Showing posts with label MEHULPRABH. Show all posts
Showing posts with label MEHULPRABH. Show all posts

Aug 30, 2012

Get free books online...www.JainEbook.com

www.JainEbook.com

get free books online...



www.Jahajmandir.com
mehulprabh, jahajmandir, maniprabh, kantisagar, mayankprabh, manishprabh, kushalvatika, neelanjana, vidyutprabha, gajmandir, 

Thought

Thought
रात के अंधेरे से वही घबरातें हैं
जिनके दिन पाप के साथ कट जाते हैं
जो जीते हैं अपने विश्वासों के साथ
उनके चेहरे अंधेरे में भी चमकते
नजर आते हैं।

जिंदगी को मुश्किल बनाने वाले 7 अचेतन विचार

हम लोगों में से बहुत से जन अपने मन में चल रहे फ़ालतू के या अतार्किक विचारों से परेशान रहते हैं जिसका हमारे दैनिक जीवन और कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ये विचार सफल व्यक्ति को असफल व्यक्ति से अलग करते हैं। ये प्रेम को नफरत से और खुद को शांति से पृथक करते हैं। ये विचार सभी क्लेशों और दुखों की जड़ हैं क्योंकि अचेतन एवं अतार्किक विचारधारा ही सभी दुखों को जन्म देती है।

मैं ऐसे 7 अतार्किक व अचेतन विचारों पर कुछ दृष्टि डालूँगा और आशा करता हूँ कि आपको इस विवेचन से लाभ होगा।

