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Roop 14

🔹 आज रूप चौदस है।
      वीर प्रभु का अंतिम दर्शन हुआ था आज ।
🔸 सचमुच देखने योग्य, जिनमुद्रा ही है ।
🔹 जिन रूप अर्थात सुखी जीव का रूप ।
🔸 जिन दर्शन अर्थात् आत्म दर्शन ।
🔹 अंतिम दर्शन अर्थात् लें लों दर्शन का जितना लाभ लेना हो ले लों,अब फिर नहीं मिलेगा।
🔸 जिन किसका दर्शन कर रहें हैं,
      उसके दर्शन का नाम है जिनदर्शन ।
🔹 जिनरूप अर्थात चिद्रूप ।
🔸 ऐसा दर्शन करों कि अब
      अनंत काल दर्शन की जरुरत ही न पड़े ।
🔹 जिन मुद्रा से अलौकिक,
      इस विश्व मे कोई मुद्रा नहीं है ।
🔸 ये रूप ही सच्चा रूप है,
      बाकी तो सब कुरूप है ।