Dec 25, 2014

Nice STORY ऐसा व्यक्ति जो काम किए जाने के दौरान दूसरों की तकलीफ भी महसूस करे. ऐसा शख्स जिसने सिर्फ पैसे को ही जीवन का ध्येय न बना रखा हो... बधाई हो, तुम इस जॉब के पूरे हक़दार हो...

पढ़ाई पूरी करने के बाद टॉपर छात्र बड़ी कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा....
छात्र ने पहला इंटरव्यू पास कर लिया...
फाइनल इंटरव्यू डायरेक्टर को लेना था...
डायरेक्टर को ही तय करना था नौकरी पर रखा जाए या नहीं...
डायरेक्टर ने छात्र के सीवी से देख लिया कि पढ़ाई के साथ छात्र एक्स्ट्रा-करिकलर्स में भी हमेशा अव्वल रहा...
डायरेक्टर- क्या तुम्हे पढ़ाई के दौरान कभी स्कॉलरशिप मिली ?
छात्र- जी नहीं...
डायरेक्टर- इसका मतलब स्कूल की फीस तुम्हारे पिता अदा करते थे !
छात्र- हाँ श्रीमान !
डायरेक्टर- तुम्हारे पिता काम क्या करते है ?
छात्र- जी वो लोगों के कपड़े धोते है।
ये सुनकर डायरेक्टर ने कहा... ज़रा अपने हाथ
दिखाना...
छात्र के हाथ रेशम की तरह मुलायम और नाज़ुक थे...
डायरेक्टर- क्या तुमने कभी पिता के कपड़े धोने में मदद की है...
छात्र- जी नहीं, मेरे पिता हमेशा यही चाहते रहे है कि मैं स्टडी करूं और ज़्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ूं। हां एक बात और, मेरे पिता मुझसे कहीं ज़्यादा स्पीड से कपड़े धोते है...
डायरेक्टर- क्या मैं तुमसे एक काम कह सकता हूं...
छात्र- जी, आदेश कीजिए !
डायरेक्टर- आज घर वापस जाने के बाद अपने पिता के हाथ धोना...फिर कल सुबह मुझसे आकर मिलना...
छात्र ये सुनकर प्रसन्न हो गया... उसे लगा कि जॉब मिलना पक्का है, तभी डायरेक्टर ने कल फिर बुलाया है...।
छात्र ने घर आकर खुशी-खुशी पिता को ये बात बताई और अपने हाथ दिखाने को कहा...
पिता को थोड़ी हैरानी हुई...लेकिन फिर भी उसने बेटे की इच्छा का मान करते हुए अपने दोनों हाथ उसके हाथों में दे दिए...।
छात्र ने पिता के हाथ धीरे-धीरे धोना शुरू किया... साथ ही उसकी आंखों से आंसू भी झर-झर बहने लगे... पिता के हाथ रेगमार की तरह सख्त और जगह-जगह से कटे हुए थे...यहां तक कि कटे के निशानों पर जब भी पानी डलता, चुभन का अहसास पिता के चेहरे पर साफ़ झलक जाता था...
छात्र को ज़िंदगी में पहली बार एहसास हुआ कि ये वही हाथ है जो रोज़ लोगों के कपड़े धो-धोकर उसके लिए अच्छे खाने, कपड़ों और स्कूल की फीस का इंतज़ाम करते थे...
पिता के हाथ का हर छाला सबूत था उसके एकेडमिक करियर की एक-एक कामयाबी का...।
पिता के हाथ धोने के बाद छात्र को पता ही नहीं चला कि उसने पिता के उस दिन के बचे हुए सारे कपड़े भी एक-एक कर धो डाले...
पिता रोकते ही रह गये, लेकिन छात्र अपनी धुन में कपड़े धोता चला गया...
उस रात बाप बेटा ने काफ़ी देर तक बात की...
अगली सुबह छात्र फिर जॉब के लिए डायरेक्टर के ऑफिस में था...।
डायरेक्टर का सामना करते हुए छात्र की आंखें गीली थीं...
डायरेक्टर- हूं । तो फिर कैसा रहा कल घर पर... क्या तुम अपना अनुभव मेरे साथ शेयर करना पसंद करोगे....
छात्र ने बोलना शुरू किया।
नंबर एक...
मैंने सीखा कि सराहना क्या होती है...मेरे पिता न होते तो मैं पढ़ाई में इतनी आगे नहीं आ सकता था...
नंबर दो...
पिता की मदद करने से मुझे पता चला कि किसी काम को करना कितना सख्त और मुश्किल होता है...
नंबर तीन...
मैंने रिश्ते की अहमियत पहली बार इतनी शिद्धत के साथ महसूस की...

