May 10, 2015

पूज्य मुनिराज श्री मुक्तिप्रभसागरजी म.सा. एवं पूज्य मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी म.सा. का आगामी चातुर्मास जोधपुर जिले के फलोदी नगर में निश्चित किया गया है। चातुर्मास प्रवेश दि. 22 जुुलाई 2015 को होगा। आप सभी को सादर आमन्त्रण

पूज्य गुरुदेव आचार्य देव श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य प्रशिष्य पूज्य मुनिराज श्री मुक्तिप्रभसागरजी म.सा. एवं पूज्य मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी म.सा. का आगामी चातुर्मास जोधपुर जिले के फलोदी नगर में निश्चित किया गया है।
 श्री संघ फलोदी ने चैन्नाई के धर्मनाथ मंदिर की प्रतिष्ठा समारोह में बिराजमान पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. से फलोदी नगर में चातुर्मास कराने की भावभरी विनंती की, जिसे स्वीकार कर चातुर्मास की जय बोलाई गई।
श्री संघ, फलोदी में चातुर्मास निर्णय से अत्यन्त आनंद व उल्लास छा गया है तथा चातुर्मास को ऐतिहासिक बनाने की तैयारियों में जुट गया है।
चातुर्मास प्रवेश दि. 22 जुुलाई 2015 को होगा।
ज्ञातव्य है कि पूज्य मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी म. का उनके सांसारिक गृह-नगर में दीक्षा के बाद यह प्रथम चातुर्मास हो रहा है।

हुबली दादावाडी में वर्षीतप पारणा संपन्न

श्री आदिनाथ जिन मंदिर एवं श्री जिनकुशलसूरि दादावाडी हुबली के तत्वावधन में वर्षीतप पारणा के उपलक्ष में रत्नत्रयी महोत्सव का आयोजन किया गया। दादावाडी प्रेरिका मारवाड ज्योति श्री सूर्यप्रभाश्रीजी म. सा. एवं स्नेह सुरभि श्री पूर्णप्रभाश्रीजी म. सा. आदि ठाणा की निश्रा में शिष्या साध्वी श्री मनोरमा श्रीजी एवं श्रेयनंदिता श्री के लगातार दूसरे वर्षीतप के पारणे के उपलक्ष में दि 19.4.15 से 21.4.15 तीन दिवस का महोत्सव आयोजित किया गया। तपस्वी साध्वी के साथ साथ अन्य 13 तपस्वियों का भी पारणा दादावाडी में हुआ।

चातुर्मास निर्णय

चातुर्मास निर्णय
पू. उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. ठाणा 6     रायपुर
पू. मुनि श्री मनोज्ञसागरजी म. ठाणा 2    बीकानेर
पू. मुनि श्री मुक्तिप्रभसागरजी म. मनीषप्रभसागरजी म. 2 फलोदी
पू. प्रवर्तिनी श्री कीर्तिप्रभाश्रीजी म. ठाणा 4 बडौदा
पू. साध्वी श्री दिव्यप्रभाश्रीजी म. ठाणा 4   पालीताना
पू. साध्वी श्री तरूणप्रभाश्रीजी म. ठाणा 4   तिरूच्चिरापल्ली
पू. साध्वी श्री मनोरंजनाश्रीजी म. शुभंकराश्रीजी म. 8     शिवपुरी
पू. साध्वी श्री सूर्यप्रभाश्रीजी म. पूर्णप्रभाश्रीजी म. आदि    हाँस्पेट
पू. साध्वी श्री मणिप्रभाश्रीजी म. आदि     रतलाम
पू. साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी म. ठाणा 11  सोलापुर
पू. साध्वी श्री सुलक्षणाश्रीजी म. ठाणा 4    बाडमेर
पू. माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म.
पू. बहिन म. डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. आदि    रायपुर
पू. साध्वी श्री सम्यक्दर्शनाश्रीजी म. आदि   बैंगलोर
पू. साध्वी श्री मंजुलाश्रीजी म. आदि कटंगी
पू. साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी म. आदि    चेन्नई धर्मनाथ मंदिर
पू. साध्वी श्री कल्पलताश्रीजी म. आदि     गांधीधाम
पू. साध्वी श्री लयस्मिताश्रीजी म. आदि    सांचोर
पू. साध्वी श्री शुद्धांजनाश्रीजी म. आदि      नागोर
पू. साध्वी श्री श्रद्धांजनाश्रीजी म. आदि  उदयपुर सूरजपोल दादावाडी
पू. साध्वी श्री विराग-विश्वज्योतिश्रीजी म. आदि    चेन्नई धोबीपेठ
पू. साध्वी श्री प्रियस्मिताश्रीजी म. ठाणा जालना
पू. साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजनाश्रीजी म. ठाणा 3 तिरूपातूर
पू. साध्वी श्री स्नेहयशाश्रीजी म. आदि     जोधपुर
पू. साध्वी श्री हेमरत्नाश्रीजी म. आदि      मुंबई विल्सन स्ट्रीट
पू. साध्वी श्री लक्ष्यपूर्णाश्रीजी म. ठाणा     चौहटन
पू. साध्वी श्री संघमित्राश्रीजी म. ठाणा     मांडवी
पू. साध्वी श्री प्रियसौम्यांजनाश्रीजी म. ठाणा 4  अंजार कच्छ
पू. साध्वी श्री सुरेखाश्रीजी म. आदि  इन्दौर
पू. साध्वी श्री मृगावतीश्रीजी म. ठाणा 3    मालेगांव
पू. साध्वी श्री अभ्युदयाश्रीजी म. ठाणा 3   शाजापुर
पू. साध्वी श्री प्रियंकराश्रीजी म. ठाणा 4    बडी सिवनी

