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38. जटाशंकर -उपाध्याय मणिप्रभसागरजी म. सा.

जटाशंकर बस में यात्रा कर रहा था। वह तेजी से कभी बस में आगे की ओर जाता, कभी पीछे की ओर! बस आधी खाली होने पर भी वह बैठ नहीं रहा था। कुछ यात्रियों ने कहा भी कि भैया! बैठ जाओ! सीट खाली पडी है। जहाँ मरजी, बैठ जाओ! पर वह सुना अनसुना कर गया। आखिर कुछ लोगों से रहा नहीं गया। उन्होंने उसे पकड कर पूछना शुरू किया- तुम चल क्यों रहे हो? आखिर एक स्थान पर बैठ क्यों नहीं जाते? उसने जवाब दिया! मुझे बहुत जल्दी है। मुझे जल्दी से जल्दी अपनी ससुराल पहुँचना है। वहाँ मेरी सासुजी बीमार है। मेरे पास समय नहीं है। इसलिये तेजी से चल रहा हूँ। भैया मेरे! बस जब पहुँचेगी तब पहुँचेगी। बस में तुम्हारे चलने का क्या अर्थ है? बस में तुम चल तो कितना ही सकते हो...चलने के कारण थक भी सकते हो... पर पहुँच कहीं नहीं सकते। जब भी देखोगे, अपने आप को बस में ही पाओगे... वहीं के वहीं पाओगे। वह चलना व्यर्थ है, जो कहीं पहुँचने का कारण नहीं बनता। हमारी यात्रा भी ऐसी होनी चाहिये जिसका कोई परिणाम होता है। वही यात्रा सफल है।

37. जटाशंकर -उपाध्याय मणिप्रभसागरजी म. सा.

मिस्टर घटाशंकर के गधे को बुखार आ गया था। बुखार बहुत तेज था। गधा जैसे जल रहा था। न कोई काम कर पा रहा था जटाशंकर को अपने गधे से स्वाभाविक रूप से बहुत प्रेम था। वह परेशान हो उठा। उसने डोक्टर से इलाज करवाने का सोचा। मुश्किल यह थी कि उस गाँव में पशुओं का कोई डोक्टर न था। अत: सामान्य डोक्टर को ही बुलवाया गया। डोक्टर जटाशंकर ने आते ही गधे का मुआयना किया। उसने देखा- बुखार बहुत तेज है। उसे पशुओं के इलाज का कोई अनुभव नहीं था। उसने अपना अनुमान लगाते हुए सोचा- सामान्यत: किसी व्यक्ति को बुखार आता है तो उसे एक मेटासिन या क्रोसिन दी जाती है। चूंकि यह गधा है। इसके शरीर का प्रमाण आदि का विचार करते हुए उसने 10 गोलियाँ मेटासिन की इसे देने का तय किया। घटाशंकर भागा भागा मेटासिन की 10 गोलियाँ ले आया। अब समस्या यह थी कि इसे गधे को खिलाये कैसे? घटाशंकर ने घास में गोलियाँ डाल कर गधे को खिलानी चाही। पर गधा बहुत होशियार था। उसने अपने मालिक को जब घास में कुछ सफेद सफेद गोलियाँ डालते देखा वह सशंकित हो गया। उसने सोचा- कुछ गडबड है। मैं इस घास को हरगिज नहीं खाउँगा, पता नहीं मेरे मालिक ने इसमें क्या डाल दिया है। जरूर यह सा…
36. जटाशंकर         -उपाध्यायमणिप्रभसागरजीम. सा.
घटाशंकर की विद्वत्ता दूर दूर तक प्रसिद्ध थी। पर लोगों के मन में इस बात का रंज था कि पंडितजी घोर अहंकारी है। किसी की भी बात को काटने में ही वे अपनी विद्वत्ता को सार्थक मानते थे।एक बार जटाशंकर ने उन्हें भोजन करने का निमंत्रण दिया। पंडित प्रवर ज्योंहि भोजन करने के लिये बैठे, जटाशंकर ने उन्हें याद दिलाते हुए कहा- आप हाथ धोना भूल गये हैं, चलिये पहले हाथ धो लीजिये।पंडितजीको भी अपनीभूल तो समझ में आ गई कि भोजन की थाली पर आने से पूर्व ही हाथ धो लेने चाहिये थे। पर अब क्या करें? कोई और मुझे मेरी गलती बताये, यह मुझे मंजूर नहीं है।उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- अरे यजमान! क्या तुम पानी से हाथ धोने की बात करते हो। हमारे अन्दर तो ज्ञानगंगा लगातार बह रही है। इसलिये उस जल से हम सदा स्वच्छ ही रहते हैं। क्या इस बाहर के पानी से हाथ धोना!जटाशंकर इस उत्तर से अन्दर ही अन्दर बहुत कुपित हुआ। उसने इस उत्तर का प्रत्युत्तर देने का तय कर लिया।भोजन में भरपूर दाल बाटी खा लेने के बाद पंडित प्रवर घटाशंकरजी को गहरी निद्रा आने लगी। वे खूंटी तानकर सो गये। सोने से पहले …
35 जटाशंकर      -उपाध्यायमणिप्रभसागरजीम. सा.जटाशंकर की माता सामायिक कर रही थी। दरवाजे के ठीक सामने ही उसने अपना आसन लगाया था। सामायिक लेकर वह माला हाथ में लेकर बैठ गयी थी। उसकी बहू पानी लेने के लिये कुएं पर जाने की तैयारी कर रही थी। तब नल घरों में लगे नहीं थे। बहूजी ने घडा हाथ में लिया... इंडाणी भी ले ली..। पर बहुत खोजने पर भी उसे पानी छानने के लिये गरणा नहीं मिला। उसने इधर से उधर पूरा कमरा छान मारा... पर गरणा नहीं मिला।सासुजी सामायिक में माला फेरते फेरते भी बहू को देख रही थी। वह समझ गयी थी कि बहू को गरणा नहीं मिला है। सासुजी को सामने ही गरणा नजर आ रहा था। पर बहू को नहीं दीख रहा था। सासुजी ने माला फेरते फेरते हूं हूं करते हुए कई बार इशारा किया। पर बहूजी समझ नहीं पाई।इशारा करते सासुजी को बहूजी ने देखा तो आखिर परेशान होकर कह ही दिया कि मांजी! अब आप बताही दो कि गरणा कहाँ रखा है? मुझे देर हो जायेगी पानी लाने में... फिर दिन भर के हर काम में देर होती ही रहेगी।सासुजी साधु संतों के प्रवचनों में जाने वाली थी। वह जानती थी कि सामायिक में सांसारिक वार्तालाप किया नहीं जाता। धार्मिक शब्दों का ही उच…