डायरेक्टर- यही सब है जो मैं अपने मैनेजर में देखना चाहता हूं...मैं उसे जॉब देना चाहता हूं जो दूसरों की मदद की कद्र करे,
ऐसा व्यक्ति जो काम किए जाने के दौरान दूसरों की तकलीफ भी महसूस करे. ऐसा शख्स जिसने सिर्फ पैसे को ही जीवन का ध्येय न
बना रखा हो...
बधाई  हो, तुम इस जॉब के पूरे हक़दार हो...NICE
Moral
आप अपने बच्चों को बड़ा मकान दें, बढ़िया खाना दें, बड़ा टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर सब कुछ दें... लेकिन साथ ही खाने के बाद कभी बर्तनों को धोने का अनुभव भी अपने साथ घर के सब बच्चों को मिलकर करने दें... शिक्षा के साथ संस्कार भी बच्चों को दे। वाकिंग के साथ मंदिर जाना भी सिखाएं।
ऐसा इसलिए नहीं कि आप नोकर पर पैसा खर्च नहीं कर सकते, बल्कि इसलिए कि आप अपने बच्चों से सही प्यार करते हैं...आप उन्हें समझाते हैं कि पिता कितने भी अमीर क्यों न हो, एक दिन उनके बाल सफेद होने ही हैं... सबसे अहम हैं आप के बच्चे किसी काम को करने की कोशिश की कद्र करना सीखें...
एक दूसरे का हाथ बंटाते हुए काम करने का जज्ब़ा अपने अंदर लाएं...
यही है सबसे बड़ी सीख....

Dec 15, 2014

Photos बेल्लारी (कर्नाटका) में ता. 15 दिसंबर को मुमुक्षु सुश्री शिल्पा बालड़ की भागवती दीक्षा पांच दिन के महोत्सव के साथ संपन्न हुयी।दीक्षा प्रदाता - पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.।नूतन नाम - साध्वी श्री प्रियशैलांजना श्रीजी म.

बेल्लारी (कर्नाटका) में ता. 15 दिसंबर को मुमुक्षु सुश्री शिल्पा बालड़ की भागवती दीक्षा पांच दिन के महोत्सव के साथ संपन्न हुयी।
दीक्षा प्रदाता - पूज्य उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.।
सानिध्य पूज्या साध्वी श्री पियस्मिताश्रीजी म.साध्वी श्री प्रियलता श्रीजी म.साध्वी श्री प्रियवंदना श्रीजी म.साध्वी श्री प्रियश्रद्धांजना श्रीजी म. आदि।
नूतन नाम - साध्वी श्री प्रियशैलांजना श्रीजी म.
महोत्सव आयोजक शा मीठालालजी बालड़ परिवार
गढ़सिवाना निवासी।बेल्लारी।

Dec 12, 2014

बेल्लारी कर्नाटका में मुमुक्षु सुश्री शिल्पा बॉलर की भागवती दीक्षा निमित्त आयोजन के चित्र

चलो मालपुरा।दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरीजी के चरणों में 31 दिसंबर की रात भव्य संध्या सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधाजी पोडवाल के निर्देशन में

चलो मालपुरा।
दादा गुरुदेव श्री जिनकुशलसूरीजी के चरणों में 31 दिसंबर की रात भव्य संध्या सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधाजी पोडवाल के निर्देशन में

पालथी मारकर बैठने का यह फायदा जान लीजिए।।। विज्ञान ने भी माना पालथी मारकर बैठने के हैं चमत्कारिक लाभ।।।

कुर्सी पर पालथी मारकर बैठना या पंजों के बल जमीन पर बैठना आधुनिक दृष्टि से भले ही हीनता का प्रतीक माना जाए पर अध्यात्मविदों के अनुसार व्यक्ति की माली हालत कैसी भी हो, उसे पालथी मार कर ही बैठना चाहिए।

यह सुविधा या स्थिति हर वक्त नहीं मिलती, पर पालथी मारकर बैठने से व्यक्ति का स्वास्थ्य, दिमाग और आत्मविश्वास मजबूत होता है।

महर्षि वेद विद्या प्रतिष्ठान के स्वामी चिदविलासानंद के मुताबिक पालथी मारकर बैठने से व्यक्ति का स्वरूप मंदिर की तरह बन जाता है और आकाश से उतरने वाली सूक्ष्म ऊर्जा सहस्त्रार चक्र के सहारे पूरे शरीर में घूम जाती है।

जबकि पैर अगर धरती पर हों तो शरीर की स्थिति तड़ितचालक जैसी हो जाती है और विद्युत ऊर्जा शरीर की यात्रा करती हुई जमीन में उतर जाती है। इस बात को वैज्ञानिक तौर पर भी करीब करीब सही पाया गया है।

पालथी मारकर भोजन करने का लाभ

कैलीफोर्निया के बर्कले इंस्टिट्यूट में हुए शोध प्रयोगों के अनुसार पालथी मारकर बैठे व्यक्ति पर आकाश से गिरी बिजली का उतना असर नहीं होता, जितना जमीन पर पैरों के तले लगाकर बैठे या खड़े व्यक्ति पर होता है।

यह बात अभी और भी अध्ययन अनुसंधान का विषय बनी हुई है। लेकिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान के मुताबिक पालथी मारकर किया गया भोजन कुर्सी मेज पर या खड़े होकर किए गए भोजन की तुलना में जल्दी पचता है। और जरूरत से ज्यादा खाया भी नहीं जा सकता।

जमीन पर बैठ कर किए गए योग और ध्यान का अभ्यास जल्दी कारगर होते हैं। महर्षि रमण की जीवनी पर पाल रिचार्ड ने लिखा है कि भारत में योगियों को ज्यादा सफलता मिलती है, इसकी एक वजह सुखासन से बैठना या मंदिर जैसी आकृति बनाकर साधना में उतरना भी एक बड़ा कारण है।

