Posts

Showing posts from 2016

Mahopadhyay Shree Kshamakalyan ji Maharaj पद्मश्री विभूषित पुरातत्त्वाचार्य मुनि जिनविजयजी का मंतव्य-

Image
महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज के गुणानुवाद स्वरुप पद्मश्री विभूषित पुरातत्त्वाचार्य मुनि जिनविजयजी का मंतव्य- ‘‘महोपाध्याय क्षमाकल्याण गणी राजस्थान के जैन विद्वानों में एक उत्तम कोटि के विद्वान् थे और अन्य प्रकार से अन्तिम प्रौढ पंडित थे। इनके बाद राजस्थान में ही नहीं अन्यत्र भी इस श्रेणि का कोई जैन विद्वान् नहीं हुआ। इनने जैन यतिधर्म में दीक्षित होने बाद, आजन्म अखण्डरूप से साहित्योपासना साहित्यिक रचनाएँ निर्मित हुई। साहित्यनिर्माण के अतिरिक्त तत्कालीन जैन समाज की धार्मिक प्रवृत्ति में भी इनने यथेष्ट योगदान दिया जिसके फलस्वरूप, केवल राजस्थान में ही नहीं परन्तु मध्यभारत, गुजरात, सौराष्ट्र, विदर्भ उत्तरप्रदेश, बिहार और बंगाल जैसे सुदूर प्रदेशो में भी जैन तीर्थों की संघयात्राएँ देवप्रतिष्ठाएँ और उद्यापनादि विविध धर्मक्रियाएँ संपन्न हुई। इनके पांडित्य और चारित्र्य के गुणों से आकृष्ट होकर, जेसलमेर, जोधपुर और बीकानेर के तत्कालीन नरेश भी इन पर श्रद्धा एवं भक्ति रखते थे ऐसा इनके जीवनचरित्र संबन्धी उपलब्ध सामग्री से ज्ञात होता है।’’ राजस्थानी शैली के इस चित्र में महोपाध्याय श्री क्षमाकल्य…

Mahopadhyay Shree Kshamakalyan ji Maharaj महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज का परिचय

Image
महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी महाराज का जन्म ओशवंश के मालुगोत्र में केसरदेसर नाम के गाँव में संवत् १८०१ में हुआ था। सं. १८१२ में अपनी ११ वर्ष की उम्र में ही उन्होंने वाचक श्रीअमृतधर्मजी महाराज से दीक्षा ग्रहण की। अपने जीवनकाल में उनके विहार का अधिक समय बिहार प्रान्त के पटना आदि स्थलो में काफी बीता है। वि. सं. १८७२ पौष वदी १४ को बीकानेर में कालधर्म को प्राप्त हुवे। इनका विस्तृत जीवन चरित्र श्री क्षमाकल्याणचरित नाम के ग्रन्थ में है। इसकी रचना जोधपुर महाराजा के निजी पुस्तकभण्डार के उपाध्यक्ष पं. श्रीनित्यानन्दजी शास्त्री ने की है। सुन्दर संस्कृत श्लोकों में श्री क्षमाकल्याणजी का पूर्ण जीवनवृतान्त दिया गया है। इनकी प्राप्त रचनाओं में मुख्य रचनायें निम्न हैं- तर्कसंग्रह फक्किका (1827), भूधातु वृत्ति (1829), समरादित्य केवली चरित्र पूर्वाद्ध, अंबड चरित्र, गौतमीय महाकाव्य टीका, सूक्त रत्नावली स्वोपज्ञ टीका सह, यशोधर चरित्र, चैत्यवन्दन चतुर्विंशति, विज्ञान चन्द्रिका, खरतरगच्छ पट्टावली, जीवविचार टीका, परसमयसार विचार संग्रह, प्रश्नोत्तर सार्धशतक, साधु-श्रावक विधि प्रकाश, अष्टाह्निकादि द्वादश पर्व व…