31. नवप्रभात --उपाध्याय मणिप्रभसागरजी म.सा.

घर पुराना था। मालिक उसे सजाने के विचारों में खोया रहता था। पोल में एक पुरानी खटिया पडी थी। कुछ पैसे जुटे थे। वह एक अच्छा कारीगरी वाला लकडी का पलंग ले आया था। पुरानी खटिया को पिछवाडे में डालकर उसे कबाड का रूप दे दिया गया था। कमरे की शोभा उस पलंग से बढ गई थी। उस पर नई चादर बिछाई गई थी। रोजाना दो बार उसकी साफ सफाई होने लगी थी। बच्चों को उस पलंग के पास आने की भी सख्त मनाई थी। वह मालिक और परिवार उस पलंग को देखता था और सीना तान लेता था। घर आते ही पहले पलंग को देखता था। घर से जाते समय वह पीछे मुड मुड कर पलंग को देखा करता था। बच्चे उनके जाने की प्रतीक्षा करते थे। उनके जाने के बाद वह पलंग बच्चों की कूदाकूद का साक्षी बन जाता था। एकाध बार उन्हें पता चला तो बच्चों को मेथीपाक अर्पण किया गया था। पलंग को सजाने के लिये नये तकिये खरीदे गये थे। आस पास के लोग, पडौसी भी इस कलात्मक नये सजे संवरे पलंग को देखे, इस लिये उन्हें एक बाद चाय पर बुलाया गया था। पलंग के संदर्भ में उनके द्वारा की गई प्रशंसा को सुनकर चाय पानी में हुआ खर्च न केवल दिमाग से निकल गया था बल्कि वह खर्च उसे सार्थक लगा था। अपने संबंधियों को भी आम…

