बाड़मेर में बह रही ज्ञानगंगा-धारा


बाड़मेर। पू. खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरिजी महाराज साहब के शिष्यरत्न पूज्य विपुल साहित्यसर्जक मुनिराज श्री मनितप्रभसागरजी म., तपस्वी मुनि श्री समयप्रभसागरजी म., मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म. एवं मुनि श्री श्रेयांसप्रभसागरजी म. का बाड़मेर नगर में भव्यातिभव्य चातुर्मास गतिमान है। चातुर्मासिक प्रवचनों में नित्य ही विशाल जनसमूह के रूप मंे लगभग 1300 लोग उपस्थित रहते हैं।
पू. मुनि भगवंत की निश्रा में अनेकानेक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिनमें पुणिया श्रावक की सामायिक, खरतरगच्छ उत्पत्ति, नेमिनाथ दीक्षा कल्याणक महोत्सव किये गये। पार्श्वनाथ मोक्ष कल्याणक के अवसर पर पार्श्वनाथ तीर्थ भावयात्रा, 22 परिषहों की संगीतमय विवेचना इत्यादि, 18 पाप स्थानक आलोचना, अनेक विषयों पर प्रवचन चले। रविवार को होने वाले प्रवचनों में लगभग 2000 की तादाद में लोग उपस्थित हो रहे हैं।
रोज सुबह 6.30 से 7.00 बजे तक जैन जीवन शैली की कक्षा भी निरंतर गतिमान है। तपस्या का अनोखा ठाठ लगा हुआ  है। सिद्धितप, श्रेणीतप, गणधर तप, सांकली, अट्ठम, सांकली एकासना इत्यादि तपस्याओं का सुन्दर माहौल बना हुआ है। गणधर तप में 170 आराधक, सिद्धि तप के 10, श्रेणि तप में 10 आराधक जुड़े है। विपुल बोथरा, सचिन मालू, अभिषेक धारीवाल, हिमानी भंसाली, मुस्कान वडे़रा, के 8, 9, 19, 16 उपवास की तपस्या सम्पन्न हुई।
इसमें भी सबसे विशिष्ट बाड़मेर के रत्न तपस्वी मुनि श्री समयप्रभसागरजी म. के 11 उपवास की तपस्या शातापुर्वक सम्पन्न हुई। उनके पारणे का लाभ सामायिक एवं नवकारवाली में बोला गया जिसके दोनों लाभ श्रीमती चन्द्रादेवी बाबुलालजी बोहरा ने लिये।
19 अगस्त को 4 घण्टे तक चले कल्याण मंदिर महापूजन में 170 जोड़ो ने पूजन किया। 17-18-19 अगस्त को अवन्ति पार्श्वनाथ के सामूहिक तेले हुए जिसमें 108 लोगों ने तेला का तप किया। दोपहर में भी तत्त्वज्ञान की कक्षा चल रही है।

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