Rajgir Bihar राजगृही वीरायतन में प्रतिष्ठा 17 फरवरी को

राजगृही पूज्य उपाध्याय श्री अमरमुनिजी म. के आशीर्वाद से एवं आचार्यश्री चन्दनाजी महाराज की पावन प्रेरणा से वीरायतन के पावन परिसर में श्री पाश्र्वनाथ परमात्मा का भव्य शिखरबद्ध जिन मंंदिर का निर्माण चल रहा है। इस मंदिर निर्माण का संपूर्ण लाभ पूना निवासी श्री रसिकलालजी सौ. शोभादेवी धारीवाल परिवार ने लिया है। इस मंदिर की अंजनशलाका प्रतिष्ठा पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. आदि मुनि मंडल एवं पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पूजनीया बहिन म. डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. आदि ठाणा की पावन निश्रा में संपन्न होगा।
त्रिदिवसीय महोत्सव के साथ अंजनशलाका प्रतिष्ठा होगी। इस अवसर पर शासन रत्न श्री मनोजकुमारजी बाबुमलजी हरण पधारेंगे। विधि विधान हेतु जयपुर निवासी सुप्रसिद्ध विधिकारक श्री यशवंतजी गोलेच्छा पधारेंगे।

sammetshikhar tirth Vachna श्री सम्मेतशिखर महातीर्थ की पावन गोद में वांचना शिविर 7 से 9 जनवरी 2017 को

Image
बीस तीर्थकरों की निर्वाण भूमि श्री सम्मेतशिखर महातीर्थ के पावन ऊर्जावान वातावरण में पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. आदि मुनि मंडल एवं पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म., पू. बहिन म. डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म.सा. आदि के पावन सानिध्य में दिनांक 7, 8 व 9 जनवरी 2017 को त्रिदिवसीय वांचना शिविर का आयोजन किया गया है। ता. 10 जनवरी को सामूहिक यात्रा होगी। इस शिविर का आयोजन अ.भा. खरतरगच्छ युवा परिषद ‘केयुप’ द्वारा किया जा रहा है। इस शिविर का संपूर्ण लाभ गढ़ सिवाना-अहमदाबाद निवासी संघवी श्री अशोककुमारजी मानमलजी भंसाली द्वारा लिया गया है। यह शिविर जैन धर्म दर्शन तत्त्वज्ञान का सामान्य बोध क्रिया, विधि, गच्छ, इतिहास आदि विविध विषयों पर केन्द्रित होगा।
शिविर में सम्मिलित होने हेतु इच्छुक शिविरार्थी शीघ्र ही संपर्क कर अपना नाम अंकित कराकर अनुमति प्राप्त करें।  संपर्क सूत्र -  अशोक भसांली- 9825030604, 

दुर्ग से कैवल्यधाम का छह री पालित संघ संपन्न

पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य देव श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा 6 एवं पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. बहिन म. डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. आदि ठाणा 5 की पावन निश्रा में दुर्ग नगर से श्री भूरमलजी पतासी देवी बरडिया परिवार की ओर से उवसग्गहरं तीर्थ-कैवल्यधाम तीर्थ के लिये छह री पालित संघ का भव्य आयोजन किया गया। कार्तिक पूर्णिमा के दिन विधि विधान के साथ चतुर्विध संघ ने नगपुरा की ओर प्रस्थान किया। श्री उवसग्गहरं तीर्थ पहुँचने पर संस्थान की ओर से भव्य स्वागत किया गया। वहाँ बिराजमान आचार्य श्री राजचन्द्रसूरिजी म. आदि की सामूहिक निश्रा में कार्तिक पूर्णिमा का विधान किया गया। प्रवचन में पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपतिश्री ने शत्रुंजय तीर्थ की भावयात्रा विवेचना के साथ कराई। ता. 15 को वहाँ से विहार कर संघ दुर्ग पहुँचा। जहाँ श्री सुखसागर प्रवचन मंडप में श्री भूरमलजी बरडिया ने जीवराशि क्षमापना की। पूज्यश्री ने पद्मावती आलोयणा सुनाने के साथ उसकी विवेचना कर जीवराशि क्षमापना का रहस्य समझाया।

