Oct 3, 2015

Phalodi फलोदी नगर में परम पूज्य गुरुदेव गणाधीश उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. के निश्रावर्ती पूज्य मुनिराज श्री मुक्तिप्रभसागरजी म. व फलोदी के नंदन प्रवचनकार मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी म. का फलोदी का चातुर्मास धूम धाम से चल रहा है।

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कन्हैयालालजी भंसाली
 फलोदी में चातुर्मास में आराधना का ठाठ @ चातुर्मास में विभिन्न प्रकार के आयोजन हुए व चल रहे है। पूज्य मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी म. के सांसारिक पिताजी कन्हैयालालजी भंसाली के जीव राशी क्षमापना के उपलक्ष में दो दिवसीय कार्यक्रम सानंद सम्पन्न हुआ। दि. 25-9-2015 को सुबह त्रिपोलिया बाजार स्थित उनके निवास स्थान पर स्नात्र पुजा, पद्म पुष्प महिला मण्डल द्वारा पढ़ाई गई। रात्री में वैरागी जम्बुस्वामी के जीवन पर आधारित नाटिका का मंचीय कार्यक्रम हुआ। स्थानीय बालक-बालिकाओं की भाव-सभर प्रस्तुति को देखने पुरा गांव जैसे उमड़ पडा था। सभी ने नाटिका की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और साथ ही बच्चों का उत्साहवर्धन किया। 

वर्षों के बाद गांव में भव्य चातुर्मास से श्रावक-श्राविका वर्ग सहित अन्य धर्मावलंबियों में भी उत्साह का वातावरण बना हुआ है।

Palitana Gujarat शाश्वत तीर्थाधिराज पालीताना स्थित श्री जिन हरि विहार धर्मशाला में पर्युषण महापर्व की आराधना आनंद मंगल व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई।

 परम पूज्य गुरुदेव गणाधीश उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. के शिष्य पूज्य मुनिराज श्री मयंकप्रभसागरजी म.सा., पूज्य मुनि श्री मेहुलप्रभसागरजी म., पूज्य मुनि श्री मौनप्रभसागरजी म., पूज्य मुनि श्री मोक्षप्रभसागरजी म., पूज्य मुनि श्री मननप्रभसागरजी म. एवं पूज्य गुरुदेव मुनिराज श्री मनोज्ञसागरजी म.सा. के शिष्य पूज्य मुनि श्री कल्पज्ञसागरजी म. की निश्रा में चातुर्मास की आराधना के अंतर्गत नित्य प्रवचन व दोपहर में स्वाध्याय का कालांश चला। जिसमें चातुर्मासिक आराधना करने हेतु पधारे सभी आराधकों ने एवं विभिन्न धर्मशालाओं में रुके श्रावक-श्राविकाओं ने पूरा भाग लिया।


हरि विहार में पर्युषण पर्वाराधना का अनोखा ठाठ रहा। प्रतिदिन प्रात: 9:30 बजे प्रवचन का आयोजन हुआ। पूज्य मुनिराज श्री मयंकप्रभसागरजी म. के श्रीमुख से प्रारंभ सुधर्म सभा में मुनि मेहुलप्रभसागरजी म. व मुनि कल्पज्ञसागरजी म. के प्रवचन के प’चात् संघ पूजन और साधर्मिक वात्सल्य का भी आयोजन रहा। ता. 12.09.2015 को दादा गुरूदेव मणिधारी जिनचन्द्रसूरिजी म.सा. की स्वर्गारोहण तिथि पर गुणानुवाद और दोपहर में मयुर मंदिर में दादागुरूदेव की पूजा पढाई गई। 

Raipur छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर नगर में पर्युषण पर्व आराधना अत्यन्त आनंद व उल्लास के साथ संपन्न हुई।

पूज्य गुरुदेव के प्रभावशाली धाराप्रवाह प्रवचनों को श्रवण करने के लिये जनता उमड पडी। संवत्सरी का प्रतिक्रमण पूज्यश्री ने अपने अनूठे अंदाज में अर्थ की विशिष्ट विवेचना के साथ कराया। बडे बुजुर्गों का कहना रहा कि ऐसा प्रतिक्रमण हमने अपने जीवन में प्रथम बार किया है।

पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. आदि ठाणा 6 एवं पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी मपू. बहिन म. डा. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. आदि ठाणा 6 की पावन निश्रा में छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर नगर में पर्युषण पर्व आराधना अत्यन्त आनंद व उल्लास के साथ संपन्न हुई।

तपस्या का रायपुर नगर में पहली बार ऐसा ठाट लगा। लगभग 12 से अधिक मासक्षमण की तपस्या हुई। 45 सिद्धितप के साथ लगभग 150 से अधिक अट्ठाईयों का ठाट लगा। 600 से अधिक अक्षय निधि व समवशरण तप हुए। 200 लगभग वीस विहरमान की तपस्या से जुडे।

Raipur मुनि श्री समयप्रभसागरजी म. के मासक्षमण की तपस्या सानन्द संपन्न

पूज्य गुरुदेव गणाधीश उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. के शिष्य पूज्य तपस्वी मुनिराज श्री समयप्रभसागरजी म. के महामृत्युंजय तप-मासक्षमण की महान् तपस्या सुख शाता के साथ संपन्न हुई। मासक्षमण तप का प्रारंभ श्रावण शुक्ल पंचमी से किया था जो संवत्सरी महापर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को पूर्ण हुआ। 

इस दौरान प्रतिलेखन, प्रतिक्रमण आदि समस्त क्रियाओं में संपूर्ण रूप से जागरूक रहे।