Featured Post

Shri JINManiprabhSURIji ms. खरतरगच्छाधिपतिश्री जहाज मंदिर मांडवला में विराज रहे है।

Image
पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. एवं पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञसूरीजी महाराज आदि ठाणा जहाज मंदिर मांडवला में विराज रहे है। आराधना साधना एवं स्वाध्याय सुंदर रूप से गतिमान है। दोपहर में तत्त्वार्थसूत्र की वाचना चल रही है। जिसका फेसबुक पर लाइव प्रसारण एवं यूट्यूब (जहाज मंदिर चेनल) पे वीडियो दी जा रही है । प्रेषक मुकेश प्रजापत फोन- 9825105823

Depalpur M.P. देपालपुर में दादावाडी की प्रतिष्ठा संपन्न


इन्दौर से 40 कि.मी. दूर स्थित देपालपुर में चौधरी परिवार द्वारा निर्मित श्री जिनकुशलसूरि दादावाडी की प्रतिष्ठा ता. 25 जनवरी 2019 को अत्यन्त आनंद व उल्लास के साथ पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरुष आचार्य प्रवर श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. पूज्य मुनि श्री मयंकप्रभसागरजी म. एवं पू. महत्तरा पद विभूषिता श्री चंपाश्रीजी म.सा. की शिष्या एवं पूजनीया गणिनी प्रवरा श्री सूर्यप्रभाश्रीजी म. की चरणाश्रिता पूजनीया साध्वी श्री हर्षपूर्णाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री अभिनंदिता श्रीजी म. पू. साध्वी श्री विनम्रप्रभाश्रीजी म. की पावन निश्रा में संपन्न हुई। इस दादावाडी का निर्माण श्री केसरीमलजी चौधरी परिवार द्वारा सन् 1978 में करवाया गया था।
इस दादावाडी का जीर्णाेद्धार श्रीमती रतनबाई चौधरी, श्री विमलचंदजी श्री चंदनबालादेवी चौधरी की स्मृति में श्री सुधीरकुमारजी चन्द्रशेखरजी राजेशजी कमलेशजी विरलजी अश्विनजी चैतन्यजी चौधरी परिवार की ओर से स्वद्रव्य से करवाया गया।
महोत्सव का प्रारंभ ता. 21 जनवरी 2019 से हुआ। पूज्य आचार्यश्री का मंगल प्रवेश ता. 22 जनवरी को हुआ। महोत्सव में दादा गुरुदेव महापूजन, वर्धमान शक्रस्तव अभिषेक, सिद्धचक्र महापूजन आदि विविध विधान संपन्न हुए।
ता. 24 जनवरी को भव्य वरघोडा आयोजित हुआ। ता. 25 को प्रातः मंगल मुहूर्त्त में मूलनायक दादा श्री जिनकुशलसूरि, दादा जिनदत्तसूरि, मणिधारी जिनचन्द्रसूरि, काला गोरा भैरव, अंबिकादेवी एवं सरस्वती देवी की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा संपन्न हुई। दोपहर में श्री शांतिस्नात्र महापूजन पढाया गया। ता. 26 जनवरी को द्वारोद्घाटन के पश्चात् दादा गुरुदेव की पूजा पढाई गई।
प्रतिष्ठा महोत्सव का संचालन एवं विधिविधान श्री रत्नेशजी मेहता, इन्दौर ने करवाये।

Comments

Popular posts from this blog

Jain Religion answer

VARSHITAP वर्षीतप का पारणा इक्षुरस से ही क्यों ... ???