इस तरह बैठकर योग ध्यान करने से सत्तर प्रतिशत मन की एकाग्रता ज्यादा सधती है। इस सबकी क्या वजह है, इस पर खोज चल रही है।

Sent from JAHAJ MANDIR

Dec 6, 2014

दि. 6-12-14 को हुबली नगर दादावाड़ी नूतन दीक्षित साध्वी के नाम और फ़ोटो

आज हुबली नगर दादावाड़ी नूतन दीक्षित साध्वी के नाम
  प्रेमा जीरावला 1 
प पू साध्वी विरलप्रभाश्रीजी

सुमित्रा  जीरावला 2
प पू साध्वी विपुलप्रभाश्रीजी

  ममता बागरेचा 3
प पू साध्वी विरतिप्रभाश्रीजी

शिल्पा ओस्तवाल4
प पू साध्वी विबुद्धप्रभाश्रीजी

प्रिंसी कवाड 5
प पूसाध्वी विशुध्दप्रभाश्री जी  म

दर्शना गुलेच्छा6
प पू साध्वी विश्रुतप्रभाश्रीजी

Nov 29, 2014

तमिलनाडु के प्रसिद्ध श्री ईरोड नगर में वलयकारा स्ट्रीट में श्री मुनिसुव्रतस्वामी जिन मंदिर एवं श्री जिनकुशलसूरि दादावाडी का निर्माण होने जा रहा है। इस जिनमंदिर दादावाडी की अंजनशलाका ता. 21 जनवरी 2015 को माघ शुक्ल प्रतिपदा बुधवार को पूज्यश्री की पावन निश्रा में संपन्न होगी। परमात्मा श्री मुनिसुव्रतस्वामी और दादा गुरुदेव आदि की दिव्य मूतियों की भव्य शोभायात्रा के साथ पूज्यश्री का नगर प्रवेश 19 जनवरी को होगा। ता. 20 को अंजनशलाका व ता. 21 को प्रतिष्ठा का विधान संपन्न होगा

ईरोड में जिनमंदिर एवं दादावाडी का निर्माण

सादर आमंत्रण

इस मंदिर एवं दादावाडी का संपूर्ण निर्माण पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. की पावन प्रेरणा से शासन रत्न श्री मनोजकुमारज हरण के मार्गदर्शन में मूल लोहावट निवासी जेठिया ग्रुप के श्री जवाहरलालजी प्रदीपकुमारजीशरदकुमारजी पारख परिवार लोहावट-राजीम-ईरोड वालों की ओर से करवाया जा रहा है।
पूज्य गुरुदेवश्री के दक्षिण प्रदेश के प्रवास को ख्याल में रखते हुए जिन मंदिर दादावाडी का निर्माण शीघ्र गति से करवाया जा रहा है।
इस जिनमंदिर दादावाडी की अंजनशलाका ता. 21 जनवरी 2015 को माघ शुक्ल प्रतिपदा बुधवार को पूज्यश्री की पावन निश्रा में संपन्न होगी।
परमात्मा श्री मुनिसुव्रतस्वामी और दादा गुरुदेव आदि की दिव्य मूतियों की भव्य शोभायात्रा के साथ पूज्यश्री का नगर प्रवेश 19 जनवरी को होगा। ता. 20 को अंजनशलाका व ता. 21 को प्रतिष्ठा का विधान संपन्न होगा


Nov 7, 2014

चैन्नई में दो दीक्षा 25 अप्रेल को पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. की निश्रा एवं पूजनीया पाश्र्वमणि तीर्थ प्रेरिका श्री सुलोचनाश्रीजी म. आदि ठाणा की सानिध्य में मुमुक्षु श्रीमती जयादेवी सेठिया एवं उनके पुत्र मुमुक्षु श्री संयमकुमार सेठिया (उम्र-11) वर्ष का भागवती दीक्षा महोत्सव दि. 25 अप्रेल 2015 को चैन्नई के कोण्डीतोप में होगा। दीक्षार्थी अमर रहो... जहाज मंदिर परिवार की ओर से हार्दिक अभिनंदन

पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. की निश्रा एवं पूजनीया पाश्र्वमणि तीर्थ प्रेरिका श्री सुलोचनाश्रीजी म. आदि ठाणा की सानिध्य में मुमुक्षु श्रीमती जयादेवी सेठिया एवं उनके पुत्र मुमुक्षु श्री संयमकुमार सेठिया (उम्र-11) वर्ष का भागवती दीक्षा महोत्सव दि. 25 अप्रेल 2015 को चैन्नई के कोण्डीतोप में होगा।दीक्षार्थी अमर रहो...जहाज मंदिर परिवार की ओर से हार्दिक अभिनंदन