कत्लखाने भारत देश का कलंक है

कत्लखानेभारतदेशकाकलंकहै पूज्यउपाध्यायश्रीमणिप्रभसागरजीमहाराजनेता. 21 जुलाई 2012 श्रीजैनश्वेताम्बरखरतरगच्छसंघमुंबईद्वाराआयोजितप्रेसकान्फरेन्समेंकहा- यहअत्यन्तपीडाऔरदु:खकीबातहैकिभारतजैसेधर्मप्राणएवंसांस्कृतिकदेशमेंऔर अधिक  आधुनिकबूचडखानेखोलनेकाआदेशसरकारद्वारादियाजारहाहै। भारतदेशऋषिमुनियोंकादेशहै।कोईभीधर्महमेंहिंसानहींसिखाता।क्यापशुओंकोजीनेका अधिकार नहींहै! भारतदेशजहाँदूधघीकीनदियाँबहतीथी।देशकापशुधनसमाप्तहोरहाहै।अन्यदेशअपनेदेशकेकत्लखानेबंदकररहेहैं।औरभारतदेशकेवलकुछविदेशीमुद्रामेंप्रलोभनमेंअपनेयहाँकत्लखानोंकोअनुमतिदेरहाहै।इससेभारतकापर्यावरणखतरनाकरूपसेदूषितहोरहाहै। पशुओंकोभीजीनेकाउतनाहीअिध्ाकारहै, जितनामनुष्योंको! जिसदेशमेंभगवानमहावीरनेअहिंसाकापाठपढाया! जिसदेशमेंभगवान्बुद्धनेकरूणाकीशिक्षादी! जिसदेशमेंभगवान्श्रीकृष्णनेगोरक्षाकेलियेआदर्शउपस्थितकिये, आजवहीदेशहिंसामेंडूबकरराक्षसोंकाअनुयायीहोताजारहाहै! उन्होंनेकहा- जैनसाहित्यकेअनुसारमेघरथराजाऔरसनातनधर्मकेसाहित्यकेअनुसारशिविराजानेएककबूत

मंत्रीजी ने आशीर्वाद लिया

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मंत्रीजीनेआशीर्वादलियामध्यप्रदेशसरकारकेमंत्रीश्रीपारसजैन, उज्जैनपूज्यगुरूदेवउपाध्यायश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. केदर्शनार्थमुंबईपधारे।श्रीजैनश्वेताम्बरखरतरगच्छसंघमुंबईद्वाराउनकाहार्दिकअभिनंदनकियागया।

शिखरजी में चातुर्मास

शिखरजीमेंचातुर्मास पूजनीया पार्श्वमणितीर्थप्रेरिकासाध्वीश्रीसुलोचनाश्रीजीम.सा. वर्धमानतपाराधिकाश्रीसुलक्षणाश्रीजीम.सा. आदिठाणाकीपावननिश्रामेंश्रीसम्मेतशिखरजीमहातीर्थपरचातुर्मासकीआराधनात्यागतपजपवकईकार्यक्रमोंकेसाथभव्यताकेसाथचलरहीहै।देशकेकोनेकोनेसेपधारे 200 से अधिक आराधकवहाँआराधनाकररहेहैं।

श्री मनोहरजी कानूगो सम्मानित

श्रीमनोहरजीकानूगोसम्मानित कईअग्रणीसंस्थाओंसेजुडेसांचोरनिवासीश्रीमनोहरजीकानूगोकोभारतकेराष्ट्रपतिश्रीमतीप्रतिभापाटिलद्वारासम्मानितकरतेहुएउन्हेंसमाजरत्नपदप्रदानकिया। यहसम्मानसमाजकेविभिन्नक्षेत्रोंमेंदियेगयेउनकेद्वारासहयोगकेलियेअर्पितकियागया।श्रीकानूगोजीतो, श्रीजिनदत्तकुशलखरतरगच्छपेढीआदिकईसंस्थाओंकेसक्रियट्रस्टीरहकरअपनीसेवाऐंसंघवशासनकोअर्पितकररहेहैं।श्रीकानूगोश्रीजैनश्वे. खरतरगच्छसंघसांचोरकेअध्यक्ष, श्रीकुशलवाटिकाबाडमेरकेउपाध्यक्ष, श्रीगजमंदिरकेशरियाजीकेउपाध्यक्षपदकाउत्तरदायित्वनिभारहेहैं। सम्मानितकरनेपरदेशकीविभिन्नसंस्थाओंवअग्रणीश्रावकोंनेउन्हेंभावभीनीबधाईदीहै।मूलसांचोरववर्तमान में मुंबईमेंव्यवसायरतश्रीकानूगोसौम्यऔरसहयोगीस्वभावकेधनीहै।उन्होंनेअपनीलक्ष्मीकाउपयोगजनहितवशासनहितमेंउदारताकेसाथकियावकररहेहैं।