दुर्ग नगर में उपधान तप की आराधना सानन्द संपन्न

पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य देव श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री समयप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री श्रेयांसप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री मलयप्रभसागरजी म. ठाणा 6 एवं पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पूजनीया बहिन म. डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. पूजनीया साध्वी श्री प्रज्ञांजनाश्रीजी म. पूजनीया साध्वी श्री नीतिप्रज्ञाश्रीजी म. पूजनीया साध्वी श्री निष्ठांजनाश्रीजी म. ठाणा 5 की पावन निश्रा में दुर्ग नगर में दिनांक 8 नवंबर 2016 को उपधान तप का माला विधान अत्यन्त आनंद व उत्साह के साथ संपन्न हुआ। मालारोपण विधान के उपलक्ष्य में पंचदिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ता. 4 से 6 तक खरतरगच्छाचार्य श्री वर्धमानसूरि विरचित श्री अर्हद् महापूजन पढाया गया। ता. 7 को भव्यातिभव्य शोभायात्रा निकाली गई। ता. 8 को माला विधान हुआ। प्रथम माला धारण करने का लाभ श्रीमती निर्मलादेवी चोपडा को प्राप्त हुआ। माला पहनाने का लाभ मातुश्री तारादेवी श्री पन्नालालजी मूलचंदजी दिलीपजी नवकुमारजी चोपडा सुरगी वालों ने लिया। द्वितीय माल…

चातुर्मासों की घोषणा 16 अप्रेल 2017 को रायपुर (छ.ग.) में होगी

Image
पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने फरमाया है कि पूज्य गणनायक श्री सुखसागरजी म.सा. के समुदाय के साधु साध्वीजी भगवंतों के आगामी चातुर्मासों की घोषणा रायपुर नगर में 16 अप्रेल 2017 को की जायेगी। पालीताना खरतरगच्छ सम्मेलन में लिये गये निर्णय में इस वर्ष यह परिवर्तन किया गया है। सम्मेलन में यह निर्णय किया गया था कि समुदाय के समस्त चातुर्मासों का निर्णय पूज्य गच्छाधिपतिश्री द्वारा ही फाल्गुन सुदि चतुर्दशी के दिन किया जायेगा। चूंकि इस वर्ष पूज्य गच्छाधिपतिश्री होली चातुर्मास की अवधि में विहार में रहेंगे। वे 17 फरवरी 2017 को राजगृही नगर में प्रतिष्ठा संपन्न करवाकर रायपुर की ओर विहार करेंगे, अत: होली चातुर्मास के दिन चातुर्मासों की घोषणा नहीं हो पायेगी। रायपुर में देवेन्द्रनगर में ता. 17 अप्रेल 2017 को प्रतिष्ठा है। उस अवसर पर प्रतिष्ठा से एक दिन पूर्व ता. 16 अप्रेल 2017 वैशाख वदि 5 को चातुर्मास घोषित किये जायेंगे।
चातुर्मास की विनंती करने हेतु सकल संघ ता. 16 अप्रेल 2017 को रायपुर पहुँचेंगे।

Jahaj Mandir_Magazine_Nov_ 2016

Image

KharatarGaccha_Panchang_2016_e-Book

Image
सदैव कृपा की अमीवर्षा करके  हमें सन्मार्ग प्रदर्शित करें  इसी अभिलाषा के साथ  पुण्यतिथि पर अनंतानंत श्रद्धा पुष्प अर्पित करते हैं। 

यशस्वी पाट परम्परा पर सुशोभित जन-जन की श्रद्धा के केन्द्र, शासन प्रभावक, संयम शिरोमणि गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनकान्तिसागरसूरिजी महाराज

Image
यशस्वी पाट परम्परा पर सुशोभित जन-जन की श्रद्धा के केन्द्र, शासन प्रभावक, संयम शिरोमणि गच्छाधिपति  आचार्य श्री जिनकान्तिसागरसूरिजी महाराज आपका जन्म रतनगढ़ निवासी श्री मुक्तिमलजी सिंघी की धर्मपत्नी श्रीमती सोहनदेवी की कोख से वि.सं. 1968 माघ वदी एकादशी को हुआ था। जन्म का नाम तेजकरण था। माता-पिता तेरापंथी संप्रदाय के होने से तत्कालीन तेरापंथी समुदाय के अष्टम आचार्य श्री कालुगणि के पास 9 वर्ष की बाल्यावस्था में पिता के साथ वि.सं. 1978 में तेजकरण ने दीक्षा ग्रहण की। दीक्षित होने के बाद तेरापंथी शास्त्रों का गहनतापूर्वक अध्ययन किया। जिससे मूर्तिपूजा, मुखविस्त्रका, दया, दान आदि के सम्बन्ध में तेरापंथ सम्प्रदाय की मान्यताएं अशास्त्रीय लगी। फलत: तेरापंथ संप्रदाय का त्याग कर वि.सं. 1989 ज्येष्ठ शुक्ला त्रयोदशी को अनूपशहर में गणाधीश्वर श्री हरिसागरजी महाराज के कर कमलों से भगवती दीक्षा अंगीकार करने पर मुनि श्री कांतिसागरजी नाम पाया।  आप प्रखर वक्ता थे। आपकी वाणी में मिठास होने के साथ ही आपका कण्ठ सुरीला एवं ओजस्वी था। आपको आगम ज्ञान के अलावा संस्कृत, प्राकृत, हिन्दी, गुजराती, अंग्रेजी, मारवाड़ी भाषा…