Oct 27, 2014

इचलकरंजी में दीक्षार्थी बहिनों का अभिनंदन

पूज्य गूरूदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. आदि ठाणा की शुभ निश्रा में दि. 26-10-2014 को इचलकरंजी में वैराग्यवती सुश्री प्रेमा मांगीलाल जीरावला बेंगलोर,
वैराग्यवती सुश्री शिल्पा मीठालाल बालर बल्लारी,
सुश्री वैराग्यवती सुश्री सुमित्रा मांगीलाल जीरावला-बैंगलोर,
वैराग्यवती सुश्री ममता तेजराज बागरेचा-गंगावती,
वैराग्यवती सुश्री शिल्पा जसराज ओस्तवाल-गदग,
वैराग्यवती सुश्री प्रिन्सी बाबुलाल कवाड-हुबली
एवं वैराग्यवती सुश्री दर्शना वीरचंद गोलेच्छा
 का स्वागत सकल जैन समाज की ओर से आयोजन किया गया है।
अभिनंदन के पश्चात वरघोडा निकाला गया। इस अवसर पर सकल जैन समाज ने दीक्षार्थी बहिनों की उज्जवल भविष्य की कामना की।




Oct 26, 2014

इचलकरंजी से श्री कुंभोजगिरि तीर्थ के छह री पालित पद यात्रा संघ का आयोजन

श्री मणिधारी जिनचन्द्रसूरि जैन श्वेताम्बर संघ के तत्वावधान में पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म. की पावन निश्रा में इचलकरंजी से श्री कुंभोजगिरि तीर्थ के छह री पालित पद यात्रा संघ का आयोजन किया गया है।


इस चार दिवसीय संघ का आयोजन गढ़ सिवाना निवासी श्रीमती पिस्तादेवी छगनलालजी छाजेड परिवार द्वारा किया गया है।


कार्यक्रम के अनुसार छहरी पालित संघ से पहले त्रिदिवसीय जीवित महोत्सव का आयोजन किया गया है। जिसका प्रारंभ 6 नवम्बर 2014 कार्तिक पूर्णिमा से होगा। ता. 7 को श्री सिद्धचक्र महापूजन का आयोजन होगा। रात्रि में मातृ पितृ वंदना का भाव प्रवण समारोह होगा। ता. 8 को जीवित महोत्सव क्षमायाचना समारोह होगा।

Oct 5, 2014

UPADHAN TAP Q ????


UPADHAAN

कोयम्बतूर में अंजनशलाका प्रतिष्ठा 2 फरवरी को

पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी .सा. आदि साधु साध्वी मंडल की पावन निश्रा में कोयम्बतूर नगर में नवनिर्मित श्री स्तंभन पाश्र्वनाथ जिन मंदिर एवं श्री जिनदत्तसूरि दादावाडी की अंजनशलाका प्रतिष्ठा माघ सुदि 14 ता. 2 फरवरी 2015 को संपन्न होगी। इस मंदिर दादावाडी में परमात्मा स्तंभन पाश्र्वनाथ परमात्मा की 51 इंच की प्रतिमा के अलावा दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि की 41 इंची तथा नाकोडा भैरव, पद्मावती, अंबिकादेवी एवं सरस्वती देवी की 31 इंची प्रतिमाऐं बिराजमान होगी।

CHOHTAN ME UPDHAAN TAP KA AAYOJAN


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Oct 4, 2014

कन्याकुमारी में वर्धमान स्वामी मंदिर दादावाड़ी की अंजनशलाका प्रतिष्ठा 27 फरवरी को...... समारोह का प्रारंभ 24 फरवरी से होगा। ता. 26 फरवरी को शोभायात्रा का आयोजन होगा। प्रतिष्ठा के इस पावन अवसर पर पूरे भारत से भक्तजन पधारेंगे। सादर आमंत्रण

देश के दक्षिणी किनारे का सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल कन्याकुमारी में लम्बे समय से जिन मंदिर बनाने की चर्चा चल रही थी। यहाँ भ्रमण आदि के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 6 लाख से अधिक जैन बंधुओं का आगमन होता है। परन्तु जैन मंदिर नहीं होने के कारण वे परमात्म दर्शन से वंचित रहते थे। इस कारण यहाँ जिन मंदिर का निर्माण अत्यन्त जरूरी था। इस कार्य को हाथ में लिया चेन्नई निवासी श्री मोहनचंदजी ढड्ढा ने! वहाँ भूखण्ड प्राप्त करने के प्रयत्न करना प्रारंभ किया।
तभी पता चला कि वहाँ एक भूखण्ड मदुराई निवासी श्री बगदावरमलजी के पास उपलब्ध है। उनसे संपर्क किया गया। उन्होंने भी मदुराई संघ के साथ मिल कर जिन मंदिर आदि निर्माण के लक्ष्य से ही यह भूखण्ड कुछ वर्षों पहले खरीदा था।

उन्होंने यह विशाल भूखण्ड श्री जैन तीर्थ संस्थान रामदेवरा ट्रस्ट को सुपुर्द कर दिया। संस्थान के अध्यक्ष श्री मोहनचंदजी ढड्ढा ने कडी मेहनत करके वहाँ जिनमंदिर निर्माण करने की सरकारी अनुमति प्राप्त की। ता. 14 मार्च 2014 को खात मुहूत्र्त शिलान्यास का शुभ मुहूत्र्त हुआ। सुप्रसिद्ध सोमपुरा विनोद शर्मा ने सुन्दर मानचित्र तैयार किया। बहुत ही कम समय में श्री महावीर स्वामी जिन मंदिर, श्री जिनकुशलसूरि दादावाडी एवं श्री राजेन्द्रसूरि गुरुमंदिर का निर्माण कार्य पूर्णाहुति की ओर अग्रसर है। धर्मशाला, भोजनशाला, उपाश्रय, प्याऊ आदि का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है।
संस्थान द्वारा इस मंदिर की अंजनशलाका प्रतिष्ठा कराने हेतु पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी .सा. से भावभरी विनंती की। जिसे स्वीकार कर पूज्यश्री ने फाल्गुन सुदि 7 ता. 27 फरवरी 2015 का शुभ मुहूत्र्त प्रदान किया। समारोह का प्रारंभ 24 फरवरी से होगा। ता. 26 फरवरी को शोभायात्रा का आयोजन होगा।