1. यदि कोई मेरी आलोचना कर रहा है तो मुझमें अवश्य कोई दोष होगा।
    लोग एक-दूसरे की अनेक कारणों से आलोचना करते हैं। यदि कोई आपकी आलोचना कर रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपमें वाकई कोई दोष या कमी है। आलोचना का एक पक्ष यह भी हो सकता है कि आपके आलोचक आपसे कुछ भिन्न विचार रखते हों। यदि ऐसा है तो यह भी संभव है कि उनके विचार वाकई बेहतर और शानदार हों। यह तो आपको मानना ही पड़ेगा कि बिना किसी मत-वैभिन्य के यह दुनिया बड़ी अजीब जगह बन जायेगी।
2. मुझे अपनी खुशी के लिए अपने शुभचिंतकों की सुझाई राह पर चलना चाहिए।
    बहुत से लोगों को जीवन में कभी-न-कभी ऐसा विचार आता है हांलांकि यह विचार तब घातक बन जाता है जब यह मन के सुप्त कोनों में जाकर अटक जाता है और विचलित करता रहता है। यह तय है कि आप हर किसी को हर समय खुश नहीं कर सकते। इसलिए ऐसा करने का प्रयास करने में कोई सार नहीं है। यदि आप खुश रहते हों या खुश रहना चाहते हों तो अपने ही दिल की सुनें। दूसरों के हिसाब से जिंदगी जीने में कोई तुक नहीं है पर आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आपके क्रियाकलापों से किसी को कष्ट न हो। दूसरों की बातों पर ध्यान देना अच्छी बात है पर उन्हें खुश और संतुष्ट करने के लिए यदि आप हद से ज्यादा प्रयास करेंगे तो आपको ही तकलीफ़ होगी।
3. यदि मुझे किसी काम को कर लेने में यकीन नहीं होगा तो मैं उसे शुरू ही नहीं करूंगा।
    इस विचार से भी बहुत से लोग ग्रस्त दिखते हैं। जीवन में नई चीजें करते रहना- बढ़ने और विकसित होने का सबसे आजमाया हुआ तरीका है। इससे व्यक्ति को न केवल दूसरों के बारे में बल्कि स्वयं को भी जानने का अवसर मिलता है। हर आदमी हर काम में माहिर नहीं हो सकता पर इसका मतलब यह नहीं है कि आपको केवल वही काम हाथ में लेने चाहिए जो आप पहले कभी कर चुके हैं। वैसे भी, आपने हर काम कभी-न-कभी तो पहली बार किया ही था।
4. यदि मेरी जिंदगी मेरे मुताबिक नहीं चली तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है।
    मैं कुछ कहूं? सारी गलती आपकी है। इससे आप बुरे शख्स नहीं बन जाते और इससे यह भी साबित नहीं होता कि आप असफल व्यक्ति  हैं। आपका अपने विचारों पर नियंत्रण है इसलिए अपने कर्मों के लिए भी आप ही जवाबदेह हैं। आपके विचार और कर्म ही आपके जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। यदि आप अपने जीवन में चल रही गड़बड़ियों के लिए दूसरों को उत्तरदायी ठहराएंगे तो मैं यह समझूंगा कि आपका जीवन वाकई दूसरों के हाथों में ही था। उनके हाथों से अपना जीवन वापस ले लें और अपने विचारों एवं कर्मों के प्रति जवाबदेह बनें।
5. मैं सभी लोगों से कमतर हूँ।
    ऐसा आपको लगता है पर यह सच नहीं है। आपमें वे काबिलियत हैं जिन्हें कोई छू भी नहीं सकता और दूसरों में वे योग्यताएं हैं जिन्हें आप पा नहीं सकते। ये दोनों ही बातें सच हैं। अपनी शत्तिफयों और योग्यताओं को पहचानने से आपमें आत्मविश्वास आएगा और दूसरों की सामर्थ्य और कुशलताओं को पहचानने से उनके भीतर आत्मविश्वास जगेगा। आप किसी से भी कमतर नहीं हैं पर ऐसे बहुत से काम हो सकते हैं जिन्हें दूसरे लोग वाकई कई कारणों से आपसे बेहतर कर सकते हों इसलिए अपने दिल को छोटा न करें और स्वयं को विकसित करने के लिए सदैव प्रयासरत रहें।
6. मुझमें जरूर कोई कमी होगी तभी मुझे ठुकरा दिया गया।
    यह किसी बात का हद से ज्यादा सामान्यीकरण कर देने जैसा है और ऐसा उन लोगों के साथ अक्सर होता है जो किसी के साथ संबंध बनाना चाहते हैं। एक या दो बार ऐसा हो जाता है तो उन्हें लगने लगता है कि ऐसा हमेशा होता रहेगा और उन्हें कभी सच्चा प्यार नहीं मिल पायेगा। प्यार के मसले में लोग सामने वाले को कई कारणों से ठुकरा देते हैं और ऐसा हर कोई करता है। इससे यह साबित नहीं होता कि आप प्यार के लायक नहीं हैं बल्कि यह कि आपका उस व्यक्ति के विचारों या उम्मीदों से मेल नहीं बैठता। बस इतना ही।
7. यदि मैं खुश रहूँगा तो मेरी ख़ुशियों को नजर लग जायेगी।
    यह बहुत ही बेवकूफी भरी बात है। आपकी जिंदगी को भी ख़ुशियों की दरकार है। आपका अतीत बीत चुका है। यदि आपके अतीत के काले साए अभी भी आपकी ख़ुशियों के आड़े आ रहे हों तो आपको इस बारे में किसी अनुभवी और ज्ञानी व्यत्तिफ से खुलकर बात करनी चाहिए। अपने वर्तमान और भविष्य को अतीत की कालिख से दूर रखें अन्यथा आपका भावी जीवन उनसे दूषित हो जाएगा और आप कभी भी खुश नहीं रह पायेंगे। कोई भी व्यक्ति किसी की ख़ुशियों को नजर नहीं लगा सकता।
इन अचेतन विचारों से कैसे उबरें?
    यह बहुत आसान है। जब भी आपके मन में कोई अचेतन या अतार्किक विचार आये तो आप उसे लपक लें और अपनी विचार प्रक्रिया का अन्वेषण करते हुए उसमें कुछ मामूली फेरबदल कर दें। कुछ इस तरह- सोचिये कि आप किसी शानदार दिन अपनी प्रिय शर्ट पहनकर जा रहे हैं और एक चिड़िया ने उस पर बीट कर दी। ऐसे में आप सोचेंगे:
    ये हमेशा मेरे साथ ही क्यों होता है?
इसकी जगह आप यह कहें-
    अरे यार अब तो इस शर्ट को धोना पड़ेगा।
    अपनी बातों में हमेशा को खोजें, जो कि अमूमन सही जगह प्रयुक्त नहीं होता। यदि वाकई आपके ऊपर चिड़ियाँ हमेशा बीट करती रहती तो कल्पना कीजिये आप कैसे दिखते। अब से आप इस तरह की बातें करने से परहेज करें। और उदाहरण:
    मैं हमेशा ही बारिश में फंस जाता हूँ। यदि यह सच होता तो आप इंसान नहीं बल्कि मछली होते।
    $ मुझे पार्किंग की जगह कभी नहीं मिलती।य् ;यदि यह सच होता तो आप अपनी गाड़ी के भीतर ही कैद सुबह से शाम तक घूमते रहते।
    $ मैं नहीं कर सकता उदाहरण: मैं दो मील भी पैदल नहीं चल सकता। कभी कोशिश की?

