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Showing posts from March, 2016

Khartar Gachchh Mahasammelan समारोह में खरतरगच्छाधिपति श्री जिनमणिप्रभसूरिजी महाराज ने सभा को संबोधित करते हुए कहा- परमात्मा महावीर ने संघ की महिमा का गान किया है। संघ को कल्पवृक्ष और कामधेनु की उपमा दी है। संघ की प्रगति के मूल में समर्पण छिपा है। जिस संघ के लोग अपने संघ और उसकी मर्यादा के प्रति प्रामाणिक रूप से समर्पित रहते हैं, वह संघ दिन दूनी और रात चौगुनी प्रगति करता है। आज हम परम सौभाग्यशाली हैं कि परमात्मा महावीर को 2500 वर्ष जितना लम्बा समय व्यतीत हो जाने पर भी उनकी वाणी हमारे पास है। जिनवाणी से बडी दूसरी कोई संपदा नहीं है। यह आचार्यों की परम्परा का उपकार है।

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Khartar Gachchh Mahasammelan दि. 11 मार्च को गणाधीश श्री मणिप्रभसागरजी महाराज के निर्देशन में उपाध्याय आदि पदारोहण समारोह हुआ। जिसके अंतर्गत ने मुनि मनोज्ञसागरजी महाराज को उपाध्याय पद, मुनि मणिरत्नसागरजी महाराज को गणि पद भव्य समारोह पूर्वक विधि विधान के प्रदान किया गया। Shri Khartar Gachchh Mahasammelan, Shri Khartar Gachchh Sammelan, Palitana Mahasammelan, Palitana Sammelan, Palitana jain Mahasammelan, 3

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दि. 11 मार्च को गणाधीश श्री मणिप्रभसागरजी महाराज के निर्देशन में उपाध्याय आदि पदारोहण समारोह हुआ। जिसके अंतर्गत ने मुनि मनोज्ञसागरजी महाराज को उपाध्याय पद, मुनि मणिरत्नसागरजी महाराज को गणि पद भव्य समारोह पूर्वक विधि विधान के प्रदान किया गया।

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Palitana Sammelan खरतरगच्छ के इतिहास का स्वर्णिम प्रसंग बना महासम्मेलन­­­­... नमस्कार महामंत्र के तीसरे पद पर आरूढ़ होते हुये गणाधीश मणिप्रभसागर से आचार्य जिनमणिप्रभसूरि बने।... प्रतिनिधि सभा की घोषणा भी हुयी...

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श्री खरतरगच्छ महासम्मेलन का सफलतम आयोजन संपन्न विश्व विख्यात शाश्वत तीर्थ पालीताना में दि. 1 मार्च से 12 मार्च तक चल रहे अखिल भारतीय खरतरगच्छ महासम्मेलन की पूर्णता अंतिम दिन पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरिजी महाराज के आचार्य पदारोहण के साथ हुयी। खरतरगच्छ महासम्मेलन का अंतिम दिन खरतरगच्छ के इतिहास का स्वर्णिम दिवस है। इस दिन नमस्कार महामंत्र के तीसरे पद पर आरूढ़ होते हुये गणाधीश मणिप्रभसागर से आचार्य जिनमणिप्रभसूरि बने। आचार्य पदारोहण समारोह का निर्देशन आचार्य विजयराजयशसूरिजी म., अचलगच्छाधिपति आचार्य गुणोदयसागरसूरिजी म. सहित अन्य कई आचार्य भगवंत की पावन निश्रा में हुआ। और लगभग 600 साधु साध्वी भगवंतों ने आचार्य पदवी समारोह में अपनी उपस्थिति देकर जैन समाज में एकता की मिशाल कायम की।
इससे पूर्व दि. 11 मार्च को गणाधीश श्री मणिप्रभसागरजी महाराज के निर्देशन में उपाध्याय आदि पदारोहण समारोह हुआ। जिसके अंतर्गत ने मुनि मनोज्ञसागरजी महाराज को उपाध्याय पद, मुनि मणिरत्नसागरजी महाराज को गणि पद, साध्वी दिव्यप्रभाश्रीजी को महत्तरा पद, साध्वी शशिप्रभाश्रीजी को प्रवर्तिनी पद और साध्वी सुलोचन…