दुर्ग में ठाट लगा

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दुर्गमेंठाटलगा पूज्यब्रह्मसरतीर्थोद्धारकमुनिश्रीमनोज्ञसागरजीम.सा. पू. मुनिश्रीकल्पज्ञसागरजीम. पू. मुनिश्रीनयज्ञसागरजीम. कीपावननिश्रामेंछत्तीसगढप्रान्तकेदुर्गनगरमेंचातुर्मासकीआराधनाअत्यन्तआनन्दवउल्लासकेसाथचलरहीहै।प्रवचनमेंभारीभीडउपस्थितरहतीहै।प्रतिदिनदोपहरमेंस्वाध्यायकीकक्षामेंअध्यात्म-रसिकलाभप्राप्तकररहेहैं। सिद्धितपआदिबडीतपश्चर्याऐंबडीसंख्यामेंदुर्गनगरकेइतिहासमेंपहलीबारहोरहीहै।

सिवाना- अहमदाबाद से चलेगी ललवानी एक्सप्रेस

मूलसिवानानिवासीश्रीमतीबक्सुदेवीविरधीचंदजीललवानीपरिवारकेश्रीमाणकचंदजीशांतिलालजीदिलीपकुमारजीललवानीपरिवारकीओरसेश्रीसम्मेतशिखरजीआदिपूर्वभारतकेतीर्थोंकीयात्राहेतुस्पेश्यलट्रेनहेतुसंघकाआयोजनकियाजारहाहै।जिसकाशुभमुहूर्त्तप्राप्तकरनेकेलियेललवानीपरिवारअपनेरिश्तेदारों, मित्रोंकेसाथगाजतेबाजतेपूज्यश्रीकीसेवामेंता. 22 जुलाई 2012 कोपहुँचा। पूज्यश्रीने 21 दिसम्बर 2012 कासिवानासेतथा 23 दिसम्बर 12 काअहमदाबादसेप्रयाणकाशुभमुहूर्त्तप्रदानकिया।जिसेश्रवणकरललवानीपरिवारहर्षसेनृत्यकरनेलगा। इसअवसरपरपूज्यश्रीनेफरमाया- शास्त्रोंमेंतोछहरीपालितसंघकाविधानहै।आपकोयहशुभमुहूर्त्तइससंकल्पकेसाथप्रदानकियाजारहाहैकिपाँचवर्षोंकेभीतरआपकोछहरीपालितसंघकालाभलेनाहै।आपतीर्थोंकीयात्राकरनेजारहेहैं।वहयात्रानिर्दोषहो, रात्रिभोजनकासर्वथात्यागहो, सामायिक, प्रतिक्रमण, पूजाआदिआराधनाकावातावरणनिर्मितहो।इनबातोंकाविशेषध्यानरखे। इसअवसरपरललवानीपरिवारकीबहुओंनेगीतिकाऐंप्रस्तुतकी।अरूणललवानीनेआभारप्रकटकिया।

सिवाना में चातुर्मास का ठाट

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सिवानामेंचातुर्मासकाठाट सिवानाउम्मेदपुरामेंपूज्यधवलयशस्वीसाध्वीश्रीविमलप्रभाश्रीजीम.सा. कीशिष्यापूजनीयासाध्वीश्रीहेमरत्नाश्रीजीम. जयरत्नाश्रीजीम. नूतनप्रियाश्रीजीम. ठाणा 3 काचातुर्मासआराध्ानाआदिकेसाथचलरहाहै।प्रवचनोंमेंश्रावकश्राविकाओंकीअनुमोदनीयउपस्थितिरहतीहै। पिछलेदिनोंश्रीनेमिनाथप्रभुकेजन्मवदीक्षाकल्याणककेअवसरपरनाटिकाकाआयोजनकियागया।जिसेखूबसराहागया।