    $ मुझसे करते नहीं बनता उदाहरण: मुझसे कई लोगों के सामने बोलते नहीं बनता। ऐसे में आप अपने परिजनों, दोस्तों याने कुछ लोगों के सामने ही बोलते हैं।
    $ कितनी बुरी बात है कि’’ उदाहरण: कितनी बुरी बात है कि सुबह से बारिश हो रही हैं ;छोड़िये भी, इतनी भी बुरी बात नहीं है।
    इसी तरह के और भी अचेतन व अतार्किक विचार हो सकते हैं जिनकी हमें पहचान करनी हैं और समय रहते ही उन्हें सकारात्मक विचार से बदल देना हैं। मुझे आशा है कि इस लेख से आपको अपने जीवन में बदलाव, रूपांतरण लाने के कुछ सूत्र अवश्य मिले होंगे। कोई भी बदलाव सहज नहीं होता बल्कि उसके लिए सतत प्रयासरत रहना पड़ता है। यदि लेख में लिखी बातों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने के बाद आप उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे तो आपको सफलता जरूर मिलेगी।

Aug 4, 2012

जिज्ञासाओं का समाधान


जिज्ञासाओं का समाधान

आज कान्ति मणि नगर, कपोलवाडी में खचाखच भरे विशाल हाँल में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. ने जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा- इस वर्ष जैन संघ में छह बार संवत्सरी मनाई जायेगी। खरतरगच्छ, अंचलगच्छ, स्थानकवासी संघ {ज्ञानगच्छ को छोडकर}, तेरापंथ संघ व दिगम्बर समाज का अधिकांश भाग अगस्त महिने में संवत्सरी महापर्व की आराधना करेगा। जबकि तपागच्छ, तीन थुई, ज्ञानगच्छ अगले महिने सितम्बर में संवत्सरी मनायेगा। इस विषय पर अपनी वेदना व्यक्त करते हुए उपाध्यायश्री ने कहा- जैन संघ के तीर्थंकर एक, नवकार एक, आराधना का लक्ष्य एक होने पर भी संवत्सरी का यह भेद समाज को छिन्न भिन्न कर रहा है। हर वर्ष पर्युषण महापर्व के दिनों में कत्लखाने बंद रहते हैं, पर इस वर्ष अलग अलग होने के कारण सरकार ने ऐसा आदेश निकालने से मना कर दिया है। अर्थात् किसी भी पर्युषण में कत्लखाने बंद नहीं रहेंगे। यह हमारे लिये कितने दर्द की बात है।

उन्होंने कहा- यदि संपूर्ण जैन समाज संवत्सरी एक मनाने के लिये तत्पर है तो खरतरगच्छ समुदाय अपनी परम्परा का त्याग करने के लिये तत्पर है। पर शर्त एक ही है कि सारा श्वेताम्बर समाज एक हो। उन्होंने एक व्यक्ति के दर्द को प्रकट करते हुए कहा- एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा- खरतरगच्छ, अचलगच्छ वाले 21 अगस्त को संवत्सरी करेंगे। स्थानकवासी तेरापंथी भी अगस्त में करेंगे। तपागच्छ व तीन थुई वाले सितम्बर में करेंगे।

हे गुरूदेव! मुझे बताओ कि मैं संवत्सरी कब करूँ! क्योंकि मैं न तो खरतरगच्छ का हूँ, न तपागच्छ का हूँ, न तीन थुई का हूँ, न स्थानकवासी हूँ, न तेरापंथी हूँ! मैं तो शुद्ध जैन हूँ! हे गुरूदेव! मुझे बताओ कि मेरी संवत्सरी कब है!

इस प्रश्न का हमारे पास कोई जवाब नहीं है। हम छोटी छोटी बातों के लिये लडते रहते हैं, और इस प्रकार अपने समाज में गच्छवाद, तिथि वाद आदि के नाम पर विभाजन करते रहते हैं।

उन्होंने कहा- जैन समाज की उन्नति उसकी एकता में है।

संयोजक पुखराज छाजेड ने बताया कि पूज्य गुरूदेवश्री की पावन निश्रा में 20 मासक्षमण हो चुके हैं और अभी आगे कईयों के मासक्षमण की तपस्या चल रही है। साथ ही सिद्धि तप, कषाय जय तप आदि विभिन्न तप जारी है। पूज्य मुनि श्री मैत्रीप्रभसागरजी म. के आज 18वां उपवास है। मासक्षमण की भावना है। साध्वी श्री कल्याणमालाश्रीजी म. के सिद्धि तप की तपस्या चल रही है।

उन्होंने बताया कि हर शनिवार को दोपहर ढाई से चार बजे तक पू. मेहुलप्रभसागरजी म. द्वारा बच्चों का शिविर लिया जाता है। और रविवार को पू. मनितप्रभसागरजी म. द्वारा दोपहर ढाई से चार बजे तक जनरल शिविर लिया जाता है।

पूज्यश्री के प्रभावी प्रवचनों को श्रवण करने के लिये भारी भीड उपस्थित होती है। कल रविवार को पूज्यश्री का समाज के प्रति उत्तरदायित्व विषय पर प्रवचन होगा।



Jun 19, 2012

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH

MEHULPRABH
'Your birth may b normal, But Your death shud b history.'