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Palitana Sammelan 2016 मुनि मनोज्ञसागरजी म. का उपाध्याय पदारोहण 11 मार्च को

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पालीताणा स्थित जिनहरि विहार धर्मशाला में चल रहे अखिल भारतीय खरतरगच्छ साधु-साध्वी सम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार को गणाधीश मणिप्रभसागरजी म. ने अध्यक्षता करते हुये आदेश दिया कि आने वाले 11 मार्च को मुनि मनोज्ञसागर जी म. को उपाध्याय पद, मुनि मणिरत्नसागर जी म. को गणि पद, साध्वी दिव्यप्रभाश्रीजी म. को महत्तरा पद और साध्वी शशिप्रभाश्रीजी म. को प्रवर्तिनी पद विधि-विधान के साथ प्रदान किया जायेगा। मुनि मेहुलप्रभसागरजी म. ने बताया कि आज प्रात: 9 बजे जिनहरि विहार धर्मशाला से गणाधीश एवं समस्त साधु साध्वी सहित अ.भा. खरतरगच्छ महासम्मेलन के वरिष्ट पदाधिकारी, सदस्य एवं देश भर के खरतरगच्छ संघों के प्रतिनिधियों ने जयजयकार के साथ प्रस्थान कर सम्मेलन सभागृह में प्रवेश किया। सभा के प्रारंभ में गुरु परंपरा को नमस्कार कर गणाधीश मणिप्रभसागरजी म. ने कहा कि हमारे समुदाय में योग्य साधु साध्वी को विशेष जिम्मेदारी दी जानी चाहिये। जिससे केवल समुदाय की ही नहीं अपितु धर्म की भी प्रगति हो। इस हेतु उपाध्याय आदि पद की घोषणा करते हुये पदारोहण उत्सव 11 मार्च को आयोजित करने का आदेश दिया। गुरुदेव की इस घोषणा के साथ ही सभा मं…

Palitana Sammelan 12 मार्च को होगा आचार्य पदारोहण

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पालीताणा स्थित जिनहरि विहार धर्मशाला में आज दि. 1 मार्च से प्रारंभ हुये अखिल भारतीय खरतरगच्छ महासम्मेलन की सम्पूर्णता ऐतिहासिक आचार्य पदारोहण समारोह से होगी।
आज प्रात: सम्मेलन के प्रारंभ में देव गुरु को वंदन कर सम्मेलन का प्रारंभ किया गया। सभा में सभी साधु साध्वी सहित अ.भा. खरतरगच्छ महासम्मेलन के वरिष्ट पदाधिकारी, सदस्य एवं देश भर के खरतरगच्छ संघों के प्रतिनिधियों ने गणाधीश मणिप्रभसागरजी महाराज को आचार्य पद स्वीकार करने के लिए विनती अर्ज की। गणाधीश महाराज ने सभी की विनती को मान देते हुये अपनी विनम्र स्वीकृति दी। संघ प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से आग्रह करते हुये कहा कि इतनी संख्या में साधू साध्वियों एवं श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति और सिद्धाचल की पावन धरा में आचार्य एवं अन्य पदों का पदारोहण एक ऐतिहासिक उपलब्धि एवं गच्छ एकता और विकास का अनूठा उदहारण पेश करेगा। गुरुदेव की इस घोषणा के साथ ही सभा मंडप में हर्ष की लहर दौड गयी एवं जयकारे की गूंज से घोषणा का स्वागत किया गया।
मुनि मनोज्ञसागरजी म. एवं मुनि मणिरत्न सागर जी म. ने अपने उद्बोधन में समुदाय की एकता की आवश्यकता पर जोर दिया।