श्री गौडी पार्श्वनाथ मूर्तिपूजक संघ सांचोर के ट्रस्टियों का स्वागत

श्रीगौडीपार्श्वनाथमूर्तिपूजकसंघसांचोरकेट्रस्टियोंकास्वागत कांतिमणिनगर, मुंबई! पूज्यगुरूदेवउपाध्यायश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. कीपावननिश्रामेंश्रीजैनश्वेताम्बरखरतरगच्छसंघमुंबईद्वाराश्रीजैनश्वेताम्बरगौडी पार्श्वनाथमूर्तिपूजकसंघपेढीकेट्रस्टियोंकाभावभीनाअभिनंदनकियागया। इसअवसरपरप्रवचनफरमातेहुएपूज्यउपाध्यायश्रीनेफरमाया- आपसभीपुण्यशालीहैकिवीतरागपरमात्माकेशासनकीसेवाकाआपकोअनूठाअवसरउपलब्धहुआहै।यहध्यानमेंलेंकिअध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष, ट्रस्टीबहुमानवाचीपदनहींहै, अपितुजिम्मेदारीभरापदहै।येपदनहींबल्किजिम्मेदारीहैं।ट्रस्टीकोचाहियेकिवहअपनेव्यक्तिगतस्वार्थोंसेउपरउठकरशासनऔरसंघकेहितमेंकार्यकरे।संघसर्वोपरिहै। हमेंसंघकीसेवाकरनेकेलियेअपनेसमस्तस्वार्थोंकात्यागकरनाहै।मेरानिवेदनहैकिआपसकलसंघकोसाथलेकरचले।सभीकेप्रेमकोसंपादितकरतेहुएशासनवसंघकेप्रतिअपनासमर्पणभावव्यक्तकरें।निश्चितहीआपकेनेतृत्वमेंशासनवसंघकानामऔरआगेविकासकेपथपरबढेगा। इसअवसरपरश्रीगौडीपार्श्वनाथजैनश्वेताम्बरमूर्तिपूजकसंघकेनवनिर्वाचितअध्यक्षश्रीसी.बी. जैनवट्रस्टियोंकाहार्दिकअभिनंदनकियागया। इसअवसरपरश्रीगौडीपार्श्वनाथ

इचलकरंजी समाचार

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इचलकरंजीसमाचार पूजनीयाधवलयशस्वीगुरूवर्याश्रीविमलप्रभाश्रीजीम.सा. आदिठाणाकाचातुर्मासअत्यन्तहर्षउल्लास, आराधनावशासनप्रभावनाकेसाथगतिमानहै।मणिधारीभवनमेंचलरहेइसचातुर्मासमेंसकलश्रीसंघलाभप्राप्तकररहाहै। प्रवचनकेअलावासोमवारसेशुक्रवारतकजीवविचारतत्वज्ञानकीकक्षाचलरहीहै।शनिवारकोमहिलाओंकातथारविवारकोबच्चोंकाशिविरआयोजितकियाजाताहै।सिद्धितपआदितपश्चर्याचलरहीहै। श्रीनेमिनाथपरमात्माकेजन्मकल्याणककेअवसरपरनाटिकाकाभव्यआयोजनकियागया।

उदघाटन संपन्न

उदघाटनसंपन्न पूज्यगुरूदेवउपाध्यायप्रवरश्रीमणिप्रभसागरजीम.सा. केचातुर्मासस्थलकपोलवाडीकोकान्तिमणिनगरनामदियागयाहैजिसकेउदघाटनकालाभमूलगढसिवानावर्तमानमेंअहमदाबादनिवासीसंघवीश्रीअशोककुमारजीमानमलजीभंसालीपरिवारद्वारालियागया।अतिथिगणोंकीसाधर्मिकभक्तिहेतुगुरूगौतमनगरकानामकरणकियागया।जिसकालाभगढसिवाना- अहमदाबादनिवासीसंघवीशा. वंसराजजीकुशलकुमारजीभंसालीद्वारालियागया।प्रवचनमंडपकानामकरणश्रीजिनदत्तसुखसागरप्रवचनमंडपरखागया, जिसकेउदघाटनकालाभगढसिवाना- अहमदाबाद- मुंबईनिवासीसंघवीशा. चौथमलजीसुरेशकुमारजीजयन्तिलालजीभंसालीपरिवारद्वारालियागया। इनतीनोंनगरोंकाभव्यउदघाटनता. 8 जुलाई 2012 रविवारकोअत्यन्तआनन्दवउल्लासकेसाथसंपन्नहुआ।

धूलिया में शासन प्रभावना

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महाराष्ट्रप्रान्तकेधूलियाशहरमेंपूजनीयागुरूवर्याखान्देशशिरोमणिश्रीदिव्यप्रभाश्रीजीम.सा. पू. मयणरेहाश्रीजीम. पू. विरागज्योतिश्रीजीम. पू. विश्वज्योतिश्रीजीम. पू. जिनज्योतिश्रीजीम. ठाणा 5 काचातुर्मासत्यागतपसाधनाआराधनाकेसाथचलरहाहै। पूज्यासाध्वीश्रीविश्वज्योतिश्रीजीम.सा. केप्रभावशालीप्रवचनोंकोश्रवणकरनेकेलियेभीडउमडपडतीहै।काँलेजआदिमेंआपकेप्रवचनोंनेसंस्कारोंकाअनूठावातावरणखडाकियाहै।तपश्चर्याकेसाथसाथकईपारिवारिक, सामाजिकशिविरआदिकाआयोजनचलरहाहै।