प्रतिष्ठा के इस पावन अवसर पर बाहर से हजारों लोगों के पधारने की संभावना है। प्रतिष्ठा को ऐतिहासिक बनाने के लिये ट्रस्टी श्री शांतिलालजी गुलेच्छा, श्री राजेश गुलेच्छा आदि पूर्ण रूप से जुट गये हैं।

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चेन्नई नगर की धन्य धरा पर श्री धर्मनाथ जिन मंदिर की अंजनशलाका प्रतिष्ठा पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. आदि साधु साध्वी मंडल की पावन निश्रा में ता. 26 अप्रेल 2015 को अत्यन्त उल्लास के साथ संपन्न होगी।

चेन्नई में अंजनशलाका प्रतिष्ठा 26 अप्रेल को
चेन्नई में श्री धर्मनाथ परमात्मा से सुशोभित का यह मंदिर सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले मंदिरों में गिना जाता है। इसका निर्माण पूजनीया प्रवर्तिनी श्री विचक्षणश्रीजी . द्वारा स्थापित श्री जिनदत्तसूरि मंडल द्वारा करवाया गया था। अभी उस मंदिर का पूरा जीर्णोद्धार करवाया जा रहा है। मूलनायक परमात्मा का उत्थापन नहीं करवाया गया है। नीचे अभिनव गर्भगृह का निर्माण किया गया है जिसमें परमात्मा धर्मनाथ प्रभु, दादा गुरुदेव आदि की प्रतिमाऐं बिराजमान की जायेगी।

प्रतिष्ठा की विनंती मुहूर्त्त प्राप्त करने के लिये श्री जिनदत्तसूरि मंडल इचलकरंजी में बिराजमान पूज्यश्री की सेवा में पहुँचा। और अंजनशलाका प्रतिष्ठा चातुर्मास आदि की भावभरी विनंती की। अंजनशलाका प्रतिष्ठा की विनंती स्वीकार करते हुए वैशाख सुदि 8 ता. 26 अप्रेल 2015 का शुभ मुहूर्त्त प्रदान किया। सकल संघ में आनंद छा गया।

इचलकरंजी में पंचाह्निका महोत्सव .,,,.,,....,.चौथे दादा गुरुदेव को याद किया.,.,.,.,.,.,.इचलकरंजी में 45 आगम वांचना

पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी .सा. के शिष्य पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी .सा. पूज्य मुनि श्री मयंकप्रभसागरजी .सा. पूज्य मुनि श्री मनितप्रभसागरजी .सा. पूज्य मुनि श्री मेहुलप्रभसागरजी .सा. पूज्य मुनि श्री समयप्रभसागरजी .सा. पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी .सा. पूज्य मुनि श्री श्रेयांसप्रभसागरजी .सा. एवं पूजनीया गुरुवर्या बहिन . डाँ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी .सा. की शिष्या पूजनीया साध्वी डाँ. श्री नीलांजनाश्रीजी . पू. साध्वी श्री विभांजनाश्रीजी . पू. साध्वी श्री निष्ठांजनाश्रीजी . पू. साध्वी श्री आज्ञांजनाश्रीजी 0.ण् की परम पावन निश्रा में चातुर्मास में हुई मासक्षमण, सिद्धि तप, वीशस्थानक तप आदि विविध तपाराधना के उपलक्ष्य में पंचािÉका महोत्सव का आयोजन किया गया।

Sep 20, 2014

कहानी... सारे तथ्यों और सबूतों कि जांच करने के बाद यह पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी उल्लू की पत्नी है और हंस को तत्काल गाँव छोड़ने का हुक्म दिया जाता है!

एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए उजड़े, वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये!
हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ?? यहाँ न... तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं! यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा! भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज कि रात बिता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे!
रात हुई तो जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे उस पर एक उल्लू बैठा था।

Sep 15, 2014

जीवन में कई बार हम गिरते हैं, हारते हैं, हमारे लिए हुए निर्णय हमें मिटटी में मिला देते हैं. हमें ऐसा लगने लगता है कि हमारी कोई कीमत नहीं है. लेकिन आपके साथ चाहे जो हुआ हो या भविष्य में जो हो जाए , आपका मूल्य कम नहीं होता. आप स्पेशल हैं, इस बात को कभी मत भूलिए.

