बीकानेर में साक्षात दर्शन देकर उनका मनोरथ सिद्ध किया और शासन की प्रभावना की ।

आपने 42 साल तक शासन की सुन्दर
प्रभावना की कितनो को तारा और कितने के
आप आँखों के हीरे बने और कितने अजैनों को जिन शासन से जोड़कर आपने 50000 के करीबन नूतन जैन बनाये ।
आपका स्वर्गवास देराउर जो आज पाकिस्तान में है वहा फाल्गुन वदि अमावश्या को रात्रि दो प्रहर बीतने पर इस असार संसार को त्याग कर स्वर्गीय देवो की पंक्ति में अपना आसन जमाया।
75 मंडपिकावो से युक्त निर्वाण यात्रा निकाली गई दाह संस्कार किया गया उनके संस्कार धाम पर रिहड़ गोत्र सेठ पूर्णचन्द्र के पुत्र हरिपाल श्रावक् ने अपने परिवार के साथ सुन्दर स्तूप का निर्माण करवाया ।
ऐसे थे मेरे गुरुदेव साक्षात् गुरुदेव हाजर हुजुर गुरुदेव जिनके नाम स्मरण मात्र से आदि व्याधि सब दूर होकर एक नया जीवन मिलता हे
जैसलमेर के ब्रह्मसर में और जयपुर के मालपुरा में दादा श्री जिन कुशल सूरी जी ने जिस सिला ( पाषाण) पर साक्षात दर्शन दिए उस पर उनके पदचिन्ह अंकित हो गए और वो आज भी वहा मोजूद हे आप उनके दर्शन वंदन का लाभ के सकते हे यही तो सच्ची श्रधा का प्रतीक हे
बस इस आशा के साथ .....
जय दादा जिन कुशल गुरुदेव

Feb 15, 2015

Chennai me Diksha 25 April 2015 ko




मुनिराज श्री मनोज्ञसागरजी म. जैसलमेर में गाजे-बाजे के साथ नगर प्रवेश जैन ट्रस्ट जैसलमेर व जैन श्री संघ की ओर से आज गड़ीसर चौराहे पर जैन मुनि पूज्य वसी मालाणी रत्न शिरोमणि ब्रहमसर तीर्थोद्धारक पू. मुनिराज श्री मनोज्ञसागरजी म.सा. एवं बालतपस्वी मुनि श्री नयज्ञसागरजी म.सा. का गाजे-बाजे के साथ स्वर्णनगरी में नगर प्रवेश करवाया। नाकोड़ा भवन में सभा भवन में मुनि मनोज्ञसागर जी म.सा. ने आए हुए सभी जैनधर्मावलम्बियों को संबोधित किया। आगामी भव्य दादा जिनकुशल गुरु मेला एवं तृतीय वार्षिक ध्वजारोहण महोत्सव दिनांक - 18 से 19 फरवरी तक ब्रहमसर तीर्थ में आयोजित होगा इस आयोजन को प.पू. मुनि श्री मनोज्ञसागर जी म.सा. अपनी निश्रा प्रदान करेंगे।



आज १५ फरवरी २०१५ प.पू. गुरुदेव मुनि मनोज्ञसागर जी म.सा. ठाणा २ का जैसलमेर मे जैन श्री संघ व्दारा भव्य नगर परवेश करवाया गया...
16 फ़रवरी  शाम  को पू.गुरुदेव लौदरवा तीर्थ पधारेगें ता० १७ फरवरी को दोपहर तक गुरुदेव बरमसर गांव पधारेगें
१८ फरवरी को सुबह कुशल धाम बरमसर तीर्थ पधारेगें l
shree Manogyasagar ji ms

Feb 7, 2015

जहाज मंदिर वर्षगांठ संपन्न... श्री जिनकान्तिसागरसूरि स्मारक जहाज मंदिर की 16वीं वर्षगांठ पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री के शिष्य पूज्य मुनिराज श्री मनोज्ञसागरजी म. पू. मुनि श्री नयज्ञसागरजी म. की पावन निश्रा में ता. 2 फरवरी 2015 को मनाई गई। अठारह अभिषेक करवाये गये। सतरह भेदी पूजा पढाने के साथ शिखर पर ध्वजा चढाई गई। मुख्य ध्वजा के अमर लाभार्थी श्री पारसमलजी भानमलजी छाजेड परिवार की ओर से उनके परिवार ने ध्वजा चढाई। इस अवसर पर पूजनीया साध्वी श्री मुक्तिप्रियाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा का ट्रस्ट के आग्रह पर पदार्पण हुआ।

