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Showing posts from September, 2018

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Shri JINManiprabhSURIji ms. खरतरगच्छाधिपतिश्री जहाज मंदिर मांडवला में विराज रहे है।

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पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. एवं पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञसूरीजी महाराज आदि ठाणा जहाज मंदिर मांडवला में विराज रहे है। आराधना साधना एवं स्वाध्याय सुंदर रूप से गतिमान है। दोपहर में तत्त्वार्थसूत्र की वाचना चल रही है। जिसका फेसबुक पर लाइव प्रसारण एवं यूट्यूब (जहाज मंदिर चेनल) पे वीडियो दी जा रही है । प्रेषक मुकेश प्रजापत फोन- 9825105823

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पूज्यगुरुदेवखरतरगच्छाधिपतिआचार्यभगवंतश्रीजिनमणिप्रभसूरीश्वरजीम.सा. केद्वारासूरिमंत्रकीतृतीयपीठिकाकीसाधनादि. 4अक्टुबरसे28अक्टुबरतकहोगी। साधनाकेदौरानदर्शन-वार्ताआदिसंभवनहींहोंगे। महामांगलिकदि. 28अक्टुबरकोहोगी।महामांगलिकमेंसभीअवश्यपधारें।

नंदुरबार नगर में चातुर्मास निमित्त कार्यक्रम संपन्न, श्री चम्पा बालिका मंडल द्वारा ‘माँ की ममता हमें पुकारे’ नाटिका प्रस्तुत की गयी

नंदुरबार12अगस्त।महत्तरापदविभूषितापू. श्रीचंपाश्रीजीम. एवंपू. साध्वीश्रीजितेंद्रश्रीजीम. कीसुशिष्याधवलयशस्वीपू. साध्वीविमलप्रभाश्रीजीम., पू. साध्वीहेमरत्नाश्रीजीम., पू. साध्वीजयरत्नाश्रीजीम., पू. साध्वीरश्मिरेखाश्रीजीम., पू. साध्वीचारुलताश्रीजीम

बाड़मेर में बह रही ज्ञानगंगा-धारा

बाड़मेर। पू. खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरिजी महाराज साहब के शिष्यरत्न पूज्य विपुल साहित्यसर्जक मुनिराज श्री मनितप्रभसागरजी म., तपस्वी मुनि श्री समयप्रभसागरजी म., मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म. एवं मुनि श्री श्रेयांसप्रभसागरजी म. का बाड़मेर नगर में भव्यातिभव्य चातुर्मास गतिमान है। चातुर्मासिक प्रवचनों में नित्य ही विशाल जनसमूह के रूप मंे लगभग 1300 लोग उपस्थित रहते हैं। पू. मुनि भगवंत की निश्रा में अनेकानेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिनमें पुणिया श्रावक की सामायिक, खरतरगच्छ उत्पत्ति, नेमिनाथ दीक्षा कल्याणक महोत्सव किये गये। पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक के अवसर पर पार्श्वनाथ तीर्थ भावयात्रा, 22 परिषहों की संगीतमय विवेचना इत्यादि, 18 पाप स्थानक आलोचना, अनेक विषयों पर प्रवचन चले। रविवार को होने वाले प्रवचनों में लगभग 2000 की तादाद में लोग उपस्थित हो रहे हैं। रोज सुबह 6.30 से 7.00 बजे तक जैन जीवन शैली की कक्षा भी निरंतर गतिमान है। तपस्या का अनोखा ठाठ लगा हुआहै। सिद्धितप, श्रेणीतप, गणधर तप, सांकली, अट्ठम, सांकली एकासना इत्यादि तपस्याओं का सुन्दर माहौल बना हुआ है। गणधर तप में 17…