युगप्रभावक आचार्य भगवंत श्री जिनकांतिसागरसूरीश्वरजी म.सा. की 31वीं पुण्यतिथि पर

Image
सुधातल के निर्मल भूषण, समुच्चय करुणामृत के सागर, समाधि के परम साधक, श्रुतधर परम पूज्य गुरुदेव युगप्रभावक आचार्य भगवंत श्री जिनकांतिसागरसूरीश्वरजी म.सा. विश्व क्षितिज पर एक सौ चार साल पूर्व प्रकाशित हुए। जो मानवीय चेतना को शाश्वतता की ओर ले गये, आपकी दिव्य वाणी और वैराग्यमयी शक्ति ने जगत की सीमाओं को लांघकर जन मानस में ज्ञान की अलख जगाई। 
आपका कोई भी अन्तर्मन से ध्यान करते हैं तो उन्हें सन्मार्ग प्रदर्शित करते हैं। साधना की गहनता प्रखर तप, ज्ञान की तेजस्विता और करूणा के निर्झर से आप्लावित थे। ऐसे महामहिम पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री आज भी जन-जन के मानस पटल पर श्रद्धा स्थान के रूप में अधिष्ठित है। आपकी दिव्य आभा, आपकी ज्ञान किरणें, आपके अनहद उपकार की रश्मियां इतिहास के पृष्ठों पर अमर रहेगी।
महामानव के समस्त गुण आप में अवस्थित थे। आप स्पष्टवक्ता, प्रांजल साहित्यकार, अडिग पराक्रमी सर्वधर्म समन्वय के महान पुरस्कर्ता थे। आपके व्यक्तित्व की ऐसी अनूठी महिमा थी।
आपने भारत की राजधानी दिल्ली, बद्रीनाथ, हरिद्वार, कन्याकुमारी मद्रास, बंबई, नागपुर आदि महानगर-शहर-गांव में पदविहार करके जन जन को अपने ज्ञा…

बीकानेर में श्री क्षमाकल्याणजी महोत्सव मनाया जायेगा

Image
पू. क्षमाकल्याणजी म. का द्विशताब्दी महोत्सव खरतरगच्छ परम्परा में पूज्य उपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी म.सा. का नाम अत्यन्त आदर व श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वर्तमान में खरतरगच्छीय साधु साध्वीजी भगवंत जो वासचूर्ण का उपयोग करते हैं, उसे संपूर्ण विधि विधान के साथ उन्होंने ही अभिमंत्रित किया था। तब से दीक्षा, बडी दीक्षा आदि प्रत्येक विधि विधान में पूज्यश्री का नाम लेकर वासक्षेप डाली जाती है। परम पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य देव श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की सेवा में बीकानेर जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ श्री संघ का प्रतिनिधि मंडल, अध्यक्ष श्री पन्नालालजी खजांची के नेतृत्व में दुर्ग पहुँचा। उन्होंने पूज्यश्री से बीकानेर पधार कर महोपाध्याय श्री क्षमाकल्याणजी म.सा. का द्विशताब्दी महोत्सव में निश्रा एवं मार्गदर्शन प्रदान करने की विनंती की।
आगामी 28 दिसम्बर 2016 को दो सौ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। इस अवसर पर बीकानेर संघ ने पूज्य गच्छाधिपति की आज्ञा से द्विशताब्दी महोत्सव मनाने का निर्णय किया है। बीकानेर श्री संघ की विनंती स्वीकार कर पूज्य आचार्यश्री ने साध्वी श्री कल्पलताश्रीजी म. आदि ठाणा को निश…

