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Showing posts from August, 2019

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Shri JINManiprabhSURIji ms. खरतरगच्छाधिपतिश्री जहाज मंदिर मांडवला में विराज रहे है।

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पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. एवं पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञसूरीजी महाराज आदि ठाणा जहाज मंदिर मांडवला में विराज रहे है। आराधना साधना एवं स्वाध्याय सुंदर रूप से गतिमान है। दोपहर में तत्त्वार्थसूत्र की वाचना चल रही है। जिसका फेसबुक पर लाइव प्रसारण एवं यूट्यूब (जहाज मंदिर चेनल) पे वीडियो दी जा रही है । प्रेषक मुकेश प्रजापत फोन- 9825105823

Paryushan massage

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पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के पहले दिन गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरिजी महाराज ने पर्युषण पर्व की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि आत्मा में ज्ञान का दीप जलाना ही पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का संदेश है। इस पर्व का स्वागत-अभिनंदन करें, यह अतिथि सबसे अलबेला, निराला और आला है। यह पर्व हमें यह कह रहा है कि जो मैं दूंगा उसकी कीमत आंकी नहीं जा सकती और जो मैं लूंगा उसकी कोई कीमत नहीं, वह तो कचरा ही होगा। 
यह पर्व तो 8 दिनों का एक आत्मिक उत्थान शिविर है। इसमें हम जो सीखेंगे उसे हमें सालभर अंगीकार करना है। प्राकृत भाषा में इसे पज्जोसणा कहा। परि यानि चारों ओर और उपासना यानि आराधना। अर्थात समग्र रूप से आराधना से जुड़ जाना ही पर्युषण है। समग्र रूप से अपने अंतर के कसायों का उपसमन कर सर्वथा शांत हो जाने के नाम ही पर्युषण पर्व हैं। इस पर्व का स्वागत हमें अपने हृदय से, नेत्रों से शरीर के रोम-रोम से करना है। सहजता, करुणा से भरा जिसका हृदय होगा, वही इस अतिथि का स्वागत करने का अधिकारी हो सकता है। आचार्य भगवंत ने कहा कि हम सब वीतराग परमात्मा के अनुयायी हैं, हमारे हर कार्य में ‘जयना’ का होना ही हमारी पहचान औ…