सबसे कीमती चीज
एक जाने-माने स्पीकर ने हाथ में पांच सौ का नोट लहराते हुए अपनी सेमीनार शुरू की. हाल में बैठे सैकड़ों लोगों से उसने पूछा ,” ये पांच सौ का नोट कौन लेना चाहता है?” हाथ उठना शुरू हो गए.
फिर उसने कहा ,” मैं इस नोट को आपमें से किसी एक को दूंगा पर  उससे पहले मुझे ये कर लेने दीजिये .” और उसने नोट को अपनी मुट्ठी में चिमोड़ना शुरू कर दिया. और  फिर उसने पूछा,” कौन है जो अब भी यह नोट लेना चाहता है?” अभी भी लोगों के हाथ उठने शुरू हो गए.

Sep 12, 2014

अवसर की पहचान... आपने कई बार दूसरो को ये कहते हुए सुना होगा या खुद भी कहा होगा कि ‘हमे अवसर ही नही मिला’ लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है ।

Don’t miss an opportunity.

एक बार एक ग्राहक चित्रो की दुकान पर गया । उसने वहाँ पर अजीब से चित्र देखे । पहले चित्र मे चेहरा पूरी तरह बालो से ढँका हुआ था और पैरोँ मे पंख थे ।एक दूसरे चित्र मे सिर पीछे से गंजा था।

ग्राहक ने पूछा – यह चित्र किसका है?

दुकानदार ने कहा – अवसर का ।

ग्राहक ने पूछा – इसका चेहरा बालो से ढका क्यो है?

दुकानदार ने कहा -क्योंकि अक्सर जब अवसर आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नही है ।

ग्राहक ने पूछा – और इसके पैरो मे पंख क्यो है?

दुकानदार ने कहा – वह इसलिये कि यह तुरंत वापस भाग जाता है, यदि इसका उपयोग न हो तो यह तुरंत उड़ जाता है ।

ग्राहक ने पूछा – और यह दूसरे चित्र मे पीछे से गंजा सिर किसका है?

दुकानदार ने कहा – यह भी अवसर का है । यदि अवसर को सामने से ही बालो से पकड़ लेँगे तो वह आपका है ।अगर आपने उसे थोड़ी देरी से पकड़ने की कोशिश की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा और वो फिसलकर निकल जायेगा । वह ग्राहक इन चित्रो का रहस्य जानकर हैरान था पर अब वह बात समझ चुका था ।

आपने कई बार दूसरो को ये कहते हुए सुना होगा या खुद भी कहा होगा कि ‘हमे अवसर ही नही मिला’ लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी से भागने और अपनी गलती को छुपाने का बस एक बहाना है । Real मे भगवा2न ने हमे ढेरो अवसरो के बीच जन्म दिया है । अवसर हमेशा हमारे सामने से आते जाते रहते है पर हम उसे पहचान नही पाते या पहचानने मे देर कर देते है । और कई बार हम सिर्फ इसलिये चूक जाते है क्योकि हम बड़े अवसर के ताक मे रहते हैं । पर अवसर बड़ा या छोटा नही होता है । हमे हर अवसर का भरपूर उपयोग करना चाहिये ।