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वडपलनी Chennai T.N. में परिकर प्रतिष्ठा संपन्न


परम पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरूष आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. आदि ठाणा 6 की पावन निश्रा एवं पू. साध्वी श्री सुमित्राश्रीजी म., पू. साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी म., पू. साध्वी श्री सम्यक्दर्शनाश्रीजी म., पू. साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी म., पू. साध्वी श्री विराग-विश्वज्योतिश्रीजी म. आदि ठाणा की पावन निश्रा में वडपलनी श्री संभवनाथ मंदिर में उफपर तल पर शिखर में बने मंदिर में परिकर की प्रतिष्ठा संपन्न हुई
प्रतिष्ठा का लाभ श्री पदमकुमारजी प्रवीणकुमारजी टाटिया परिवार तिवरी वालों ने लिया। नौकारसी का लाभ श्री वीरेन्द्रमलजी आशिषकुमारजी कोचर मेहता परिवार जैतारण वालों ने लिया।

प्रतिष्ठा के लिये पूज्यश्री ने चूले से विहार कर दादावाडी होते हुए ता. 4 को प्रात: वडपलनी पधारे। पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म.सा. का प्रभावशाली प्रवचन हुआ। तत्पश्चात् विधि विधान के साथ प्रतिष्ठा संपन्न हुई।

चेन्नई महानगर के शूले उपनगर में कुमारी ममता बरडिया की भागवती दीक्षा ता. 2 मई 2015 को पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. आदि मुनि मंडल एवं पूजनीया साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी म.सा. की पावन निश्रा में अत्यन्त उत्साह व उल्लास के साथ संपन्न हुई।

ता. 1 मई को वर्षीदान का वरघोडा निकाला गया। वरघोडे के बाद अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें सभी साधु साध्वीजी महाराज के प्रवचन हुए। पू. साध्वी श्री सुमित्राश्रीजी म.पू. साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी म.पू. साध्वी श्री सम्यक्दर्शनाश्रीजी म.पू. साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी म.पू. साध्वी श्री विराग-विश्वज्योतिश्रीजी म. आदि ने अपने भाव व्यक्त करते हुए मुमुक्षु ममता को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

‘दादावाडी दर्शनम्’ ग्रन्थ का विमोचन हुआ... इस ग्रन्थ में तमिलनाडु, कर्णाटक, केरल, आन्ध्र प्रदेश व महाराष्ट्र प्रान्त की समस्त दादावाडियों का पूरा सचित्र इतिहास प्रकाशित किया गया है। यह प्रोजेक्ट श्री जिनकान्तिसागरसूरि स्मारक ट्रस्ट जहाज मंदिर द्वारा सन् 2007 में प्रारंभ किया गया था। इस कार्य में श्री कान्तिलालजी रांका, श्री भंवरलालजी संखलेचा का बहुत योगदान रहा। कैलाश बी. संखलेचा ने इस प्रकाशन के लिये पूरी मेहनत की।