जहाज मंदिर वर्षगांठ संपन्न... श्री जिनकान्तिसागरसूरि स्मारक जहाज मंदिर की 16वीं वर्षगांठ पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री के शिष्य पूज्य मुनिराज श्री मनोज्ञसागरजी . पू. मुनि श्री नयज्ञसागरजी . की पावन निश्रा में माघ सुदि 14 सोमवार ता. 2 फरवरी 2015 को मनाई गई। अठारह अभिषेक करवाये गये। सतरह भेदी पूजा पढाने के साथ शिखर पर ध्वजा चढाई गई। मुख्य ध्वजा के अमर लाभार्थी श्री पारसमलजी भानमलजी छाजेड परिवार की ओर से उनके परिवार ने ध्वजा चढाई। इस अवसर पर पूजनीया साध्वी श्री मुक्तिप्रियाश्रीजी .सा. आदि ठाणा का ट्रस्ट के आग्रह पर पदार्पण हुआ।

साधु साध्वी समाचार...

0 पूज्य ब्रह्मसर तीर्थोद्धारक मुनि श्री मनोज्ञसागरजी .सा. पूज्य मुनि श्री नयज्ञसागरजी .सा. अहमदाबाद से विहार कर डीसा, पांथावाडा, भीनमाल होते हुए जहाज मंदिर मांडवला गुरु धाम पधारे। ता. 2 फरवरी को उनकी पावन निश्रा में जहाज मंदिर की वर्षगांठ मनाई गई। वहाँ से वे विहार कर ब्रह्मसर पधारेंगे।
0 पूज्य मुनि श्री मुक्तिप्रभसागरजी . मनीषप्रभसागरजी . चौहटन उपधान की संपन्नता के पश्चात् विहार कर जैसलमेर, अमरसागर, ब्रह्मसर आदि तीर्थों की यात्रा करते हुए लौद्रवपुर पधारे, जहाँ उनकी निश्रा में 26 जनवरी को जीर्णोद्धार कृत दादावाडी की प्रतिष्ठा संपन्न हुई। तत्पश्चात् वहाँ से पोकरण होते हुए फलोदी पधारे वहाँ उनकी निश्रा में 11 फरवरी को दादावाडी की प्रतिष्ठा संपन्न होगी।
0 पूज्य मुनि श्री मयंकप्रभसागरजी . मेहुलप्रभसागरजी . सा. सूरत बडौदा होते हुए खंभात पधारे। खरतरगच्छ के आराध्य देव श्री स्तंभन पाश्र्वनाथ परमात्मा की यात्रा संपन्न की। वहाँ से विहार कर ता. 21 जनवरी को पालीताना पधार गये हैं। वहाँ व्याकरण, न्याय का अध्ययन प्रारंभ है। आगामी चातुर्मास पालीताना में होगा।

तमिलनाडु प्रान्त के तिरूपुर नगर में श्री पाश्र्वनाथ परमात्मा के शिखरबद्ध मंदिर एवं दादावाडी की अंजनशलाका प्रतिष्ठा पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म.सा. एवं पू. छत्तीसगढ़ रत्ना महत्तरा साध्वी श्री मनोहरश्रीजी म.सा. की शिष्या पू. साध्वी श्री तरूणप्रभाश्रीजी म. तथा पू. साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी म. की शिष्या पू. साध्वी श्री मयूरप्रियाश्रीजी म., आदि साध्ाु-साध्वी मंडल की पावन निश्रा में ता. 26 जनवरी 2015 को अत्यन्त आनंद व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई।

तिरूपुर में दादावाडी की प्रतिष्ठा संपन्न
इस नगर में विहार करते हुए 15 वर्ष पूर्व पध्ाारे पू. साध्वी श्री हेमप्रभाश्रीजी .सा. ने इस नगर में दादावाडी बनाने की प्रेरणा दी। संघ का गठन हुआ। चार पांच वर्ष श्री मनोजकुमारजी हरण पध्ाारे। और जिन मंदिर दादावाडी का भूमिपूजन, खात मुहूर्त्त शिलान्यास संपन्न हुआ। 
महोत्सव का प्रारंभ 19 जनवरी को कुंभ स्थापना से हुआ। ता. 23 जनवरी को पूज्य गुरु भगवंतों का मंगल प्रवेश हुआ। ता. 25 जनवरी को भव्यातिभव्य शोभायात्रा का आयोजन श्री सुवििध्ानाथ मंदिर से किया गया। समस्त जैन समाज के अलावा तमिल समाज के लोगों का सहयोग पूर्ण रहा।