Palitana जिन हरि विहार पालीताना की वर्षगांठ आयोजित

पालीताणा स्थित श्री जिन हरि विहार धर्मशाला के श्री आदिनाथ मयूर मंदिर का 14वां वार्षिक ध्वजारोहण का कार्यक्रम दिनांक 12 नवम्बर 2016 को अत्यन्त आनन्द व उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कायमी ध्वजा के लाभार्थी श्रीमती पुष्पाजी अशोकजी जैन परिवार द्वारा जिन मंदिर पर ध्वजा चढाई गई। सतरह भेदी पूजा पढाई गई। यह समारोह खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवन्त श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य मुनिराज श्री मयंकप्रभसागरजी म. पू. मुनि श्री मेहुलप्रभसागरजी म., पू. मुनि श्री मौनप्रभसागरजी म., पू. मुनि श्री मोक्षप्रभसागरजी म., पू. मुनि श्री मननप्रभसागरजी म., पू. मुनि श्री कल्पज्ञसागरजी म. आदि ठाणा एवं पूजनीया खान्देश शिरोमणि महत्तरा पद विभुषिता श्री दिव्यप्रभाश्रीजी म.सा, साध्वी प्रियरदर्शनाश्रीजी म., साध्वी हेमरत्नाश्रीजी म., साध्वी मृगावतीश्रीजी म., साध्वी प्रियश्रद्धांजनाश्रीजी म. आदि साध्वी मंडल की पावन निश्रा में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मंत्री श्री बाबुलालजी लूणिया, कोषाध्यक्ष श्री पुखराजजी तातेड़, सदस्य श्री विजयजी गुलेच्छा, रतनचंद बोथरा आदि कई ट्रस्टी उपस्थित थे। इस मंदिर की प्रतिष्ठा वि. सं. 2059 कार्…

ज्ञान पंचमी के दिन श्रुत की पूजा कर लेना, ज्ञान मंदिरों के पट खोलकर पुस्तकों के प्रदर्शन कर लेना और फिर वर्ष भर के लिए उन्हें ताले में बंद कर देना ज्ञानभक्ति नहीं है। इस दिन श्रुत के अभ्यास, प्रचार और प्रसार का संकल्प करना चाहिए।

Image
ज्ञान पंचमी
ज्ञान पंचमी कार्तिक शुक्ला पंचमी अर्थात दीपावली के पाँचवे दिन मनाई जाती है।  इस दिन विधिवत आराधना करने से और ज्ञान की भक्ति करने से  कोढ़ जैसे भीषण रोग भी नष्ट हो जाते हैं। इस दिन 51 लोगस्स का कायोत्सर्ग, 51 स्वस्तिक, 51 खामासना और  " नमो नाणस्स " पद का जाप किया जाता है। 
ज्ञान पंचमी को लाभ पंचमी भी कहा जाता है। ज्ञान पंचमी सन्देश देती है की ज्ञान के प्रति दुर्भाव रखने से ज्ञानावरणीय कर्म का बंध होता है। अतएव हमें ज्ञान की महिमा को हृदयंगम करके उसकी आराधना करनी चाहिए। यथाशक्ति  ज्ञान प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए और दूसरों के पठन पाठन में योग देना चाहिए। यह योग कई प्रकार से दिया जा सकता है।निर्धन विद्यार्थियों को श्रुत ग्रन्थ देना, आर्थिक सहयोग देना, धार्मिक ग्रंथों का सर्वसाधारण में वितरण करना,  पाठशालाएं चलाना, चलाने वालों को सहयोग देना,  स्वयं प्राप्त ज्ञान का दूसरों को लाभ देना आदि। ये सब ज्ञानावर्णीय कर्म के क्षयोपशम के कारण है। विचारणीय है की जब लौकिक ज्ञान प्राप्ति में बाधा पहुंचाने वाली गुणमंजरी को गूंगी बनना पड़ा तो धार्मिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान में ब…