 ता. 25 अप्रेल को भागवती दीक्षा समारोह में पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. आदि विशाल साध्ु साध्वी समुदाय की पावन सानिध्यता में दादावाडी दर्शनम् ग्रन्थ का विमोचन संपन्न हुआ। विमोचन का लाभ श्री समरथमलजी सोनाजी रांका परिवार के भागचंदजी उत्तमचंदजी भूपेश रांका परिवार गोल उम्मेदाबाद वालों ने लिया।
इस ग्रन्थ में तमिलनाडु, कर्णाटक, केरल, आन्ध्र प्रदेश व महाराष्ट्र प्रान्त की समस्त दादावाडियों का पूरा सचित्र इतिहास प्रकाशित किया गया है। यह प्रोजेक्ट श्री जिनकान्तिसागरसूरि स्मारक ट्रस्ट जहाज मंदिर द्वारा सन् 2007 में प्रारंभ किया गया था। इस कार्य में श्री कान्तिलालजी रांका, श्री भंवरलालजी संखलेचा का बहुत योगदान रहा। कैलाश बी. संखलेचा ने इस प्रकाशन के लिये पूरी मेहनत की।


इस ग्रन्थ का लेखन पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म. व साध्वी डाँ. श्री नीलांजनाश्रीजी म. द्वारा किया गया है। इसकी इतिहास सामग्री एकत्र करने में नवकार प्रिण्टर्स के श्री नीलेशजी जैन, भूपतजी चौपडा पचपदरा वालों ने मेहनत की थी।

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चेन्नई में भागवती दीक्षा का कीर्तिमान स्थापित हुआ


 

 मूल नागोर निवासी श्री योगेशकुमारजी सेठिया की धर्मपत्नी श्रीमती जयादेवी सेठिया एवं उनके सुपुत्र श्री संयमकुमार सेठिया की भागवती दीक्षा ता. 25 अप्रेल 2015 को ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुई। ऐसी दीक्षा चेन्नई में पहली बार हुई। दीक्षा समारोह का प्रारंभ प्रात: 9 बजे से हुआ जो मध्याह्न 3.30 बजे तक चला। लगभग 15 से 20 हजार लोगों की विशाल उपस्थिति दीक्षा विधान के अंतिम समय तक बनी रही। यह अपने आप में एक कीर्तिमान था।
ता. 23 अप्रेल को मुमुक्षु संयम व जया देवी का डोराबंधन हुआ। धर्मनाथ मंदिर उपाश्रय पूरा ठसाठस भरा हुआ था। पूरा चेन्नई संघ मुमुक्षु संयम व जयादेवी का अभिनंदन कर रहा था। ता. 23 की रात को विदाई समारोह का संवेदना भरा कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुंबई से पधारे संजय भाउ ने संवेदना से परिपूर्ण सुन्दर कार्यक्रम प्रस्तुत किया। ता. 24 को भव्य शोभायात्रा का आयोजन हुआ। ऐसी विशाल शोभायात्रा... हजारों लोगों की उपस्थिति... अनुशासित वातावरण... संभवत: चेन्नई नगर में पहली बार देखा गया, ऐसा बडे बूढे लोगों का कहना रहा।

गांधीधाम में श्री सीमंधरस्वामी जिनालय व दादावाडी का ध्वजा महोत्सव

गांधीधाम । प.पू. उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. के निश्रावर्ती प.पू. मुक्तिप्रभसागरजी म.सा. एवं प.पू. मनीषप्रभसागरजी म.सा. तथा पाश्र्वमणि तीर्थ उद्धारिका प.पू. सुलोचनाश्रीजी म.सा. की सुशिष्या प.पू. प्रियसौम्यांजनाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में श्री सीमंधरस्वामी जिनालय एवं जिनकुशलसूरि दादावाडी का 12वां ध्वजा महोत्सव चतुर्विध संघ द्वारा बडे धूमधाम से वैशाख सुद 4 ता. 22.4.2015 को मनाया गया।