चेन्नई नगर में ता. 2 मई 2015 को वैराग्यवती कुमारी ममता बरडिया की भागवती दीक्षा पूज्य गुरुदेव उपाध्यायश्री मणिप्रभसागरजी म.सा. एवं पू. पाश्र्व मणि तीर्थ प्रेरिका साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी म. सुलक्षणाश्रीजी म. आदि की निश्रा में चूले में आयोजित होगी।

चेन्नई में एक और दीक्षा होगी

चेन्नई नगर में ता. 2 मई 2015 को वैराग्यवती कुमारी ममता बरडिया की भागवती दीक्षा पूज्य गुरुदेव उपाध्यायश्री मणिप्रभसागरजी .सा. एवं पू. पाश्र्व मणि तीर्थ प्रेरिका साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी . सुलक्षणाश्रीजी . आदि की निश्रा में चूले में आयोजित होगी।यह ज्ञातव्य है कि कुमारी ममता की बडी बहिन पूजनीया साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी .सा. के पास दीक्षित है।

कोयम्बतूर में ता. 2 फरवरी को मंगल मुहूत्र्त में परमात्मा स्तंभन पाश्र्वनाथ, दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि, नाकोडा भैरव, घंटाकर्ण महावीर, श्री अंबिका देवी, श्री सरस्वती देवी, श्री काला गोरा भैरव, श्री पाश्र्व यक्ष एवं श्री पद्मावती देवी की प्रतिष्ठा की गई। मंदिर दादावाडी की प्रतिष्ठा संपन्न

तमिलनाडु के कोयम्बतूर नगर में श्री झाबक परिवार द्वारा स्वद्रव्य से निर्मित श्री स्तंभन पाश्र्वनाथ जिन मंदिर एवं श्री जिनदत्तसूरि दादावाडी की अंजनशलाका प्रतिष्ठा पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी .सा. पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी .सा. एवं पूजनीया महत्तरा साध्वी श्री मनोहरश्रीजी .सा. की शिष्या पूजनीया साध्वी श्री तरूणप्रभाश्रीजी .  एवं पूजनीया महत्तरा श्री चंपाश्रीजी . जितेन्द्रश्रीजी . की शिष्या पूजनीया साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी . आदि के पावन सानिध्य में परम भक्ति भावना के वातावरण में संपन्न हुई।  ता 2 फरवरी को मंगल मुहूत्र्त में परमात्मा स्तंभन पाश्र्वनाथ, दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि, नाकोडा भैरव, घंटाकर्ण महावीर, श्री अंबिका देवी, श्री सरस्वती देवी, श्री काला गोरा भैरव, श्री पाश्र्व यक्ष एवं श्री पद्मावती देवी की प्रतिष्ठा की गई।


Feb 5, 2015

गलती निकालने की प्रवृत्ति रूग्ण मानसिकता का प्रतिबिम्ब है। और इसी से आदमी जीवन को दु:खमय बनाता है। अपने दोषों का अवलोकन करके सुध्ाारने का प्रयास करने में ही जीवन की सार्थकता है। और इसी से मन निर्विकार परमात्म स्वरूप का प्राप्त हो सकता है।

नवप्रभात
0 उपाध्याय मणिप्रभसागरजी म.
एक कलाकार ने प्रतिमा का निर्माण किया था। प्रतिमा बहुत ही सुन्दर बनी थी। एक व्यक्ति बडे ध्यान से उस प्रतिमा का निरीक्षण कर रहा था।
कलाकार ने पूछा- कैसी बनी है प्रतिमा! कोई कमी तो नहीं रह गई है। आप जिस ढंग से प्रतिमा का अवलोकन कर रहे हैं, उससे ज्ञात होता है कि आप एक अनुभवी पारखी आदमी है। इस प्रतिमा के संदर्भ में कोई सुझाव हो तो बतायें।
उस व्यक्ति ने कहा- प्रतिमा तो बहुत सुन्दर बनी है। पर इसका दायां गाल थोडा ज्यादा उपसा हुआ है। थोडा कम करेंगे तो प्रतिमा सर्वथा निर्दोष हो जायेगी।