durg me Suri Mantra Sadhna दुर्ग में सूरिमंत्र की प्रथम पीठिका की साधना सम्पन्न

Image
दुर्ग नगर में पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. के सूरिमंत्र की प्रथम पीठिका की इक्कीस दिवसीय साधना दिनांक 03 अक्टूबर से शुरू हुई और उसका निर्विघ्न सानन्द समापन समारोह 23 अक्टूबर को हुआ। इस साधना के अन्तर्गत पूज्यश्री सम्पूर्ण तौर पर मौन के साथ सूरिमंत्र के जप और तप में लीन रहे। 23 अक्टूबर को सुबह 5.20 बजे आयोजित हवन-पूजन के कार्यक्रम में श्रावकों ने पूजा परिधान पहनकर भाग लिया। प्रात: 9.30 बजे आचार्यश्री के सम्मान में गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकाला गया। जुलूस में हजारों की संख्या में श्रावक-श्राविकाओं और बाहर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आचार्यश्री ने सुबह 10 बजे प्रवचन स्थल सुखसागर प्रवचन-वाटिका में प्रवेश किया। आचार्यश्री ने अपने उद्बोधन में उनकी मंत्र साधना की सफलता के लिए श्रावक-श्राविकाओं द्वारा किए गए नवकार मंत्र जाप के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सूरिमंत्र प्रथम पीठिका मौन-साधना आनन्ददायी रही। यह ज्ञातव्य है कि संपूर्ण भारत में स्थान स्थान पर पूज्यश्री की साधना के निर्विघ्न लक्ष्य के लिये नवकार महामंत्र की आराधना, जाप, आयंबिल आदि का आ…

Durg se Sangh दुर्ग से छह री पालित उवसग्गहर पार्श्वनाथ तीर्थ तक पैदल संघ

Image
दुर्ग नगर से पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म., पूज्य मुनि श्री समयप्रभसागरजी म., पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म., पूज्य मुनि श्री श्रेयांसप्रभसागरजी म. ठाणा 6 एवं पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पूजनीया बहिन म. डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रज्ञांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री नीतिप्रज्ञाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री निष्ठांजनाश्रीजी म. ठाणा 5 की पावन निश्रा में श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ एवं चातुर्मास समिति दुर्ग के तत्वावधान में दुर्ग नगर से उवसग्गहर पार्श्वनाथ तीर्थ होते हुए कैवल्यधाम तीर्थ के लिये पंच दिवसीय छह री पालित पद यात्रा संघ का आयोजन किया गया है। इस संघ का आयोजन श्री भूरमलजी पतासी देवी बरडिया परिवार की ओर से होने जा रहा है।

दीपावली शुभाशयः

Image
दीपावली शुभाशयः

Navpad Oli तप धर्म की आराधना.. परमात्मा महावीर जानते थे कि उन्हें उसी भव में मोक्ष जाना है। फिर भी घाती कर्मों का क्षय करने के लिए दीक्षा लेकर एकमात्र तप धर्म का ही सहारा लिया। साढ़े बारह वर्ष तक भूमि पर बैठे नही। सोये नहीं। तप की साधना तभी फलीभूत हुयी और सभी घाती कर्मों का क्षय कर केवलज्ञान को प्राप्त किया ।

Image
आज नवपद ओली जी का अंतिम 9वां दिन
तप पद की आराधना
तप जीवन का अमृत है ।
जैसे अमृत मिलने पर मृत्यु का डर समाप्त हो जाता है वैसे ही हमारे जीवन में तप रूपी अमृत आने पर जीवन अमर हो जाता है।
दूध को तपाने से मलाई, अन्न को तपाने से स्वादिष्ट भोजन, सोने को तपाने से आभूषण
बन जाता है। वैसे ही शरीर को तप की अग्नि द्वारा तपाने से हमारे कर्म रूपी मैल खिरने लगता है ।

Navpad Oli 8th day संसार और मोक्ष के बीच जो पुल है उसका नाम चारित्र ! आठ कर्मों का नाश करना हो तो इस आठवे पद की आराधना करनी चाहिए !

नवपद ओलीजी का आज आठवां दिन
चारित्र पद की आराधना
आठ कर्मों का नाश करना हो तो इस आठवे पद की आराधना करनी चाहिए !
संसार और मोक्ष के बीच जो पुल है उसका नाम चारित्र !
बिना इसके कोई नही जा सकता है
वह चारित्र 2 प्रकार का -
1 देश विरति ( श्रावक जो छोटे नियम व्रत का पालन करता है)
2 सर्व विरति (साधू जो 5 महाव्रत का पालन करता है)
राग और चारित्र में कट्टर शत्रुता है,  दोनों में से कोई 1 ही रह सकता है!
हमारे हृदय में राग इतना जोरदार चिपक गया है । वैराग्य भाव टिक नहीं रहा है।
चारित्र के लिये राग नहीं, वैराग्य चाहिए।