श्री धर्मनाथ जिन मंदिर प्रतिष्ठा समारोह की भव्यता


 हमारा संघ प्रतिष्ठा की विनंती लेकर पूज्यश्री की सेवा में इचलकरंजी पहुँचा। पूज्यश्री से 26 अप्रेल का मुहूत्र्त प्राप्त कर संघ में खुशियों का वातावरण छा गया। कार्यकत्र्ता तैयारी में जुट गये।
पूज्यश्री इचलकरंजी से विहार कर हुबली में प्रतिष्ठा व दीक्षा, बल्लारी में दीक्षा, ईरोड, तिरूपुर, कोयम्बतूर, कन्याकुमारी आदि प्रतिष्ठाऐं संपन्न करवाकर चेन्नई महानगर पधारे। ता. 11 अप्रेल को वडपलनी में पूज्यश्री का महानगर प्रवेश संपन्न हुआ। जहाँ उनकी निश्रा में मुमुक्षु जया सेठिया एवं संयम सेठिया का अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। वर्षीदान का वरघोडा निकाला गया।

चेन्नई में प्रतिष्ठा दीक्षा महोत्सव : हुआ इतिहास का निर्माण,,,, श्री धर्मनाथ जिन मंदिर का इतिहास

चेन्नई में प्रतिष्ठा दीक्षा महोत्सव : हुआ इतिहास का निर्माण



परम पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरूष आचार्य देव श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. आदि मुनि मण्डल एवं पू. छत्तीसगढ रत्ना महत्तरा श्री मनोहरश्रीजी म. की शिष्या पू. साध्वी श्री तरूणप्रभाश्रीजी म. ठाणा 4, पू. प्रवर्तिनी श्री प्रेमश्रीजी म. तेजश्रीजी म. की शिष्या पू. साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी म. ठाणा 8, पू. प्रवर्तिनी श्री सज्जनश्रीजी म. की शिष्या पू. साध्वी श्री सम्यक्दर्शनाश्रीजी म. ठाणा 4, पू. महत्तरा श्री चंपाश्रीजी म.सा. की शिष्या पू. साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी म. ठाणा 8, पू. खान्देश शिरोमणि साध्वी श्री दिव्यप्रभाश्रीजी म. की शिष्या पू. साध्वी श्री विरागज्योतिश्रीजी म. ठाणा 3 आदि विशाल साधु साध्वी समुदाय की पावन सानिध्यता में चेन्नई महानगर में समदांगी बाजार स्थित श्री धर्मनाथ मंदिर की अंजनशलाका प्रतिष्ठा एवं दीक्षा समारोह अत्यन्त आनंद व उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

श्री धर्मनाथ जिन मंदिर का इतिहास

प्रवर्तिनी श्री विचक्षणश्रीजी म. की प्रेरणा से स्थापित श्री जिनदत्तसूरि जैन मंडल द्वारा निर्मित इस मंदिर की गृह मंदिर के रूप में प्रतिष्ठा 26 वर्ष पूर्व आचार्य पद्मसागरसूरिजी म. की निश्रा में हुई थी।

कांकरिया गोत्र का इतिहास... चांदी के एक थाल को कंकरों से भर दिया गया। पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की चांदनी में गुरुदेव ने उन कंकरों का अभिमंत्रण करना प्रारंभ किया।...

लेखक- पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.
कांकरिया गोत्र का उद्भव नवांगी वृत्तिकार खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री अभयदेवसूरीश्वरजी म. के पट्टधर आचार्य जिनवल्लभसूरि के उपदेश से हुआ है।
वि. सं. 1142 का यह घटनाक्रम है। चित्तौड नगर के महाराणा के राजदरबार में भीमसिंह नामक सामंत पदवीधारी था। वह पडिहार राजपूत खेमटराव का पुत्र था। वह कांकरावत का निवासी था। उसे महाराणा की चाकरी करना पसंद न था। एक बार राजदरबार में किसी कारणवश सामंत भीमसिंह आक्रोश में आ गये। उनका स्वाभिमान जागा और वे अपने गांव चले गये।
महाराणा को यह उचित नहीं लगा। तुरंत सेवा में चले आने का हुकम जारी किया। पर सामंत भीमसिंह ने वहाँ जाना स्वीकार नहीं किया।

May 4, 2015

Jain Religion answer... Shravak ke prashn... shravak yogy prashna

1) shravak ke gun kitne ?
  21
2) shravak ke dainik kartavya kitne hai?
  6
3) shravak ke vaarshik kartavya kitne ?
  11
4) shravak ke paryushan ke kartavya kitne ?
  5
5) shravak roj kitne niyamo ko dhaaran karta hai ?
  14
6) shravak ko Dono samay kya Karna chahiye ?
  pratikraman
7) shravak ko mandir ki kitne aashaatana  taalani chahiye ?
 84
8) shravak ka kon sa gunsthan hai ?
  5th deshvirati gunsthan