Sep 10, 2014

दादा जिनचन्द्रसूरि जिनशासन के उज्ज्वल नक्षत्र हैं -उपाध्याय मणिप्रभसागर

इचलकरंजी ता. 10 सितम्बर 2014श्री मणिधारी जिनचन्द्रसूरि जैन श्वेताम्बर संघ के तत्वावधान में पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागर ने श्री सुखसागर प्रवचन मंडप में चतुर्थ दादा गुरुदेव श्री जिनचन्द्रसूरि की 401वीं पुण्य तिथि के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा- जिन शासन के इतिहास में केवल चार दादा गुरुदेव हुए हैं। जिन्होंने अपने संयम, त्याग, तप और आराधना साधना के बल पर जिन शासन की महती प्रभावना की। उनमें प्रथम दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि इतिहास के उज्ज्वल नक्षत्र हैं, जिन्होंने हजारों गोत्रों की स्थापना करके जिन शासन को पूर्ण रूप से समृद्ध बनाया। उनके महाचमत्कारी चरण अहमदाबाद में दादा साहेब ना पगला में बिराजमान है। उनके चरणों से ही वह पूरा क्षेत्र दादा साहेब ना पगला के नाम से सुप्रसिद्ध हैं। जहाँ हर सोमवार को हजारों श्रद्धालु दर्शन करके अपने जीवन को धन्य बनाते हैं।
उनकी पावन परम्परा में चौथे दादा गुरुदेव हुए। उनका समय सोलहवीं व सतरहवीं शताब्दी का संधिकाल था। मात्र नौ वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण करके मात्र सतरह वर्ष की उम्र में आचार्य बन कर संपूर्ण खरतरगच्छ के अधिपति बने। उनके जीवन का सबसे महान् कार्य था- संयम की सुरक्षा करना। उस समय यतियों का शिथिलाचारियों का बोलबाला बढ गया था। उन्होंने अपनी निश्रा के समस्त यतियों को साधु होने के लिये प्रेरित किया। और आदेश दिया कि यदि साधु नहीं बन सको तो गृहस्थ हो जाओ। मगर यति की श्रेणि नहीं रहेगी। वे दृढ कि्रयापात्र आचार्य थे। उन्होंने अपने ज्ञान व साधना के बल पर सम्राट् अकबर को प्रतिबोध देकर उसे अहिंसक बनाया। सम्राट् अकबर के जीवन पर उनका अनूठा प्रभाव था। इस बात का पूरा वर्णन आइने अकबरी में साहित्यकार अबुल फजल ने किया है। उन्होंने दादा गुरुदेव के जीवन की घटनाओं का वर्णन करते हुए कहा- दादा गुरुदेव ने जिनशासन की रक्षा के लिये अमावस्या को पूर्णिमा में बदल दी थी। तथा 12-12 कोस तक पूर्णिमा की तरह चंद्रमा का प्रकाश चारों ओर फैला था। इस अवसर पर मुनि मनितप्रभसागर ने सभा का संचालन करते हुए कहा- दादा गुरूदेव जिनचन्द्रसूरि ने पूरे भारत में भ्रमण करके जिनशासन की महिमा का विस्तार किया। उन्होंने ऐसी अनूठी साधना की थी कि चमत्कार अपने आप हो जाते थे। उन्होंने खरतरगच्छ के अर्थ का विस्तार करते हुए कहा- खरे शब्द का अर्थ है प्रखरता! जहाँ प्रखरता है, जहाँ खरी कि्रया और दृढ आचार का परिपालन है, वह खरतरगच्छ है। इसी परम्परा में चार दादा गुरुदेव हुए हैं। मुनि मेहुलप्रभसागर ने दादा गुरुदेव के जीवन के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा- इन्हीं दादा गुरुदेव ने श्री सिद्धाचल के दरबार में दादा गुरुदेव श्री जिनदत्तसूरि एवं जिनकुशलसूरि के चरण बिराजमान किये थे। इन्हीं दादा गुरुदेव की कृपा से 1700 पंच धातु की प्रतिमाओं की सुरक्षा हुई थी। वे प्रतिमाऐं आज भी बीकानेर के श्री चिंतामणि मंदिर के भोंयरे में बिराजमान है। इस अवसर पर संघ के सचिव रमेश लूंकड, पूर्व अध्यक्ष संपतराज संखलेचा, बाबुलाल मालू आदि ने भी गुरुदेव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। चेन्नई से पधारे थानमल जावाल वाले, कोप्पल से आये विमल संखलेचा आदि का संघ की ओर से बहुमान किया गया।

प्रेषकरमेश लूंकडमहामंत्री

Sep 9, 2014

क्रियोद्धारक श्री जिनचन्द्रसूरि गुरुदेव का मिताक्षरी परिचय... प्रस्तुति- आर्य मेहुलप्रभसागरजी म.

जन्म नाम- सुलतान कुमार
गौत्रा- रीहड़ गौत्र
माता- सौ. श्रिया देवी
पिता- श्रेष्ठि श्रीवन्तजी शाह ओसवाल
जन्म स्थान- खेतसर जोधपुर के पास, राज.
जन्म तिथि- वि.सं. 1595, चैत्रा वदि 12
दीक्षा- वि.सं. 1604, भोपालगढ़-बडलु, राज., दादावाडी स्थल पर
दीक्षित नाम- सुमतिधीर मुनि
गुरू नाम- खरतरगच्छ नायक श्री जिनमाणिक्यसूरिजी म.
आचार्य पद- वि.सं. 1612, भादवा सुदि 9
बीकानेर चातुर्मास- रांगडी चौक स्थित बडे उपाश्रय में
सूरिमन्त्र प्रदाता- आचार्य श्री जिनगुणप्रभसूरिजी म.
क्रियाद्धार- वि.सं. 1614, चैत्र वदि 7, बीकानेर
छम्मासी तपाराधना- वि.सं. 1615, महेवा नगर में
पौषधविधि प्रकरण टीका रचना- पाटण में वि.सं. 1616
पाटण में जयपताका- वि.स. 1617 कार्तिक सुदि 7 को अनेक आचार्य की उपस्थिति में
खंभात प्रतिष्ठा- वि.स. 1618
बीकानेर प्रतिष्ठा- वि.सं. 1622, वैशाख सुदि 3
पट्टधर शिष्य दीक्षा- वि.सं. 1623, मिगसर वदि 5
पट्टधर शिष्य- मानसिंह, दीक्षित नाम- मुनि महिमराज, आचार्य नाम- श्री जिनसिंह सूरि

पूज्य आचार्य प्रवर चतुर्थ दादा गुरूदेव महान कि्रयोद्धारक श्री जिनचन्द्रसूरीश्वरजी म. को पावन पुण्यतिथि पर वंदनावली... आपकी कृपा हम पर बरसती रहे...

bilada, dada gurudev

पूज्य आचार्य प्रवर चतुर्थ दादा गुरूदेव महान कि्रयोद्धारक श्री जिनचन्द्रसूरीश्वरजी म. को पावन पुण्यतिथि पर वंदनावली... आपकी कृपा हम पर बरसती रहे...

bilada, dada gurudev, 

Sep 5, 2014

स्वयं विचार कीजिये :- क्या है सबसे बेहतर !!!