Jahaj_Mandir_Magazine_Oct- 2016.pdf

Durg पूज्यआचार्यश्री के दर्शनार्थ पधारे श्री मोतीलालजी वोरा

Image
दुर्ग नगर में पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. के दर्शनार्थ बाहर से पधारने वाले संघों व श्रावकों का तांता लगा हुआ है। विशेष रूप से मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व राज्यपाल व वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री मोतीलालजी वोरा पूज्यश्री के दर्शनार्थ पधारे। उनके साथ उनके सुपुत्र विधायक श्री अरूणजी वोरा उपस्थित थे। श्री वोराजी ने पूज्यश्री से वर्तमान स्थितियों पर वार्तालाप किया। पूज्यश्री ने वासक्षेप डालकर आशीर्वाद प्रदान किया।

Udaipur उदयपुर के सूरजपोल दादावाडी में चातुर्मास का ठाट

Image
पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवन्त प्रज्ञापुरुष श्री जिनकान्तिकासागरसूरीश्वरजी मसा. के शिष्य-प्रशिष्य एवं खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवन्त श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य मुनिराज श्री मुक्तिसागरजी म.सा. एवं मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी म.सा. की पावन निश्रा में उदयपुर स्थित श्री जिनकुशलसूरि आराधना भवन, श्री जिनदत्तसूरि दादावाड़ी में चातुर्मास महोत्सव का जबरदस्त ठाट लगा है। इसी क्रम में दिनांक 29-8-2016 से 5 सितम्बर तक पर्युषण पर्व की आराधना उल्लास पूर्वक सम्पन्न हुई जिसमें कल्पसूत्र घर ले जाना एवं बोहराने का लाभ श्रीमती कमलाबेन - दलपतसिंहजी, गोरधनसिंहजी दोशी परिवार द्वारा लिया गया।

KHARTARGACHCHH YUVA PARISHAD ADHIVESHAN 2

Image
दो दिवसीय अ.भा.खरतरगच्छ युवा परिषद, राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए आज दिनाक 25 सितम्बर 2016 को आचार्यश्री जिनमणिप्रभसूरीजी म.सा.  ने सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से कुछ नियमों का पालन करने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि सभी युवा सदस्य गुरूवंदन की विधि का पालन पूरी श्रद्धा के साथ करें। साधु-साध्वियों के चरण स्पर्श, उनके विहार के दौरान सामने आकर न करे, दूर से ही श्रद्धाभाव से प्रणाम करें।  आचार्यश्री ने युवाओं को रात्रि के समय भोजन न करने का संकल्प  लेने के साथ तथा रात्रि-भोज जैसे आयोजनों में शामिल न होने  का भी निर्देश दिया। दुर्ग में आयोजित इस अ.भा.ख.यु.परिषद के प्रथम राष्ट्रीय  सम्मेलन में युवाओं के उल्लास और उत्साह पर आचार्यश्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सम्मेलन आयोजन करने वाली चातुर्मास आयोजन समिति और अ.भा.छ.ग.युवा परिषद, दुर्ग इकाई के कार्यो की अनुमोदना भी की। आचार्यश्री ने सभी युवाओं को सामायिकी, प्रतिक्रमण, साधना आदि सीखने एवं सिखाने के लिए संकल्पित होने का निर्देश भी दिया।

KHARTARGACHCHH YUVA PARISHAD ADHIVESHAN

Image
दो दिवसीय अ.भा.खरतरगच्छ युवा परिषद, राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए आज दिनाक 25 सितम्बर 2016 को आचार्यश्री जिनमणिप्रभसूरीजी म.सा. ने युवाओं को कहा कि खरतरगच्छ युवा परिषद से जुड़े हर सदस्य को जीवन के लिए और धर्म पालन के लिये संकल्प लेना चाहिए।  आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में हृदय की शुद्धता के साथ श्रद्धा और दूसरों के प्रति अच्छे विचारों को ग्रहण करें और उनको कार्य रूप में परिवर्तित भी करें। शिक्षा के क्षेत्र में मानवसेवा के क्षेत्र में सभी युवा सदस्य सक्रियता से जुड़े और समाजसेवी कार्योें को मूर्तरूप देकर दूसरों को प्रेरणा दें।  आचार्यश्री ने युवा समुदाय को धर्म क्षेत्र में प्राचीन मंदिरों और उपाश्रयगृहों के जीर्णोद्धार के लिए सहयोग के साथ-साथ नए मंदिरों और उपाश्रय गृहों की स्थापना एवं निर्माण के लिए भी तत्परता से सहयोग से जुड़ने को कहा।

