Jul 9, 2018

Shri JINManiprabhSURIji ms. पूज्य गुरुदेव आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरिजी म. सा. आदि ठाणा का विहार कार्यक्रम

पूज्यश्री का कार्यक्रम

पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरुष आचार्य भगवंत श्री जिनकांतिसागरसूरीश्वरजी महाराज साहब के शिष्य रत्न पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी महाराज साहब आदि ठाणा सूरत से विहार कर खानदेश में शासन प्रभावना करते हुए दिनांक 1 जुलाई को खेतिया, 2 जुलाई को पानसेमल दोंदवाड़ा, 3 जुलाई को तलाव-निवाली, 4 को सेंधवा होते हुए दिनांक 12 जुलाई को देपालपुर पधारेंगे। वहां से विभिन्न गांवों में विचरण करते हुए दिनांक 15 जुलाई को उज्जैन पधारेंगे। 
उज्जैन में अवंति पार्श्वनाथ महातीर्थ के शास्त्रशुद्ध जीर्णाेद्धार कार्य का अवलोकन कर मार्गदर्शन देंगे। 
दिनांक 16 जुलाई की शाम को इंदौर के लिए विहार करेंगे। इंदौर में पूज्य गुरुदेव 19 जुलाई को पधारेंगे। दिनांक 20 जुलाई को मुनिराज श्री मुक्तिप्रभसागरजी म. एवं मुनिराज श्री मनीषप्रभसागरजी म. का कंचन बाग में चातुर्मास हेतु प्रवेश होगा, उसमें निश्रा प्रदान करेंगे।
दिनांक 22 जुलाई को पूज्य गच्छाधिपतिश्री का महावीर बाग में चातुर्मासार्थ मंगल प्रवेश होगा। 
पता 
पूज्य गच्छा. आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा.
19 महावीर बाग, एरोड्रम रोड़,
पोस्ट- इन्दौर 452001 मध्यप्रदेश 
फोन 0731 2414198, मुकेश 98 2510 5823

Jul 7, 2018

खानदेश में पूज्य श्री का विचरण

पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी महाराज साहब, पूज्य बालमुनि श्री मलयप्रभसागरजी महाराज सूरत में प्रतिष्ठा संपन्न करवाकर विहार करते हुए दिनांक 22 जून को सेलंभा पधारे। जहां श्रीसंघ द्वारा भव्य स्वागत किया गया। पूज्यश्री का प्रभावशाली प्रवचन हुआ। पूज्या साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी महाराज आदि ठाणा राजपीपला डेडियापाडा होते हुए सेलंभा पधार गए थे। पारस्परिक सुखशाता पृच्छा करते हुए गच्छाधिपतिश्री ने उन्हें हितशिक्षा प्रदान की। प्रवेश उपरांत श्रीसंघ का स्वामीवात्सल्य संपन्न हुआ। साथ ही प्राचीन भवन के जीर्णाेद्धार का कार्य प्रारंभ हुआ।
दिनांक 23 जून को खापर पधारे। दिनांक 24 जून को अक्कलकुवा पधारे। निर्माणाधीन दादावाड़ी का अवलोकन किया। उल्लासपूर्ण माहौल में भव्य प्रवेश एवं पश्चात् श्रीसंघ एवं अतिथियों का नाश्ता स्वामीवात्सल्य का आयोजन किया गया। शुभमुहूर्त्त में पूज्यश्री की निश्रा में आराधना भवन का भूमि पूजन खनन मुहूर्त संपन्न हुआ। यह ज्ञातव्य है कि पूजनीया महत्तरा पद विभूषिता दिव्यप्रभाश्रीजी महाराज की प्रेरणा से आराधना भवन के लिए श्री जसराजजी पंखादेवी चोपड़ा ने अपना भवन श्रीसंघ को समर्पित किया था। शाम को पूज्यश्री वाण्याविहिर नगर पधारे। रात्रि में प्रवचन का आयोजन हुआ जिसमें आबाल वृद्ध सभी ने भाग लेकर प्रवचन-सुधा का पान किया।

Jul 4, 2018

KHETIYA . पूज्य गच्छाधिपतिजी का स्वागत मध्यप्रदेश प्रवेश पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राजकीय अतिथि का दर्जा

KHETIYA . पूज्य गच्छाधिपतिजी का स्वागत मध्यप्रदेश प्रवेश पर
          पूज्य गुरुदेव खरतरगच्छ अधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनकांतिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य रत्न पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य देव श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य मुनि श्री मलयप्रभसागरजी म. तथा पू. महत्तरा पदविभूषिता खानदेश शिरोमणि दिव्यप्रभाश्रीजी म. आदि ठाणा 4 का दिनांक 1 जुलाई 2018 को मध्यप्रदेश सीमा में प्रवेश कर राजकीय सम्मान के साथ खेतिया नगर में प्रवेश हुआ। 
          खेतिया जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक खरतरगच्छ श्री संघ का उल्लास व आनंद अपूर्व था। पूज्यश्री के मध्यप्रदेश प्रवेश अवसर पर इंदौर, उज्जैन, देपालपुर, शहादा, अक्कलकुवा, खापर, वाण्याविहिर, नंदुरबार, धुलिया, पानसेमल, दोंदवाडा, जलगांव आदि अनेक नगरों से श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में आगमन हुआ। 
          जैन सोश्यल ग्रुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विजय मेहता ने मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की ओर से राज्य अतिथि बनाए जाने की घोषणा की, जिसे उपस्थित विशाल जनसमूह ने तुमुल करतल ध्वनि से बधाया।
          इस अवसर पर पूज्य आचार्यश्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज मध्यप्रदेश सीमा में प्रवेश किया है यह व्यवहारिक भाषा है। व्यवस्था की दृष्टि से महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश आदि प्रदेशों का नाम दिया है हकीकत में सारी पृथ्वी एक है। व्यवस्था के कारण यदि मर्यादा बनाते हैं, सीमा निर्धारित करते हैं तो यह उचित है परंतु कभी भी दीवार बनाकर बांटने का कार्य मत करना।
          इस अवसर पर पूज्यश्री ने आनंदघनजी के पद की व्याख्या की। उन्होंने जैन समाज की एकता का संदेश दिया। पूज्या साध्वी विश्वज्योतिश्रीजी ने पूज्यश्री के व्यक्तित्व का विवेचन किया। बालिका मंडल एवं महिला मंडल आदि द्वारा स्वागत गीत व स्वागत भाषण प्रस्तुत किये गये। संचालन महावीर भंसाली ने किया।

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