इतना कुछ होते हुए भी
शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी...
मौन होना सब से बेहतर है।

दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी...
सफेद रंग सब से बेहतर है।

खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी...
उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है।

पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी..
पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है।

देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी...
बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है।

सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी...
अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है।

जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी...
सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतरहै।

इंसान के अंदर जो समा जायें वो
             " स्वाभिमान "
                    और
जो इंसान के बहार छलक जायें वो
             " अभिमान "

Sep 2, 2014

मुंबई में महाचमत्कारी दादा गुरुदेव महापूजन का आयोजन



DADA GURUDEV
धर्म नगरी मुंबई में श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ मुंबई के तत्वावधान में श्री मणिधारी युवा परिषद्, मुंबई द्वारा पू. साध्वी सुलोचना श्री जी म.सा की शिष्या पू. साध्वी डाँ. श्री प्रियश्रद्धांजनाश्रीजी म. आदि ठाणा की
पावन निश्रा में महाचमत्कारी दादा गुरुदेव महापूजन का भव्य आयोजन 17अगस्त 2014 को मोरारबाग वाडी में किया गया। 
इस अवसर पर पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री मणिप्रभसागर जी म. के शिष्या पूज्य मुनि श्री मेहुलप्रभसागरजी म. द्वारा संकलित "दादा गुरुदेव की पूजा" पुस्तिका का विमोचन सुश्री मंजूजी लोढा, श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ के संस्थापक अध्यक्ष श्री प्रकाशजी कानुगो एवं अध्यक्ष श्री मांगीलालजी शाह द्वारा किया गया।

Aug 27, 2014

इचलकरंजी श्री मणिधारी जिनचन्द्रसूरि जैन श्वेताम्बर संघ में पूज्य गुरुदेव उपाध्याय श्री मणिप्रभसागरजी ने श्री सुखसागर प्रवचन मंडप में पर्युषण महापर्व के छठे दिन विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा- परमात्मा महावीर के जीवन की सबसे बडी विशिष्टता है कि उनका आचार पक्ष व विचार पक्ष एक समान था। मात्र उपदेश देने वाले तो हजारों हैं, पर उनका अपना जीवन अपने ही उपदेशों के विपरीत होता है। ऐसे व्यक्ति पूज्य नहीं हुआ करते। पूज्य तो वे ही होते हैं, जिनकी कथनी करणी एक समान हो।

ऐसे समय में परमात्मा महावीर के अजर अमर और समय निरपेक्ष सिद्धान्त ही हमारी रक्षा कर सकते हैं। आज अहिंसा, अनेकांत और अपरिग्रह इन तीन सिद्धान्तों को अपनाने की अपेक्षा है। ये तीन सिद्धान्तों के आधार पर पूरे विश्व में शांति और आनन्द का वातावरण छा सकता है।
उन्होंने परमात्मा महावीर के साढे बारह वर्षों में साधना काल की विवेचना करते हुए कहा- परमात्मा महावीर ने क्रोध, मान, माया, लोभ, राग, द्वेष इन भावों को तिलांजलि देकर मौन साधना का प्रारंभ किया। क्रोध की स्थितियों में भी वे पूर्ण करूणा के भावों से भर जाते थे। उनके जीवन की व्याख्या सुनते हुए जब उन्हें मिले कष्टों का विशद विवेचन सुनते हैं तो हमारी आंखों में अश्रु धारा बहने लगती है। संगम देव और कटपूतना के द्वारा दिये गये उपसर्गों को जब सुनते हैं तो हमारे रोंगटे खडे हो जाते हैं। परन्तु परमात्मा महावीर तो करूणा की साक्षात् मूर्ति थे। चण्डकौशिक को उपदेश देने के लिये स्वयं चल कर उसकी बाबी तक पहुँचे थे।

Aug 21, 2014

श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ मुंबई में धर्म आराधना का ठाठ लगा

  धर्म नगरी मुंबई में श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ मुंबई के तत्वावधान में आयोजित पू. साध्वी श्री सुलोचनाश्रीजी म. की शिष्या पू साध्वी डाँ. श्री प्रियश्रद्धांजनाश्रीजी म., प्रियश्रेष्ठांजनाश्रीजी म. की पावन निश्रा में धर्म आराधना का ठाठ लगा हैै। 

ता. 3 अगस्त 2014 को नेम राजुल के जीवन चरित्र पर आधारित नाटिका का मंचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में विठल वाडी प्रांगण से बाजते गाजते नेम कुंवर की बारात निकाली गयी। 

बारात गोडवाल भवन पहुच कर धर्मसभा में परिवर्तित हुयी। प्रवचन के पश्चात बालक बालिकाओं द्वारा नेमकुमार के जीवन से जुडी विभिन्न घटनाओं का सटीक मंचन किया। जिसमें प्रियंवदा दासी द्वारा जन्म की बधाई, कृष्ण महाराजा एवं सत्यभामा व रुक्मणी रानी द्वारा नेम कुंवर को विवाह हेतु मनाना, नेम कुंवर का बारात लेकर आना, पशुओं का आक्रंद सुन अपनी बारात मोडना, नेम कुमार और राजुल के बीच का संवाद, राजुल का बोध एवं संयम लेने का निर्णय तथा राजुल और नेम कुमार का गिरनार की ओर प्रस्थान जैसे विभिन्न द्रश्यों को देख कर उपस्थित जन समुदाय भाव विभोर हो गया।