Sep 4, 2018

नंदुरबार नगर में चातुर्मास निमित्त कार्यक्रम संपन्न, श्री चम्पा बालिका मंडल द्वारा ‘माँ की ममता हमें पुकारे’ नाटिका प्रस्तुत की गयी

नंदुरबार 12 अगस्त। महत्तरा पदविभूषिता पू. श्री चंपाश्रीजी . एवं पू. साध्वी श्री जितेंद्रश्रीजी . की सुशिष्या धवलयशस्वी पू. साध्वी विमलप्रभाश्रीजी ., पू. साध्वी हेमरत्नाश्रीजी ., पू. साध्वी जयरत्नाश्रीजी ., पू. साध्वी रश्मिरेखाश्रीजी ., पू. साध्वी चारुलताश्रीजी ., पू. साध्वी नूतनप्रियाश्रीजी ., पू. साध्वी चारित्रप्रियाश्रीजी . ठाणा 7 की पावन निश्रा में नंदुरबार नगर में चातुर्मास बड़े हर्ष उल्लास से चल रहा है। इस निमित्त अनेक धार्मिक कार्यक्रम, अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। हाल ही में 12 अगस्त को माँ की ममता हमें पुकारे.. जिसमें सौतेली माता पर आधारित एक सुंदर नाटिका श्री चंपा बालिका मंडल की बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत की गयी। जिसमें सगी माँ के मर जाने के बाद जब सौतेली माँ घर में आती है और बच्चों के साथ सौतेलेपन के व्यवहार पर आधारित इस नाटिका को जिस-जिस ने यह नाटिका देखी वह अपने आंसुओं को छुपा नहीं पाए। अंत में सगी माँ के दिये धार्मिक संस्कारों की वजह से सौतेली माँ का भी मन परिवर्तन हो जाता है।
यह नाटिका पू. साध्वी विमलप्रभाश्रीजी . की सुशिष्या पू. साध्वी नूतनप्रियाश्रीजी . द्वारा लिखी गयी। इस नाटिका में दिव्या कोचर, हितेश्री छाजेड, काजल बाफना, सिमरन बाफना, मोक्षा श्रीश्रीमाल, हर्षा श्रीश्रीमाल, कामना जैन, मोहित जीरावला सह 20-25 नन्हीं-नन्हीं बालिकाओं ने अहम भूमिका निभाते हुए कार्यक्रम सफल बनाया। कार्यक्रम में शुभम भंसाली और सौ. दीपा बच्छावत ने अपने भाव व्यक्त किये। कार्यक्रम का मंच संचालन शिवानी छाजेड द्वारा किया गया। इस नाटिका से पूर्व प्रतिक्रमण की भाव यात्रा हुई जिसमें प्रतिक्रमण का महत्व आदि बताया गया।
15 अगस्त को खरतरगच्छ दिवस निमित्त दादा गुरुदेव के जीवन पर आधारित प्रस्तुति दिखाई गयी। साथ ही इस चातुर्मास में पूज्या गुरुवर्याश्रीजी के सानिध्य में अनेक धार्मिक तप-आराधना चल रही हैं. जिसमें प्रतिदिन प्रवचन, प्रतिक्रमण, ज्ञातासूत्र एवं मंजुला चरित्र का वांचन, शिबिर के माध्यम से बच्चों एवं महिलाओं का धार्मिक अध्ययन, समेदशिखर तप, अट्ठाई, मासक्षमण, आयंबिल, ओली, अट्ठम तप जैसे अनेक तप की आराधना चल रही है। सभी कार्यक्रम श्री सकल जैन श्रीसंघ नंदुरबार द्वारा आयोजित किये जा रहे है।
-शुभम भंसाली



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