KHARTARGACHCHH YUVA PARISHAD खरा रहना ही खरतरगच्छ की पहचान है-आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरि

Image
दुर्ग ! ‘‘सारे युवा एकजुट होकर एक-दूसरे से सहयोग करते हुए धर्म के क्षेत्र में काम करें यही अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद का उद्देश्य है। किसी धर्म या सम्प्रदाय का विरोध न करते हुए अपना विकास ही खरतरगच्छ युवा परिषद का एजेन्डा है। खरतरगच्छ में सदस्यों की संख्या कम हो चलेगा किन्तु सदस्यों में गच्छ के प्रति समर्पण और अनुशासन जरूरी है। सदस्यों का भाषा, वाणी, आचरण और कार्यशैली में खरा रहना ही खरतरगच्छ की पहचान है।’’ उक्त विचार आज अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में सभा को सम्बोधित करते हुए आचार्यश्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी ने कहे।               आचार्यश्री ने युवाओं को सफलता के लिए डिसीप्लीन (अनुशासन), डायरेक्शन (निर्देशन), सही उद्देश्य और लक्ष्य पाने के लिए क्रियाशीलता तथा डेयर (साहस) का 3-डी सूत्र दिया।

Palitana JinHari Vihar पालीताणा में क्षमापना पर्व मनाया गया

Image
पालीताणा स्थित जिन हरि विहार संस्था में पर्युषण महापर्व में खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीजी म. के शिष्य पूज्य मुनि श्री मयंकप्रभसागरजी महाराज आदि ठाणा के सानिध्य में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व भक्ति भावना एवं तपस्या के साथ मनाए गए। आठ दिन तक चलने वाली आराधना में प्रात: देवदर्शन,पूजा,प्रवचन,दोपहर में भगवान की पूजा,सांयकालीन प्रतिक्रमण,रात्रीकालीन भक्ति संध्या आदि में श्रावक-श्राविकाओं का हुजूम उमड़ पड़ता था। महावीर जन्म-वाचन में भी श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साह से भाग लिया। अन्तिम दिन में चैत्य परिपाटी का आयोजन किया गया।

जिन हरि विहार समिति के मंत्री बाबुलाल लुणिया ने बताया कि सातवें दिन विविध तपस्वियों का अभिनंदन किया गया। आठों दिन प्रवचन में अखिल भारत के विविध नगरों से पधारे सभी आराधकों ने पर्युषण महापर्व को सहज अनुशासन के साथ बधाया।

Udaipur उदयपुर में खरतर दिवस मनाया

Image
   दिनांक 14 अगस्त 2016 को खरतर दिवस के उपलक्ष में उदयपुर में  विराजित आयड तीर्थ में आचार्य श्री विजयअभयसेनसूरिजी म., थोब की वाड़ी संघ से उपाध्याय श्री नरेन्द्रविजयजी म.सा., अंचलगच्छ संघ से मुनिराज श्री तीर्थरत्नसागरजी म., हिरणमगरी संघ से साध्वी श्री संजयशीलाजी म., सूरजपोल दादावाडी संघ से मुुनिराज श्री मुक्तिप्रभसागरजी म. एवं मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी म. आदि विशाल संख्या में साधु-साध्वी भगवन्तों का गुरुवन्दना व महापुरुषों की जीवनी पर प्रवचन का आयोजन उदयपुर के सुरजपोल स्थित श्री जिनदत्तसुरि दादावाडी के जिनकुशलसूरि मणि आराधना भवन में हुआ।

Durg दुर्ग में चातुर्मास का उल्लासपूर्ण माहौल

Image
पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवंत प्रज्ञापुरूष श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री समयप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म. पूज्य मुनि श्री श्रेयांसप्रभसागरजी म. ठाणा 6 एवं पूजनीया आगम ज्योति प्रवर्तिनी श्री प्रमोदश्रीजी म.सा. की शिष्या पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. पूजनीया बहिन म. डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. पूजनीया साध्वी श्री प्रज्ञांजनाश्रीजी म. पूजनीया साध्वी श्री नीतिप्रज्ञाश्रीजी म. पूजनीया साध्वी श्री निष्ठांजनाश्रीजी म. ठाणा 5 की पावन निश्रा में छत्तीसगढ के दुर्ग नगर में चातुर्मास महोत्सव का जबरदस्त ठाट लगा है।